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सेक्स पर इस संत की बेबाकी ने मचा दी थी सनसनी

10 वर्ष पहले
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महान विचारक और दार्शनिक ओशो के सेक्स पर दिया ज्ञान आज भी समाज को दिशा निर्देशित करता रहता है। ओशो ने साफ शब्दों में कहा है कि हम सेक्स को जितना दबाने की कोशिश करते हैं वह उतना ही भड़कता है। वह युवाओं के लिए कहते हैं कि जिस दिन दुनिया में भोजन और स्‍नान की तरह सेक्स स्‍वीकृत हो जाएगा उस दिन से समाज से बुराई खत्म हो जाएगी।





वह कहते हैं कि, ''सेक्स को खुली स्वीकृती मिलने से समाज बदलने लगेगा। दुनिया में अश्‍लील पोस्‍टर नहीं लगेंगे। अश्‍लील किताबें नहीं छपेगी। अश्‍लील मंदिर नहीं बनेंगे। क्‍योंकि जैसे-जैसे वह स्‍वीकृति होता जाएगा। अश्‍लील पोस्‍टरों को बनाने की कोई जरूरत नहीं रहेगी।''





उन्होंने लिखा है, ''अगर किसी समाज में भोजन वर्जित कर दिया जाये, की भोजन छिपकर खाना। कोई देख न ले। अगर किसी समाज में यह हो कि भोजन करना पाप है, तो भोजन के पोस्‍टर सड़कों पर लगने लगेंगे फौरन। क्‍योंकि आदमी तब पोस्‍टरों से भी तृप्‍ति पाने की कोशिश करेगा। पोस्‍टर से तृप्‍ति तभी पायी जाती है। जब जिंदगी तृप्‍ति देना बंद कर देती है। जिंदगी में तृप्‍ति पाने का द्वार बंद हो जाता है।''





ओशो आगे लिखते हैं कि, ''मैं युवकों से कहना चाहूंगा कि तुम जिस दुनिया को बनाने में संलग्न हो, उसमें सेक्‍स को वर्जित मत करना। अन्‍यथा आदमी और भी कामुक से कामुक होता चला जाएगा। मेरी यह बात देखने में बड़ी उल्टी लगेगी। पर यह सौ फीसदी सही है कि आज जितना कामुक आदमी भारत में है। उतना कामुक आदमी पृथ्‍वी के किसी कोने में नहीं है।''