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पाक विस्थापित हिंदू बच्चों की पढ़ाई नियमों में उलझी

9 वर्ष पहले
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जोधपुर. पाकिस्तान में ज्यादतियों से परेशान होकर भारत में अपना घर बसाने का सपना लेकर जोधपुर आने वाले पाक हिंदू शरणार्थियों को यहां रहने के लिए टुकड़ों-टुकड़ों में अनुमति तो मिल रही है, लेकिन इनके बच्चों की तालीम नियमों में उलझ गई है। भारतीय नागरिकता नहीं होने से इनके बच्चों को सरकारी व निजी स्कूलों में प्रवेश के लिए खासी परेशानियां उठानी पड़ रही हैं। खास तौर से नवीं कक्षा व इससे ऊपर के मामलों में तो हाल ही खराब है। हाल में पाकिस्तान से आए प्रदीप खेमानी अपने तीन बच्चों को स्कूल में प्रवेश दिलाने के लिए खासी मशक्कत कर रहे हैं। शिक्षा विभाग ने बच्चों के प्रवेश के लिए जिला प्रशासन से मार्गदर्शन मांगा, तो जिला प्रशासन ने राज्य के गृह विभाग को फाइल भेज दी। वहां से अभी तक अनुमति नहीं मिली है। ऐसे पीड़ितों में अकेले प्रदीप ही नहीं हैं। जोधपुर में पाक विस्थापित हिंदुओं की बस्तियों में दर्जनों उदाहरण हैं, लेकिन पहली बार ऐसा मौका आया है कि एक पाक विस्थापित हिंदू ने बच्चों को सही कक्षाओं में प्रवेश के लिए नियमों से लड़ाई शुरू की है। पाक विस्थापितों से जुड़े जनप्रतिनिधियों ने यह मसला केंद्रीय गृह मंत्रालय तक पहुंचाया है। आठ जून को राज्य के मुख्य सचिव सीके मैथ्यू की अध्यक्षता में जोधपुर में हुई बैठक के एजेंडे में भी यह मसला शामिल था, लेकिन एक माह बाद भी इस पर निर्णय नहीं हुआ है। बोर्ड से मांगा मार्गदर्शन प्रदीप के सबसे बड़े पुत्र अमित खेमानी जिसने पाकिस्तान के हैदराबाद बोर्ड से दसवीं कक्षा पास कर रखी है, उसे 11वीं में प्रवेश चाहिए। हैदराबाद बोर्ड की पात्रता के लिए जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक) ने राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड को अप्रैल में पत्र लिखा था, लेकिन अभी तक जवाब नहीं आया। अलबत्ता शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बोर्ड की पात्रता सही होने पर भी प्रवेश प्रशासन की अनुमति से ही मिलेगा। पीछे करने पर मिलता है प्रवेश पाकिस्तान से हर वर्ष हिंदू जोधपुर आते हैं और यहीं रह जाते हैं। पहले छह माह, बाद में एक साल व आगे रुकने की अनुमति मिलती जाती है। हिंदू विस्थापित संस्था के अध्यक्ष चमनलाल कुमावत का कहना है कि पाकिस्तान से आए लोगों के बच्चे सातवीं-आठवीं पढ़े हुए होते हैं, लेकिन उन्हें एडमिशन नहीं मिलता। ऐसे में शपथ पत्र के आधार पर मजबूरी मे अभिभावक बच्चों को दो-तीन कक्षा पीछे कर पांचवीं में प्रवेश दिला रहे हैं। निर्देश मांगे हैं भारत की नागरिकता से वंचित पाकिस्तानी हिंदू बच्चों के स्कूलों में एडमिशन के मामले में अभी तक गृह विभाग से कोई निर्देश नहीं मिले हैं। दुबारा विस्तृत जानकारी भेजी है। निर्देश मिलने के बाद ही इस पर निर्णय होगा। सिद्धार्थ महाजन, कलेक्टर, जोधपुर जोधपुर में पाक विस्थापित हिंदुओं की स्थिति : 3000 जोधपुर में जिन्हें नागरिकता का इंतजार है : 10000 को नागरिकता मिल चुकी है पूरे मारवाड़ में : 13000 सीमांत जिलों में कर रहे हैं निवास मामला विधि विभाग में पाकिस्तान के सिंध प्रांत के टंडोजाम से प्रदीप खेमानी अपने परिवार के साथ चार माह पहले जोधपुर आए थे। उन्होंने नियमानुसार आमद करवाते हुए स्थायीवास के लिए आवेदन कर दिया। उनके पुत्र नकाश खेमानी को कक्षा नौ में व नवीत खेमानी को कक्षा सात में प्रवेश चाहिए। इन दोनों का मसला कलेक्टर के मार्फत गृह विभाग को भेजा गया, जहां से विधि विभाग भेज दिया गया।