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NCC भर्ती में बेटियों से हो रहा है भेदभाव

9 वर्ष पहले
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सीकर.शेखावाटी के सबसे बड़े एसके कॉलेज में बेटियों से भेदभाव हो रहा है। मामला एनसीसी में दाखिले से जुड़ा है। पिछले तीन साल से छात्राओं के लिए एनसीसी के आवेदन नहीं लिए जा रहे हैं। छात्राओं का 30 फीसदी कोटा भी लड़कों को शिफ्ट कर दिया है। जबकि इस साल 32 छात्राओं ने एनसीसी कैडेट बनने की इच्छा जताई है। एसके कॉलेज में दो हजार छात्राएं पढ़ रही हैं। एसके कॉलेज में एनसीसी का 30 फीसदी कोटा छात्राओं के लिए आरक्षित है। यह जानकारी कॉलेज विवरणिका में है। इसी विवरणिका के आधार पर छात्राओं के अभिभावकों ने इन्हें कॉलेज में एडमिशन करवाया ताकि एनसीसी में भाग ले सके। 30 जुलाई को एनसीसी में एडमिशन के लिए भर्ती की जानी थी। कॉलेज प्रशासन ने केवल छात्रों के लिए यह प्रक्रिया करवा दी। अभिभावकों का कहना है जब इस मामले में कॉलेज प्रशासन से बात की तो जवाब मिला कि लड़कियों की जिम्मेदारी कौन लेगा? अभिभावक मनसा नगर के रामप्रताप मील का कहना है कि ऐसा जवाब समझ से परे है। क्योंकि मौजूदा परिस्थितियों में बेटियां कहां तक बुलंदियां छू रही हैं यह किसी से छुपी हुई नहीं है। रामप्रताप भी अपनी बेटी को एनसीसी कैडेट बनाने के लिए कॉलेज में दाखिल दिलाया था। पहले क्यों होते थे बेटियों के दाखिले, अब क्यों भेदभाव? > नोटिस बोर्ड पर भी भेदभाव भर्ती के लिए हर साल नोटिस बोर्ड पर भी भेदभाव की तस्वीर साफ नजर आई। हर साल भर्ती में सिर्फ केवल लड़कों के लिए लिखा जाता था। हालांकि इस साल विद्यार्थी शब्द का इस्तेमाल किया गया। > विवरणिका के पेज 12 पर दर्ज क्यों सवाल यह भी है कि जब लड़कियों को भर्ती नहीं किया जाना है तो कॉलेज विवरणिका के पेज 12 पर ऐसा क्यों दर्ज करवाया गया कि 30 फीसदी छात्राओं की भर्ती होगी? इसी को पढ़कर लड़कियों ने कॉलेज में प्रवेश लिया। > मुख्यालय से भी है निर्देश एनसीसी मुख्यालय से भी साफ निर्देश है कि एनसीसी में लड़कियों की भर्ती की जाए। 30 जुलाई को हुई भर्ती में लड़कियां पहुंची थी। यह अलग बात है कि कॉलेज का कहना है कि उस दिन एक ही लड़की आई। दूसरे दिन 32 लड़कियों ने रिपोर्टिग की। एक महीने पहले मांगा था महिला केयर टेकर का नाम : कर्नल एनसीसी के कर्नल यशपाल का कहना है कि कॉलेज से एक महीने पहले ही महिला केयर टेकर का नाम मांगा था। पांच जुलाई को कॉन्फ्रेंस में भी नाम मांगा था लेकिन कॉलेज ने नाम ही नहीं दिया। चूंकी लड़कियों को जयपुर के साथ-साथ दूसरे राज्यों के शिविरों में भाग लेना पड़ता है। इसलिए महिला की नियुक्ति होना जरूरी है। 30 जुलाई को भर्ती के बाद अब कॉलेज लड़कियों की भर्ती की बात कर रहे हैं। क्योंकि लड़कियों का दबाव बढ़ रहा है, जबकि कॉन्फ्रेंस में कॉलेज ने लड़कियों की भर्ती के लिए मना किया था। अब हमने लिखा है पत्र : कॉलेज कॉलेज प्राचार्य सुभाषचंद्र का कहना है कि एक अगस्त को एनसीसी को भर्ती के लिए पत्र लिखा था। कॉलेज में महिला विंग नहीं है। अब हमने शुक्रवार को नोटिस जारी कर महिला केयर टेकर के लिए व्याख्याताओं से नाम मांगे हैं। हम तो भर्ती करवाना चाहते थे। मगर एनसीसी ने अगले साल भर्ती के लिए कहा है।