मॉय नेम इज़ स्वामी, सुब्रह्मण्यम स्वामी

6 वर्ष पहले
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शुरुआत टैमब्रेम तमिल ब्राह्म्ण- सुब्रह्मण्यम स्वामी से। स्वामी कांग्रेस के लिए जितने भारी पड़ रहे हैं, उतने ही भारी बीजेपी के लिए भी पड़ रहे हैं। सदस्यता की शपथ के बाद इन सभी छह नए सांसदों को एक फॉर्म भरकर राज्यसभा महासचिव को सौंपना था। पांच ने सौंप दिया, बचे स्वामी, तो वो पहले ही फॉर्म जमा कर चुके थे। बीजेपी के एक पदाधिकारी ने जब उनसे ऐसा करने की वजह पूछी, तो स्वामी ने कह दिया कि उनसे ऐसा करने के लिए अमित शाह ने कहा था। अब आगे पूछने की किसकी मजाल? सदन में स्वामी ने अपनी सीट भी बीजेपी सदस्यों के बीच ली है।
सलाहकार की सलाह पर
दो चीनी असंतुष्टों का भारत वीजा हाल में कैंसिल हुआ। कैंसिल किया गृह मंत्रालय ने। अमूमन गृह मंत्रालय ऐसे फैसले विदेश मंत्रालय की सलाह पर लेता रहा है। लेकिन इस बार राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार की सलाह पर फैसला हुआ। विदेश मंत्रालय ने अभी तक इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
फैन, फैन ना रहा
फैन के बाद शाहरुख खान भी सलमान की, माने मोदी का फैन बनने या मोदी का फैन नजर आने की राह पर चल पड़े हैं। फैन फिल्म की पार्टी के में मौजूद रहे सूत्रों का कहना है कि पार्टी के दौरान उन्होंने मोदी की नेतृत्व क्षमता की तारीफ की। इसी तरह महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में भी शाहरुख खान ने मेक इन इंडिया योजना की तारीफ की। सूत्रों का यहां तक कहना है कि शाहरुख खान ने यह भी सुनिश्चित किया कि इन तारीफों की खबर बाहर वालों को भी हो जाए।
अमेरिका के फैन कॉमरेड
फैन बनने की एक और घटना। जिंदगी भर अमेरिकी साम्राज्यवाद को कोसते रहने वाले जावेद अख्तर जैसे पुराने कॉमरेड इन दिनों अमेरिका के फैन हो गए हैं। हुआ ये कि हाल ही में जावेद अख्तर के साथ एक गंभीर दुर्घटना घटी। वह न्यूयार्क में एक होटल में ठहरे हुए थे और बाथरूम से निकलते हुए उनका पैर फिसल गया था। इससे उनके सिर में गंभीर चोट आई। शबाना आजमी साथ थीं। बाद में जावेद अख्तर और शबाना आजमी ने राज्यसभा के सभापति को बताया कि घटना के दो मिनट के भीतर एम्बुलेंस आ गई थी, डॉक्टर ने उन्हें वहीं, कमरे में ही, एक इंजेक्शन दे दिया था, बिना पूछताछ, बिना आईकार्ड उन्हें पास के अस्पताल में ले जाया गया। सिर्फ उनसे यह पूछा गया था कि क्या उनके पास मेडिक्लेम बीमा है। खास बात ये भी है वे लोग नहीं जानते थे कि ये कौन हैं। अब जावेद अख्तर कह रहे हैं कि इसीलिए तो अमेरिका महाशक्ति है।
शर्मिला की दिक्कत
1947 के विभाजन के दौरान भारत छोड़कर पाकिस्तान जाने वालों की संपत्ति को लेकर बीजेपी सरकार गंभीर है। सरकार इसके कानून पर अमल करने पर आमादा है, लेकिन कांग्रेस इस पर सवाल उठा रही है। दरअसल गहरी समस्या है शर्मिला टैगोर के सामने। उनकी, माने मरहूम नवाब मंसूर अली खां पटौदी की मिल्कियत इस कानून के दायरे में है। शर्मिला टैगोर इस मामले को लेकर राजनाथ सिंह से मिल चुकी हैं, और राजनाथ सिंह ने उन्हें वादा किया है कि किसी के साथ अन्याय नहीं होगा। शर्मिला टैगोर पाकिस्तान जाकर नवाज शरीफ के साथ भी लंच मीटिंग कर आई हैं। शर्मिला टैगोर को सोनिया गांधी का करीबी माना जाता है। यूपीए के दिनों में वह सेंसर बोर्ड की अध्यक्ष भी रही हैं।
लालूजी की प्रतिज्ञा
संसद चल रही है, संसद का सेंट्रल हॉल गुलजार है, लेकिन वहां लालू प्रसाद के न आने से सारे दुखी हैं। आखिर हंसी-ठिठोली तो लालूजी ही जानते हैं ना। उधर लालूजी भी कोर्ट इलेक्शन नईं लड़ने दी- इस बात को लेकर भरपेट दुखी हैं। सेंट्रल हॉल आने के मसले पर लालूजी का कहना है कि हम जब एमपी बनेंगे, तभी आएंगे, हम प्रतिज्ञा कर लिए हैं।
कौन बनेगा, कौन जाएगा?
पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों पर कई लोगों की जान अटकी हुई है। चर्चा ये है कि उसी के बाद मंत्रिपरिषद में फेरबदल होगा। सवाल यह है कि क्या कोई मनोनीत सदस्य मंत्री बनाया जा सकता है? पहले कांग्रेस राज में बनाया जा चुका है। माने स्वामी मंत्री बन सकते हैं, लेकिन कानून मंत्री शायद न बनें। स्वप्न दासगुप्ता को एचआरडी में राज्यमंत्री बनाया जा सकता है। नकवी को सूचना-प्रसारण राज्यमंत्री बनाया जा सकता है। अगर बीजेपी असम में जीत गई, तो राज्यवर्धन सिंह राठौर खेल मंत्री होंगे। बीजेपी के एक मुख्यमंत्री को भी केन्द्र में मंत्री बनाए जाने की चर्चा है।
होगी बड़ी सर्जरी
दो सरकारी चैनलों से सरकार दुखी है। एक का नाम है राज्यसभा टीवी और दूसरे का नाम है लोकसभा टीवी। राज्यसभा टीवी का नियमित एजेंडा भाजपा विरोध है, सारे एंकर, सारे कार्यक्रम, सारे विचार धुर भाजपा विरोधी होते हैं, लेकिन सरकार कुछ नहीं कर सकती, क्योंकि उसके बॉस राज्यसभा के सभापति हामिद अंसारी हैं। इसी तरह सरकार लोकसभा टीवी से भी दुखी है। उसकी बॉस लोकसभा की स्पीकर सुमित्रा महाजन हैं। लोकसभा टीवी की सीईओ का कार्यकाल नवंबर में खत्म होना है। स्पीकर चाहती हैं कि सीईओ को बदला जाए। लेकिन खुद स्पीकर के पसंदीदा लोगों में, मीडिया सलाहकार, सचिव, सीईओ मार्केटिंग, और ना जाने कौन-कौन में आपस में जबरदस्त खींचतान है। सरकार तो सरकार, खुद पीएम इससे चिंतित हैं। उधर सरकार के लिए एक अन्य और स्वतंत्र परेशानी प्रसार भारती के सीईओ जवाहर सरकार बने हुए हैं। न वो जाने के लिए राजी हो रहे हैं, न अड़ने के लिए। इन गुत्थियों को सुलझाने के लिए कोई बड़ी सर्जरी भी हो सकती है।
क्षेत्रीय पार्टी बनाएंगे वंजारा
जेल से रिहा होने के बाद गुजरात के पूर्व डीआईजी डीजी वंजारा राजनीति में उतरने का मन बना रहे हैं। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत से उनकी एक बार मुलाकात भी हो चुकी है और गुजरात में उन्हें व्यापक समर्थन भी मिल रहा है। लेकिन भाजपा में उन्हें फिलहाल जगह शायद न मिले और उन्हें अपनी पारी एक क्षेत्रीय पार्टी बनाकर शुरु करनी पड़े। उधर सवाल यह भी है कि हार्दिक पटेल क्या करेंगे। वह अभी जेल में हैं।
जिस राह आए....
झारखंड कैडर के आईएएस आर. के. श्रीवास्तव को मोदी सरकार ने केन्द्र में लाकर एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया का चेयरमैन बनाया था। अब मोदी सरकार ने ही उन्हें वापस झारखंड रवाना कर दिया है। क्यों? कारण तो सरकार ही जानती होगी, लेकिन सुना है कि एक अन्य चेयरमैन सह प्रबंध निदेशक भी इसी रास्ते पर बढ़ाए जाने वाले हैं।
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