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क्यों ग़लत हो जाते हैं ओपिनियन पोल?

9 वर्ष पहले
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नई दिल्ली. उत्तर प्रदेश में सातवें दौर की वोटिंग शनिवार शाम खत्म होने के बाद एग्जिट ओपिनियन पोल के नतीजे सामने आ रहे हैं। ज्यादातर एग्जिट-ओपेनियन पोल के मुताबिक यूपी में सपा सबसे बड़ी पार्टी बनती हुई नजर आ रही है। लेकिन सभी पार्टियां बहुमत के आंकड़े से दूर हैं।





ऐसे में एक स्थिति यह हो सकती है कि सपा, कांग्रेस-आरएलडी के साथ गठबंधन करके सरकार भी बना सकती है। वहीं, राज्य में राष्ट्रपति शासन लगने की बात भी कही जा रही है। लेकिन ये सब अब भी कयास, अनुमान है। यह गलत भी हो सकता है। एग्जिट-ओपिनियन पोल के पुराने रिकॉर्ड देखें तो स्थिति साफ हो जाती है। पिछले चुनावों में एग्जिट-ओपेनियन पोल और वास्तविक परिणाम में बहुत अंतर देखा गया है। सन् 2007 के विधानसभा चुनाव में टाइम्स नाउ के एग्जिट पोल के मुताबिक सपा को 100 से 110, बसपा को 116 से 126, बीजेपी गठबंधन को 114 से 124, कांग्रेस गठबंधन को 25 से 35 सीट मिलने का अनुमान था।





स्टार न्यूज के एग्जिट पोल के मुताबिक सपा को 96, बसपा को 137, बीजेपी गठबंधन को 108, कांग्रेस गठबंधन को 27 सीट मिलने का अनुमान था। सीएनएन-आईबीएन एग्जिट पोल के मुताबिक सपा को 99 से 111, बसपा को 152 से 168, बीजेपी गठबंधन को 80 से 90, कांग्रेस गठबंधन को 25 से 33 सीट मिलने का अनुमान था। जब चुनाव परिणाम आए तो सभी चौक गए, क्योंकि कोई भी यह अनुमान नहीं लगा पाया था कि बसपा को बहुमत मिलेगा। सारे एग्जिट पोल को दरकिनार करते हुए बसपा ने 206 सीटें प्राप्त की थीं। सपा को 97, बीजेपी गठबंधन को 51, कांग्रेस गठबंधन को 22 सीट मिली थी। सन् 2002 में हुए चुनाव की तुलना में बसपा को 110 सीट ज्यादा और सपा को 46 सीट कम मिली थी।



क्यों अधिकतर गलत निकलते हैं ओपिनियन पोल



1-दिल्ली के अनुसंधान एवं विकास पहल के संस्थापक देवेंद्र कुमार के मुताबिक, 'भारतीय समाज और राजनीति की बहुलता के संदर्भ में एग्जिट-ओपेनियन पोल हमरे लिए अनुपयुक्त है। भले ही एग्जिट-ओपेनियन पोल एक विज्ञान है, लेकिन भारत में इसकी अलगप्रक्रिया अपनानी पड़ेगी। करोड़ों की जनसंख्या में से हजार लोगों के रुझान को लेकर सही अनुमान नहीं लगाया जा सकता है।'



2-भारत में चुनाव कई लोकल फैक्टर से भी प्रभावित होते हैं। मसलन जाति-धर्म, राजनीतिक गठजोड़, चुनावी रुझान आदि। यहां मतदान के एक दिन पहले तक हुई कोई घटना या तथ्य मतदाता को प्रभावित कर सकता है।



3-पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च के निदेशक सीवी मधुकर के मुताबिक, 'एग्जिट-ओपेनियन पोल से हमें केवल परिणाम के संकेत मिलते हैं, यह वास्तविक नहीं होता। इसे और वैज्ञानिकता के साथ करने की जरूरत है।'



एग्जिट पोल: सपा बनेगी सबसे बड़ी पार्टी!



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