चुनावी ड्यूटी में नहीं चलेगा बीमारी का बहाना

10 वर्ष पहले
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अमृतसर.चुनावी ड्यूटी में बीमारी का बहाना बनाकर छुट्टी का आवेदन करने वालों पर भी मुख्य चुनाव अधिकारी ने आंखें तरेर ली हैं। आए दिन बीमारी को लेकर छुट्टी मांगने वालों की कोई कमी नहीं है। इसके लिए ऊंची सिफारिशें लगाने से भी लोग गुरेज नहीं कर रहे हैं।



छुट्टी की चाह में घरों में शादी का बहाना भी बनाया जा रहा है, लेकिन अब हरेक को छुट्टी देना चुनाव अधिकारी के बस में नहीं। इससे बचने के लिए डीसी रजत अग्रवाल ने सिविल अस्पताल के सीनियर मेडिकल अधिकारी को बोर्ड गठित करने के आदेश जारी किए हैं। चुनाव अधिकारी के पास छुट्टी का आवेदन करने वालों को अब डाक्टरी जांच से गुजरना पड़ेगा।



डीसी के आदेशों के बाद सिविल अस्पताल में चार डाक्टरों का बोर्ड बनाया गया है, जो किसी भी बीमारी को लेकर चुनाव में राहत मांगने वालों की जांच करेगा। इसी आधार पर तय किया जाएगा कि किसे छुट्टी दी जाए और किसे नहीं। जानकारी के अनुसार 30 जनवरी को होने वाले चुनावों में दस हजार से अधिक कर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है। कुछ कर्मी चुनावी ड्यूटी को लेकर परेशान हैं और बचने के लिए सिफारिशें लगवा रहे हैं। कुछेक बीमारी का बहाना बना रहे हैं।



चार डाक्टरों का पैनल गठित



सिविल अस्पताल के एसएमओ डा. बलबीर सिंह ढिल्लों का कहना है कि डीसी के आदेशों के बाद उन्होंने चार डाक्टरों का पैनल बना दिया है। इसमें महिला रोग विशेषज्ञ डा. जसविंदर कौर, सर्जन डा. मंजीत सिंह खालसा, मेडिकल विशेषज्ञ डा. राजीव मेहरा तथा ऑथरे के डा. चरणजीत शामिल हैं।



किसी भी बीमारी को लेकर छुट्टी मांगने वालों की जांच के बाद यही डाक्टर तय करेंगे कि किसे छुट्टी दी जाए और किसे नहीं। डीसी अग्रवाल ने कहा कि किसी गंभीर बीमारी में ही किसी कर्मचारी को चुनावी ड्यूटी से राहत दी जा सकेगी। विकलांगों को चुनावी ड्यूटी से हटाया जा सकता है। उन्होंने माना कि बीमारी को आधार बनाकर कई लोग उनसे संपर्क साध चुके हैं, लेकिन अब डाक्टरों की टीम द्वारा जारी रिपोर्ट के आधार पर ही किसी को चुनावी ड्यूटी से राहत दी जा सकेगी।