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IIT में चाहिए प्रवेश, तो 73 % अंक लाने को रहे हैं तैयार

10 वर्ष पहले
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कोटा.यदि आप इस साल राजस्थान बोर्ड से 12वीं की परीक्षा दे रहे हैं और आईआईटी में दाखिला लेना चाहते हैं तो एडवांस टेस्ट की पात्रता के लिए करीब 73 फीसदी अंक लाने की तैयारी करनी होगी। काउंसिल ऑफ सेंट्रल बोर्ड ऑफ सैकंडरी एजुकेशन (कोब्से) इस साल प्रत्येक बोर्ड के शीर्ष 20 परसेंट स्टूडेंट्स के स्कोर का डाटा जुटा रहा है। अब तक विभिन्न स्टेट बोर्ड में जनरल केटेगरी के स्टूडेंट्स के जो डाटा जारी किए गए हैं, उसमें आंध्रप्रदेश में सर्वाधिक 87.20 और मेघालय में सबसे कम 49.40 प्रतिशत अंक टॉप-20 परसेंटाइल के लिए कटऑफ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह प्रतिशत हर साल परिवर्तित होता रहेगा। कारण कि टॉप 1 फीसदी छात्रों का स्कोर हर साल बदलेगा। राजस्थान बोर्ड के छात्रों के सामने ऊंचा बैरियर कॉमन टेस्ट दो चरणों में होगा। पहला मेन टेस्ट सभी स्टूडेंट्स दे सकेंगे। इसमें से चयनित 1.50 लाख छात्र-छात्राएं आईआईटी के लिए दूसरा एडवांस टेस्ट देंगे। इसमें उन्हीं को मौका मिलेगा जो 12वीं में प्रत्येक बोर्ड के शीर्ष 20 परसेंटाइल छात्रों की सूची में आएंगे। राजस्थान बोर्ड के आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि उपलब्ध डाटा के आधार पर टॉप-20 परसेंटाइल में आने के लिए सामान्य वर्ग के छात्रों को करीब 73 फीसदी अंक लाने होंगे। वहीं सीबीएसई 12वीं के छात्रों को 77.8 फीसदी से ज्यादा अंक लाने होंगे। हालांकि, यह प्रारंभिक डाटा है। कोब्से की गाइडलाइन मिलने के बाद इसमें मामूली संशोधन हो सकता है। वेबसाइट पर कोई डाटा नहीं रेजोनेंस संस्थान के वाइस प्रेसीडेंट मनोज शर्मा ने बताया कि कोब्से के निर्देशों के बावजूद जुलाई के अंत तक किसी भी स्टेट बोर्ड की वेबसाइट पर 12वीं परीक्षा में टॉप-20 परसेंटाइल छात्रों का स्कोर अपलोड नहीं किया जा रहा है। इससे हजारों छात्र संशय में हैं। राजस्थान बोर्ड के छात्र यह नहीं समझ पा रहे हैं कि इस साल टॉप-20 परसेंट में आने के लिए उन्हें न्यूनतम कितने अंक लाने होंगे। सभी स्टेट बोर्ड को तत्काल स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। 'कोब्से की गाइडलाइन मिलने के बाद टॉप-20 परसेंटाइल छात्रों का कटऑफ जारी कर देंगे। सामान्य वर्ग के लिए अनुमानित स्कोर 73 फीसदी रह सकता है।' डॉ.सुभाष गर्ग, चेयरमैन, राजस्थान शिक्षा बोर्ड तीन सालों के विश्लेषण में काफी अंतर दिल्ली विवि में सांख्यिकी विभाग के प्रो. अजीत चतुर्वेदी ने 4 राज्यों के बोर्ड में टॉप-1 प्रतिशत छात्रों के तीन साल के स्कोर का विश्लेषण किया। इसमें सामने आया कि हर साल टॉपर्स के प्रतिशत में काफी अंतर आएगा, इसलिए कोब्से द्वारा टॉप-20 परसेंटाइल के लिए जारी किया जाने वाला इंडिकेटर भी विश्वसनीय नहीं रहेगा। इससे छात्रों पर मानसिक दबाव बढ़ जाएगा।