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तीन हजार निजी स्कूलों पर ताला लगने की नौबत

9 वर्ष पहले
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जोधपुर.राज्य के निजी स्कूलों में खेल मैदान की अनिवार्यता लागू होने से जोधपुर शहर सहित जिले भर में करीब तीन हजार स्कूलों पर ताला लगने की नौबत आ गई है। एक अनुमान के अनुसार शहर व जिले में 100 निजी स्कूलों में भी खेल का मैदान नहीं है। इन 3 हजार स्कूलों में करीब 5 लाख बच्चे पढ़ रहे हैं और 20 हजार शैक्षणिक कर्मचारी कार्यरत हैं।
शहर में 1 हजार 496 निजी स्कूल हैं। पूरे संभाग की बात करें तो ऐसे 15 हजार से अधिक स्कूलों पर ताला लग सकता है। सरकार की ओर से इन स्कूलों को खेल मैदान के साथ आरटीई एक्ट व राजस्थान गैर सरकारी संस्था अधिनियम 1989 व 1993 के नियमों की पालना करने के लिए 31 मार्च तक का समय दिया था।
ऐसा नहीं होने पर मान्यता रद्द करने का आदेश दिया है। दूसरी ओर स्कूल संचालकों का मानना है कि प्रदेश के 65 प्रतिशत बच्चे निजी स्कूलों में ही पढ़ते हैं। संभाग में इन स्कूलों के बंद होने से 90 हजार शैक्षणिक कर्मचारी बेरोजगार हो जाएंगे, जबकि करीब 30 लाख विद्यार्थियों को स्कूल छोड़नी पड़ेगी।
निजी स्कूल संचालक कर रहे ये मांगें
राजस्थान गैर सरकारी शैक्षिक संस्था अधिनियम 1989 व 1993 के नियम हटाए जाएं।
स्कूलों में खेल मैदान के अलावा भूखंड क्षेत्रफल व कक्षा कक्ष के माप की अनिवार्यता का नियम हटाया जाए।
आरटीई एक्ट की आड़ में बनाया जा रहा अनावश्यक दबाव हटाया जाए।
मान्यता के नियमों को शिथिल किया जाए।
हम मुख्यमंत्री से मिलेंगे
'मान्यता प्राप्त स्कूलों में खेल मैदान, आरटीई एक्ट व राजस्थान गैर सरकारी शैक्षिक संस्था अधिनियम 1989 व 1993 के नियम हटाने की मांग लेकर हम मुख्यमंत्री से मुलाकात करेंगे।'
शंभूसिंह मेड़तिया, संभागाध्यक्ष, राजस्थान निजी शिक्षण संस्थान संघ
'फिलहाल यह आदेश प्रारंभिक शिक्षा विभाग की ओर से जारी किया गया है।'
प्रेमचंद सांखला, एडीईओ (माध्यमिक), जोधपुर