महिलाओं के लिए लिखी जा रही है नई कामसूत्र

11 वर्ष पहले
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नई दिल्ली. महर्षि वात्स्यायन द्वारा लिखित कामसूत्र 'काम' (संभोग) के विभिन्न आसनों के लिए जाना जाता है। दुनिया भर में यौन बिमारीयों और बढते एड्स के कारण इस किताब पर लोगों का खूब ध्यान गया है। पर अब इस किताब पर पुरुषवादी होने के आरोप लगाकर लेखिका के. आर. इंदिरा महिलाओं के लिए अलग कामसूत्र लिख रही हैं। यह किताब इसी साल जून में बाजार में आ जाएगी।





एक प्रतिष्ठित अंग्रेजी समाचार पत्र के मुताबिक इस किताब की लेखिका का मानना है कि वात्स्यायन का कामसूत्र पुरुषों के नजरिए से लिखा गया है। इसमें यह बताया गया है कि महिलाओं को संभोग के दौरान क्या और कैसे करने चाहिए। जो कि पुरुषवादी मानसिकता का परिचायक है। इसलिए उन्होंने इसे महिलाओं के नजरिए से लिखा है।





बताते चलें कि वात्स्यायन के कामसूत्र में कामकलाओं का वर्णन किया गया है। यह किताब पश्चिमी देशों में काफी लोकप्रिय है। अर्थ के क्षेत्र में जो स्थान कौटिल्य का है, काम के क्षेत्र में वही स्थान महर्षि वात्स्यायन का है। अधिकृत प्रमाण के अभाव में महर्षि का काल निर्धारण नहीं हो पाया है, परन्तु अनेक विद्वानों तथा शोधकर्ताओं के अनुसार महर्षि ने अपने विश्वविख्यात ग्रन्थ कामसूत्र की रचना ईसा की तृतीय शताब्दी के मध्य में की होगी।





महर्षि के कामसूत्र ने न केवल दाम्पत्य जीवन का श्रृंगार किया है वरन कला, शिल्पकला एवं साहित्य को भी संपदित किया है। राजस्थान की दुर्लभ यौन चित्रकारी तथा खजुराहो, कोणार्क आदि की जीवन्त शिल्पकला भी कामसूत्र से प्रभावित हैं। कामसूत्र को उसके विभिन्न आसनों के लिए ही जाना जाता है।





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