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आज भी रोशनी की राह देखते हैं 4 हजार परिवार के लोग

7 वर्ष पहले
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भोपाल। एजेंसियों की बेरुखी के कारण मध्यप्रदेश के 44 विद्युत विहीन गांवों के परिवारों को रोशनी के लिए इंतजार करना पड़ रहा है।

मप्र ऊर्जा विकास निगम ने कुछ महीनों से विद्युत विहीन इन गांवों में रहने वाले चार हजार से अधिक परिवारों तक बिजली पहुंचाने की जुगत में लगा हुआ है, लेकिन एजेंसियों में इस प्रोजेक्ट को लेकर रुझान न होने के कारण पिछले पांच महीनों से यह योजना अपने अस्तित्व में ही नहीं आ पा रही है।

मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम की 44 बिना बिजली वाले गांवों को रोशन करने की परियोजना अब एंजेंसियों की बेस्र्खी के कारण अधर में अटकी नजर आ रही है। पिछले पांच महीनों से बार-बार निगम द्वारा योजना का काम आगे बढ़ाने के लिए टेंडर खोले जा रहे हैं। लेकिन, एंजेंसियों के इस प्रोजेक्ट में स्र्झान न लेने के कारण अब यह परियोजना दिन पर दिन लेट होती दिखाई दे रही है।
आलम यह है कि, अभी तक जितनी बार भी निगम ने टेंडर खोला हर बार इक्का-दुक्का एजेंसियां ही टेंडर के लिए लाइन में दिखाई दी।
एक साल का है प्रोजेक्ट
निगम के अधिकारियों द्वारा परियोजना संबंधी अंतिम डीपीआर सरकार को सौंपी जा चुकी है। अधिकारियों ने इस परियोजना को फरवरी 2014 तक पूरा कर लेने का लक्ष्य बनाया है। इस परियोजना के लिए निगम द्वारा पहली बार मार्च 2013 में टेंडर खोला गया था।
इसके बाद से निगम द्वारा लगभग हर महीने ही टेंडर खोले जा रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई भी ऐसा दावेदार इस परियोजना के लिए नहीं मिला, जिसके भरोसे परियोजना को शुरू किया जा सके। एक एजेंसी आई भी, तो वह तकनीकी रूप से निगम की अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतरी। आलम यह है कि, एजेंसियों से निराश होकर अब निगम ने नए सिरे से टेंडर एनाउंट करने की तैयारी शुरू कर दी है। सूत्रों की मानें, तो निगम के कठिन नियमों के कारण एजेंसियां इस टेंडर के लिए अप्लाई करने से कतरा रही है।
2869 लाख का है प्रोजेक्ट
करीब 2869.77 लाख के इस प्रोजेक्ट में मध्यप्रदेश के ऐसे 44 गांवों को रोशन किया जाएगा, जो पूरी तरह बिजली विहीन हैं। सीधी, उमरिया, शहडोल और बालाघाट के 44 गांवों में चिन्हित किए गए, इन गांवों में से हर एक में मिनी ग्रिड लगाई जाएगी। यह परियोजना मप्र के करीब 4 हजार से अधिक परिवारों को बिजली उपलब्ध कराने वाली है। लेकिन, जिस तरह का जीरो इंट्रेस्ट इस प्रोजेक्ट में दिखाई दिया है, उससे तो लगता है कि इन गांवों को अभी और कुछ साल बिना बिजली के, यूं ही लकड़ी और केरोसिन पर निर्भर रहना पड़ेगा।
गौरतलब है कि, प्रोजेक्ट में करीब 675.612 किलोवॉट बिजली गांवों तक पहुंचाने की योजना बनाई गई थी। बिजली पहुंचाने की इस योजना को ऊर्जा निगम ने डिसेंट्रलाइज्ड डिस्ट्रीब्यूशन जेनरेशन प्रोजेक्ट का नाम दिया है, जिसे राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के अंतर्गत चलाया जाएगा।

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