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नए विश्वविद्यालयों के अध्यादेश में आरक्षण नीति का पालन नहीं

9 वर्ष पहले
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जयपुर.राज्य में खुलने वाले छह नए विश्वविद्यालयों के अध्यादेश में आरक्षण नीति का पालन नहीं किए जाने का आरोप लगाते हुए युवा गुर्जर महासभा ने राज्य सरकार से इस मामले में गंभीरता से विचार करने की गुजारिश की है। महासभा का कहना है कि अधिकारियों की ओर से आरक्षण नीति की पालना नहीं किए जाने पर प्रदेश के गुर्जर युवाओं में भारी आक्रोश है। इस मामले में राज्यपाल, मुख्यमंत्री और उच्च शिक्षामंत्री से तत्काल आवश्यक सुधार की मांग की गई है। महासभा के प्रदेशाध्यक्ष विक्रमसिंह गुर्जर ने सरकार को भेजे पत्र में आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने एसटी, एससी, ओबीसी, एसबीसी के युवाओं को उच्च शिक्षा में सक्रिय भागीदारी से वंचित रखने का प्रयास किया है। महासभा का कहना है कि तमिलनाडु के बीआर अंबेडकर विधि विश्वविद्यालय और कर्नाटक के अंबेडकर विधि विश्वविद्यालय के अध्यादेश में नियुक्ति एवं सेवा शर्तो में साफ लिखा गया है कि इन विवि में होने वाली नियुक्तियां आरक्षण नीति के अनुसार होंगी। ऐसे में राज्य में स्थापित होने वाले विश्वविद्यालयों में यह प्रावधान नहीं रखा जाना हैरत का विषय है। महासभा का कहना है कि ये प्रारूप अध्यादेश राजस्थान विश्वविद्यालय के वर्ष 1946 के अधिनियम पर आधारित हैं, उस समय देश में एसटी, एससी सहित अन्य आरक्षित वर्ग के लिए आरक्षण के प्रावधान नहीं रहे थे। संगठन के महासचिव प्रेमसिंह ने प्रस्तावित अध्यादेश के प्रावधानों के दुबारा परीक्षण करवाने की मांग की है।