• Hindi News
  • Online E passbook For Provident Fund Account Holder

अब ई-पासबुक से जानें पीएफ खाते की डिटेल

9 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
नई दिल्‍ली. यूपीए सरकार का दूसरा अहम सोशल एजेंडा भूमि अधिग्रहण विधेयक लोकसभा में पारित हो गया। किसानों की जमीन अधिग्रहण से जुड़े कई प्रावधानों पर लोकसभा में लंबी बहस के बाद विधेयक को मंजूरी मिल गई।
विधेयक पारित होने के बाद सबकी नजरें बाजार पर टिकी हैं। सरकार ने विधेयक को किसानों के हित में बताया। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश ने कहा कि किसानों के हित में कानून बना है। उनकी इच्छा के बगैर जमीन नहीं ली जाएगी। मुआवजा काफी बढ़ा दिया गया है। कई संशोधनों को भी सरकार ने मंजूर कर लिया।
विधेयक में खास
ञ्चग्रामीण इलाकों में मुआवजा जमीन के बाजार मूल्य से 4 गुना और शहरी इलाकों में 2 गुना होगा।
ञ्चभू स्वामी को एकमुश्त नगद भुगतान के अतिरिक्त जमीन के बदले जमीन, घर, रोजगार और वार्षिक भत्ता जैसे फायदे।
-भूमि अधिग्रहण के मामलों में लोगों के साथ अन्याय होने के ऐतिहासिक मामलों पर ध्यान देने के लिए विधेयक उन मामलों में पुराने समय से प्रभावी होगा जहां भूमि अधिग्रहण का फैसला लागू नहीं हुआ है।
-ग्राम सभाओं की मंजूरी के बिना अनुसूचित क्षेत्रों में कोई जमीन अधिग्रहण नहीं हो सकता।
-किसी की जमीन पर तब तक उसका कब्जा समाप्त नहीं होगा जब तक उसे समस्त भुगतान नहीं कर दिया जाता और पुनर्वास तथा पुनस्र्थापन के लिए वैकल्पिक स्थान नहीं विकसित किया जाता।
- सार्वजनिक-निजी साझेदारी वाली परियोजना में कम से कम 70 फीसदी जमीन मालिकों की मंजूरी और निजी कंपनियों के लिए अधिग्रहण में 80 प्रतिशत की मंजूरी जरूरी होगी।
-नए कानून के तहत किसी व्यक्ति को मुआवजे के रूप में जो भुगतान होता है, उस पर कोई आयकर नहीं लगेगा और स्टांप ड्यूटी लागू नहीं होगी।
-यदि पहले ही खरीदी जा चुकी जमीन को किसी तीसरे पक्ष को उच्च दामों पर बेचा जाता है तो जमीन की मूल्यवृद्धि का 40 प्रतिशत मूल स्वामियों से साझा किया जाना चाहिए।
-प्रत्येक परियोजना में जिस व्यक्ति की जमीन जा रही है और यदि वह अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति से ताल्लुक रखता है तो उस अधिग्रहीत जमीन के बराबर या ढाई एकड़ जमीन जो भी कम हो, दी जाएगी।
-प्रभावित परिवार अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति से संबंध रखता हो और उसे जिले के बाहर पुनर्वासित किया जा रहा हो तो उन्हें 25 फीसदी अतिरिक्त पुनर्वास और पुनस्र्थापन लाभ दिए जाएंगे, जिसके लिए वे 50 हजार रुपए एकमुश्त अधिकार के साथ आर्थिक तौर पर पाने के हकदार हैं।
क्या बोले नेता
भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने कहा कि तीन दिन की सूचना पर भूमि अधिग्रहण करने की जो व्यवस्था विधेयक में की गई है यह सरासर अन्याय है। सरकार को ऐसी स्थिति में भू स्वामियों को अतिरिक्त लाभ देने की व्यवस्था करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जमीन अधिग्रहण से पहले सामाजिक, पर्यावरणीय प्रभाव का आकलन हर अधिग्रहण में होना चाहिए। कृषि योग्य भूमि और बहुफसली जमीन का अधिग्रहण किसी भी सूरत में किसान की मंजूरी के बिना नहीं होना चाहिए।
- एनसीपी नेता सुप्रिया सुले ने कहा कि खाद्य सुरक्षा विधेयक पारित होने के बाद अगर समाज के किसी तबके को सरकार के किसी कदम को लेकर संदेह है तो उसे दूर किया जाना चाहिए। भूमि अधिग्रहण पर सिर्फ मुआवजा देना काफी नहीं है और उद्योगों को स्थानीय जनता के विकास पर भी ध्यान देना चाहिए।
- राजद नेता लालू प्रसाद यादव ने कहा कि किसानों को निजी क्षेत्र से जमीन का सीधे सौदा करने का अधिकार दिया जाना चाहिए। उन्हें जमीन के मुआवजे के साथ उनकी भूमि पर लगने वाले उद्योग के शेयर भी दिए जाने चाहिए।
-मीनाक्षी नटराजन ने विधेयक का स्वागत किया साथ ही कहा कि भूमि रिकार्ड को दुरुस्त करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि कई राज्यों में वन भूमि और राजस्व भूमि को लेकर बड़ा घालमेल है। उन्होंने आदिवासियों को वनोपज पर अधिकार प्रदान करने के लिए कुछ साल पहले बनाए गए कानून के संबंध में कहा कि इस संबंध में नियम अभी तक नहीं बनाए गए हैं।
-सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने कहा कि किसानों की जमीन न ली जाए क्योंकि उसके पास खेती के अलावा कुछ नहीं है। उन्होंने खेती लायक उपजाऊ भूमि का किसी कीमत पर अधिग्रहण नहीं किए जाने पर जोर देते हुए कहा कि बेकार, परती और बंजर जमीन को कारखाना लगाने के लिए अधिग्रहीत किया जाना चाहिए।
-माकपा सांसद वासुदेव आचार्य ने विधेयक को समग्र बनाने की मांग करते हुए कहा कि पुनर्वास पैकेज कानून के क्रियान्वयन के एक साल बाद नहीं, तुरंत किया जाना चाहिए।जमीन की कीमत बाजार भाव के हिसाब से तय की जानी चाहिए। उन्होंने परियोजनाओं में किसानों को रोजगार देने की भी मांग की। तृणमूल सांसदों से उनकी तीखी तकरार भी हुई।
-तृणमूल कांग्रेस के सुदीप बंदोपाध्याय ने 1894 के भूमि अधिग्रहण कानून को काला कानून बताया और सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रतिकूल टिप्पणियों का जिक्र किया। माकपा के सदस्यों ने प्रतिवाद किया तो दोनों दलों में तीखी तकरार हुई। उन्होंने कहा कि सरकार मध्यस्थ की भूमिका नहीं निभाए। उद्योग-धंधों के लिए एकल फसलीय अथवा बंजर जमीन ही अधिग्रहीत की जानी चाहिए।
जमीन लीज पर ली जाए
राजनाथ सिंह और बाद में सुषमा स्वराज ने सुझाव दिया कि किसानों की जमीन लीज पर ली जानी चाहिए और अगर किसी जमीन का अधिग्रहण किया जाए या लीज पर ली जाए तो इसका फैसला किसानों की इच्छा से होना चाहिए।

अब 15 हजार की सैलरी पर भी कटेगा पीएफ

अब होटल में आपको परोसा जाएगा 'जूठा' खाना

अब 62 साल पर रिटायर होंगे केंद्रीय कर्मचारी