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एमबीए और बीई कर चुके हैं, लेकिन लक्ष्य है पटवारी बनना

10 वर्ष पहले
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ग्वालियर। मैं एक प्राइवेट स्कूल में आईटी का टीचर हूं। घर वाले प्रेशर डालते हैं कि सरकारी नौकरी ढूंढो। वर्ष 2007 में एमसीए पास किया, तब से लेकर अब तक निकली तमाम तरह की सरकारी नौकरियों के लिए आवेदन कर चुका हूं। शादी हो चुकी है। जिंदगी में सुकून और आर्थिक सुरक्षा के लिए सरकारी नौकरी जरूरी है। यह कहना है पटवारी की नौकरी के लिए दस्तावेज का परीक्षण कराने पहुंचे युवक जितेंद्र सिंह का। यह चिंता जितेंद्र की नहीं, बल्कि कई और ऐसे युवकों की है, जो एमबीए, पोस्टग्रेजुएट जैसी उच्च डिग्री हासिल करने के बाद बेरोजगार बैठे हैं।





68 पदों पर 717 उम्मीदवार



भू-अभिलेख एवं बंदोबस्त विभाग के अंतर्गत जिले में पटवारी के 68 पदों पर नियुक्तियां होनी हैं। इनमें 19 पद महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। मंगलवार शाम तक 717 उम्मीदवार कलेक्टर कार्यालय में अपने दस्तावेज का परीक्षण करा चुके थे। पटवारी पद के लिए न्यूनतम योग्यता हायर सेकंडरी और एक वर्ष का कंप्यूटर डिप्लोमा निर्धारित है लेकिन उम्मीदवारों में 35 कंप्यूटर इंजीनियर, 50 एमबीए व एमसीए डिग्रीधारी, लगभग 200 पोस्टग्रेजुएट तथा 400 ग्रेजुएट शामिल हैं। ये सभी छात्र सुरक्षित भविष्य व सुकून के लिए निजी क्षेत्रों को छोड़कर सरकारी नौकरी के लिए प्रयास कर रहे हैं।





जॉब सिक्योरिटी है



सरकारी नौकरी है, इसलिए कम से कम जॉब सिक्योरिटी तो है। बीते साल 2011 में ही आईटीएम कॉलेज से बीई की पढ़ाई पूरी की है। जब तक कोई अच्छी नौकरी नहीं मिलती तब तक पटवारी की नौकरी ही सही। अंकुर गोयल, बीई, कंप्यूटर साइंस





प्राइवेट से तो ठीक



पटवारी की नौकरी है तो क्या हुआ, प्राइवेट जॉब से तो लाख गुना अच्छी है। इसमें प्रेशर नहीं हैं, टेंशन फ्री है। रिटायरमेंट के बाद पेंशन भी है। इस साल बीई पूरी की है। अब मौका है तो प्रयास करके देखते हैं। गीतेश मित्तल, बीई, कंप्यूटर साइंस





सरकारी नौकरी बेहतर



परिवार वालों का कहना है कि सरकारी नौकरी अच्छी है। दूसरी बात यह है कि खुद की नॉलेज का भी पता चल जाएगा कि मैं कितने पानी में हूं। खैर, चांस मिला है तो प्रयास करने में क्या हर्ज है? सुनीता तोमर, एमएससी फिजिक्स