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पंजाबी नहीं आती है तो ग्रेजुएशन नहीं कर पाएंगे

9 वर्ष पहले
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जालंधर. गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी ने दूसरे राज्यों से आए विद्यार्थियों के लिए एलिमेंट्री पंजाबी अनिवार्य कर दी है। यह फैसले विद्यार्थियों के भविष्य पर सवाल खड़ा करने वाला बन गया है। यूनिवर्सिटी ने पंजाबी के एवज में एकमात्र ऑप्शन पंजाब हिस्ट्री एंड कल्चर विषय को भी बंद कर दिया है।



जिन विद्यार्थियों ने आज तक पंजाबी पढ़ी नहीं, वे एकदम से पंजाबी कैसे सीख जाएंगे? सरकार ने पंजाब में सभी छात्रों के लिए दसवीं में पंजाबी अनिवार्य कर रखी है, मगर हायर क्लासों में दूसरे राज्यों से आए विद्यार्थी पंजाबी की जगह पंजाब हिस्ट्री एंड कल्चर पढ़ सकते हैं। इस आधार पर भी उन्हें यहां सरकारी नौकरी मिल जाती है। अब यूनिवर्सिटी ने यह ऑप्शन खत्म कर दी। बाहरी राज्यों से आने वाले विद्यार्थियों को भी हर हाल में पंजाबी पढ़नी होगी।



वरना पंजाब में नौकरी असंभव होगी। इस फैसले का अध्यापक भी विरोध कर रहे हैं। अध्यापकों ने यूनिवर्सिटी के फैसले को हाईकोर्ट में चेतावनी दे डाली है, जिस पर 25 जून को सुनवाई होनी है।



सैनिकों के बच्चे परेशान



जीएनडीयू के इस फैसले से सैनिकों के बच्चे भी मुश्किल में हैं। दूसरे राज्यों से ट्रांसफर होकर आए सैनिकों के बच्चे अगर यहां ग्रेजुएशन करते हैं तो फिर पंजाब में नौकरी की उनकी चाहत पूरी नहीं होगी। सीबीएसई से पढ़ने वाले विद्यार्थियों को भी दिक्कत आएगी, क्योंकि कई सीबीएसई स्कूलों में विद्यार्थियों ने पंजाबी भाषा का चुनाव नहीं किया है। आगे ग्रेजुएशन के स्तर पर पढ़ाई मुश्किल हो रहा है।



अचानक से विषय खत्म करना गलत



एपीजे कालेज ऑफ फाइन आर्ट्स के पंजाब हिस्ट्री एंड कल्चर के प्रो. विश्वबंधू वर्मा ने बताया कि यूनिवर्सिटी के इस फैसले से विद्यार्थियों को बड़ा नुकसान हुआ है। राज्य में करीब 6 हजार विद्यार्थी इस विषय से जुड़े थे और करीब 200 अध्यापक भी इस विषय पर काम कर रहे हैं। इनमें एडहॉक व रेगुलर दोनों ही शामिल हैं। अचानक से विषय को खत्म करना गलत है। वीसी अजायब सिंह बराड़ से विषय की ऑप्शन बंद न करने की गुजारिश की गई थी, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। हाईकोर्ट में रिट दायर की है और कोर्ट ने यूनिवर्सिटी को नोटिस जारी कर विषय पर दोबारा सोचने के निर्देश दिए हैं।



25 साल से चल रहा था कोर्स



कन्या महाविद्यालय की पंजाब हिस्ट्री एंड कल्चर की प्रो. गुरजोत कौर ने बताया कि यूनिवर्सिटी में पंजाब हिस्ट्री एंड कल्चर विषय पिछले 25 सालों से पढ़ाया जा रहा है। हर साल हजारों बच्चे जुड़ते हैं जो पंजाबी न आने की वजह से पीएचसी पढ़कर अपना काम चला लेते हैं। यूनिवर्सिटी ने विद्यार्थियों व अध्यापकों दोनों पर तलवार लटका दी है। राज्य में पंजाबी पढा़ई जाए लेकिन दूसरे विकल्प खुले रखने चाहिए। हिस्ट्री पढ़ा रहे अध्यापकों की गिनती भी अब कालेजों में कम होगी, क्योंकि यूजीसी गाइडलाइन्स के मुताबिक ग्रेजुएशन कोर्स में 1 अध्यापक को 4 लेक्चर लेना जरूरी है और ऐसा करने पर अध्यापकों की जरूरत ही नहीं रहेगी, क्योंकि पीएचसी बंद होने से हिस्ट्री के अध्यापकों को अलग लेक्चर नहीं मिल पाएंगे।