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बेहतर रिजल्ट लाने वाले शिक्षकों को टूर पैकेज

9 वर्ष पहले
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जालंधर. प्राइवेट कंपनियों की तर्ज पर शिक्षा विभाग अब टारगेट पूरा करने वाले शिक्षकों को इंसेंटिव देने जा रहा है। शिक्षकों का टारगेट था, परीक्षा में विद्यार्थियों का बेहतर रिजल्ट लाना। जो शिक्षक इसमें कामयाब रहे हैं, उन्हें तीन दिन का टूर पैकेज दिया गया है। इसके तहत वे ऐतिहासिक स्थान पर पर जाएंगे। ऐसे 75 शिक्षकों का चयन किया गया है, जिनके रहने और खाने-पीने पर आने वाला दो हजार रुपए का खर्च राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान (रमसा) की ओर से किया जाएगा। रमसा के जिला कोआर्डिनेटर जतिंदर कुमार टूर की प्लानिंग में जुटे हैं। शिक्षकों की सूची बनाई जा रही है। टूर के कारण बच्चों की पढ़ाई का हर्जा न हो, इसलिए अप्रैल के पहले सप्ताह में ही इसका आयोजन होगा। सरकारी स्कूलों में 5 अप्रैल से पढ़ाई शुरू होगी। टूर के लिए आगरा, पिंक सिटी जयपुर व अजमेर में से किसी स्थान का चयन होगा। अभी तक तो रुकते थे इंक्रीमेंट रिजल्ट आने के बाद जिले व स्कूलों की रिपोर्ट तैयार होती थी। यदि किसी शिक्षक के पढ़ाए बच्चों का रिजल्ट 10 से 25 फीसदी के बीच आता था, उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू हो जाती थी। उनकी तरक्की और इंक्रीमेंट तक रोक दिया जाता था। अभी बीते दिनों 47 अध्यापकों के इंक्रीमेंट पर रोक लगा दी गई थी। नई नीति शिक्षा में सुधार और अच्छा काम करने वाले शिक्षकों को प्रोत्साहित करने के लिए अपनाई गई है। फैमिली भी जा सकती है टूर में तीन दिवसीय टूर अध्यापकों के लिए है, लेकिन वे अपने परिवार वालों को भी साथ ले जा सकते हैं। हां उनका खर्च शिक्षकों को अपनी जेब से देना होगा। जिला कोआर्डिनेटर रमसा जतिंदर कुमार ने बताया कि अधिकारियों की तरफ से पॉजिटिव रिजल्ट लाने अध्यापकों को प्रोत्साहित करने के लिए ऐतिहासिक टूर पर ले जाने संबंधी निर्देश और फंड मिल चुके हैं। मगर अभी यह पूरी तरह से तय नहीं किया गया है कि अध्यापकों को किस स्थान पर ले जाया जाए। नहीं मिला अध्यापकों को वेतन जालंधर. एडिड स्कूल अध्यापकों को दूसरे दिन भी खजाना दफ्तर से निराशा ही हाथ लगी। बीते दिन खजाना दफ्तर की तरफ से जिले के 43 स्कूलों को वेतन जारी कर दिया गया था, जबकि दस सीनियर सेकेंडरी एडिड व प्राइमरी के 11 स्कूलों को वेतन नहीं मिल पाया था। पंजाब स्टेट एडिड स्कूल एंड अदर्स इम्प्लाइज यूनियन के महासचिव केसी चौधरी ने कहा कि खजाना खुलने की वजह से ही प्रदर्शन का फैसला रद कर दिया गया था। ऐसे में अब जल्द रुके हुए स्कूलों के अध्यापकों को भी वेतन जारी न किया गया तो उन्हें पुन: संघर्ष का रास्ता अपना प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होना होगा।