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पदोन्नति से रोक हटी, आरक्षण भी मिलेगा

9 वर्ष पहले
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जयपुर.सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राज्य सरकार ने बुधवार को आदेश जारी कर वरिष्ठता सूचियां बनाने और पदोन्नतियों पर लगी रोक को हटा दिया है। यह रोक पिछले छह माह से लगी हुई थी। राज्य सरकार ने इसके लिए 29 फरवरी, 2012 को जारी आदेश को निरस्त कर दिया है।

कार्मिक विभाग की ओर से जारी आदेश में सभी विभागों को 11 सितंबर, 2011 को जारी अधिसूचना के आधार पर वरिष्ठता सूचियां बनाने और पदोन्नति देने के निर्देश दिए हैं। इसके अनुसार पदोन्नति में एससी वर्ग को 16 प्रतिशत और एसटी वर्ग को 12 प्रतिशत आरक्षण रहेगा। यह सारी प्रक्रिया 25 अक्टूबर तक पूरी करने की हिदायत दी गई है। सुप्रीम कोर्ट ने दो माह में प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए थे।

राज्य सरकार ने उसी अधिसूचना के अनुसार पदोन्नतियां देने और वरिष्ठता सूचियां बनाने के निर्देश दिए हैं, जिसे हाई कोर्ट ने अवमानना करार दिया था। हालांकि बाद में सुप्रीम कोर्ट ने इसे अवमानना मानने से इनकार कर दिया था। इससे पदोन्नति में आरक्षण के खिलाफ लड़ाई लड़ने वालों को झटका लगा है।

इस मामले को लेकर कोर्ट और सड़कों पर लंबी लड़ाई लड़ने वाले समता आंदोलन समिति और मिशन-72 ने इसे एक और अवमानना करार दिया है। समता आंदोलन के प्रदेशाध्यक्ष पाराशर नारायण शर्मा ने कहा कि इस एक और अवमानना को कोर्ट में आगे भी चुनौती दी जाएगी। उन्होंने बताया कि इस आदेश से सामान्य वर्ग के लोगों को रीगेनिंग का लाभ नहीं मिलेगा।

चार लाख कर्मचारियों को मिलेगा लाभ

रोक हटने के बाद अब सभी विभागों में पदोन्नति होंगी और वरिष्ठता सूचियां बनेंगी। इससे विभिन्न पदों पर कार्यरत चार लाख से अधिक कार्मिकों को पदोन्नति का लाभ मिल सकेगा। सर्वाधिक लाभ एससी और एसटी के कार्मिकों को मिलेगा।

यह है 11 सितंबर, 2011 की अधिसूचना

11 सितंबर, 2011 की अधिसूचना के अनुसार एससी और एसटी वर्ग के कार्मिकों की पारिणामिक वरिष्ठता रोस्टर के आखिर तक जारी रहेगी। साथ ही एससी एसटी के लिए चिह्नित पदों पर रिक्तियां होते ही पदोन्नति दी जाएगी। यह भी प्रावधान किया गया कि अगर किसी एससी एसटी वर्ग के किसी कार्मिक को पहले पदोन्नति दे दी गई है और आरक्षित 16 और 12 प्रतिशत पदों से कोई कार्मिक ज्यादा है तो ऐसे कार्मिकों को एडहॉक माना जाएगा। उसे बाद में जिस साल के लिए वह योग्य होगा, उसमें पदोन्नति दी जाएगी।

क्या है मामला

बजरंग लाल शर्मा और अन्य के मामले में हाईकोर्ट ने 5 फरवरी, 2010 को दिए फैसले में एम. नागराज में दिए निर्देशों की पालना पर ही पदोन्नति में आरक्षण देय बताया था। इसके बाद सूरजभान मीणा और अन्य की याचिका पर दिए फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के उक्तफैसले की पुष्टि की।

इसके बाद राज्य सरकार ने एम. नागराज मामले में दिए फैसले के अनुसार आरक्षित वर्ग के कार्मिकों को नौकरियों में पर्याप्त प्रतिनिधित्व, सामाजिक आर्थिक पिछड़ापन और कामकाज पर असर का आकलन करने के लिए भटनागर कमेटी का गठन किया। इसकी रिपोर्ट के आधार पर 11 सितंबर, 2011 को अधिसूचना जारी की थी।

हाईकोर्ट ने भटनागर कमेटी के गठन, उसकी रिपोर्ट और अधिसूचना को लेकर मुख्य सचिव और कार्मिक सचिव को अवमानना का दोषी माना था। सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश को निरस्त करते हुए कमेटी की सिफारिशों को एम. नागराज और सूरजभान मीणा मामले को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे।

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