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सरकारी नौकरी की चाहत ने तोड़ी पुरानी सोच

9 वर्ष पहले
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अजमेर.सरकारी नौकरी की चाहत में साफ-सफाई के कार्य को हेय समझने वाली जातियों के बेरोजगार युवक भी पुराने मिथक तोड़कर सफाईकर्मियों की नौकरी करने को तैयार हो गए है। इसका अंदाजा अजमेर निगम द्वारा सफाईकर्मियों की नौकरी के लिए मांगे गए आवेदनों से लगाया जा सकता है। आवेदन पत्रों में ओबीसी और एसटी वर्ग से जुड़े बेरोजगारों ने भी आवेदन किए हैं। वहीं अनुसूचित जाति में भी वाल्मीकि समाज के अलावा अन्य जातियों के बेरोजगारों ने भी आवेदन किए हैं। इसके अलावा अन्य वर्ग के लोगों में प्रदेश के अन्य शहरों की तुलना में अजमेर के युवकों की संख्या काफी कम है। अन्य प्रदेशों के बेरोजगार युवकों ने भी भर्ती के लिए नगर निगम में आवेदन किया है। छह हजार से अधिक आवेदन अजमेर नगर निगम ने सफाईकर्मियों के 448 पदों के लिए 5 अगस्त तक आवेदन जमा कराने थे। अंतिम तारीख तक छह हजार 663 आवेदन पत्र जमा हुए हैं। निगम ने आवेदन पत्रों की जांच करने के लिए चार कमेटियों का गठन किया है। प्रत्येक कमेटी को 1500 आवेदन पत्रों की जांच करनी है। कागजी कार्रवाई होने की वजह से आवेदन पत्रों की जांच करने में काफी समय लग रहा है। सूत्रों के अनुसार आवेदन पत्रों की जांच का कार्य 15 अक्टूबर तक पूरा होने की संभावना है। आवेदन पत्रों ने मिथक तोड़ा निगम को उम्मीद थी कि सफाईकर्मियों की भर्ती में वाल्मीकि समाज या साफ सफाई के काम से जुड़ी अन्य जातियों के बेरोजगार युवा ही आवेदन करेंगे। लेकिन ओबीसी और एसटी वर्ग से जुड़े बेरोजगारों के आवेदन पत्र देखकर अफसर भी अचंभित हैं। इसके अलावा एससी में भी वाल्मीकि समाज के अलावा आने वाली अन्य जातियों के बेरोजगार युवकों ने भी आवेदन किया है। आवेदन पत्रों में ज्यादा पढ़े लिखे युवक नहीं है। अधिकांश युवक आठवीं पास हैं या उससे कम हैं। कुछ ने दसवीं कक्षा तक पास की है। राजस्थान से बाहर यूपी, हरियाणा और एमपी के युवकों ने भी आवेदन किया है। हालांकि शर्तो में मूल निवास प्रमाण-पत्र की अनिवार्यता के कारण अन्य प्रदेशों से आए युवकों के आवेदन जांच में निरस्त होना तय है। लेकिन फिलहाल तो आवेदन-पत्रों ने अफसरों की मुसीबत बढ़ा दी है। अन्य वर्गो से 10 फीस सूत्रों के अनुसार निगम में जमा हुए छह आवेदनों में से करीब 600 आवेदन अन्य वर्गो से हैं, इसमें प्रदेश के बाहर के आवेदनों की संख्या भी शामिल है। इस भर्ती में कोई लिखित परीक्षा भी नहीं होनी है। ऐसे में युवक पुरानी मान्यता को ताक में रखकर सिर्फ सरकारी नौकरी की आस में आवेदन कर रहे हैं। मालूम हो कि निगम द्वारा करीब एक साल पहले 154 सफाईकर्मियों की भर्ती के लिए आए करीब 2800 आवेदन पत्रों में भी अन्य जातियों के युवकों ने आवेदन किए थे, लेकिन तकनीकी अड़चनों की वजह से भर्ती निरस्त कर दी गई थी। वाल्मीकि समाज के हक पर असर सरकार ने भर्ती में सामान्य वर्ग के पदों पर वाल्मीकि समाज के लोगों को प्राथमिकता देने की बात कही है, लेकिन अन्य वर्ग के अभ्यार्थियों पर चुप्पी साध रखी है। नियमानुसार एससी का 16, एसटी का 12, ओबीसी वर्ग का 21 प्रतिशत कोटा तय है। शेष कोटा सामान्य वर्ग का है। 448 पदों के आधार पर एसटी और ओबीसी वर्ग के करीब 125 पद होते हैं। इसके अलावा एससी कोटे में भी अन्य जातियों के आने की वजह से वाल्मीकि समाज के लोगों को कितनी नौकरियां मिल पाएंगी, इसको लेकर कोई भविष्यवाणी नहीं की जा सकती है। इससे वाल्मीकि समाज के लोगों को नुकसान होगा। सामान्य वर्ग के प्रत्याशियों के आवेदन नहीं आने पर इनकी जगह किस वर्ग की नियुक्ति की जाएगी, इसको लेकर स्पष्ट निर्देश नहीं है। सूत्रों के अनुसार आवेदन पत्रों की जांच होने के बाद निगम सरकार से मार्गदर्शन ले सकती है। पहले कम बाद में अच्छा वेतन सभी जातियों के बेरोजगार युवकों का आवेदन करने के पीछे अच्छा वेतन मिलना भी है। नए नियमों के अनुसार सफाईकर्मी की भर्ती होने वाले युवकों को पहले दो साल तक फिक्स वेतन 4850 रुपए प्रति माह मिलेगा। इसके बाद उनकी बेसिक वेतन छह हजार पचास रुपए हो जाएगा। डीए, महंगाई सहित अन्य भत्ते मिलाने के बाद उनका वेतन 15 हजार तक पहुंच जाएगा। नौकरी की अवधि ज्यादा होने के साथ ही वेतन में इजाफा होता जाएगा। किसके कितने आवेदन ओबीसी वर्ग नाम जाति पढ़ाई जिला नरेश कुमार गुर्जर 10 वीं दौसा सीताराम गुर्जर 8 वीं दौसा सतवीर सिंह जाट 10 वीं झुंझुनूं आसिफ हुसैन मुस्लिम 8 वीं अजमेर पूरणमल जाट 10 वीं नीम का थाना अनुसूचित जनजाति वर्ग रामअवतार मीणा 10 वीं अलवर राजकुमार मीणा 10 वी अलवर कमलेश मीणा 10 वीं दौसा अजा-वाल्मीकि समाज को छोड़कर आए आवेदन नेकराम जाटव 10 वीं अलवर संजीव कुमार बलाई 8 वीं नीम का थाना संदीप कुमार मेघवाल 10 वीं झुंझुनूं मदनलाल रैगर 10 वीं अलवर 'यह बात सही है कि सफाईकर्मियों की भर्ती में ओबीसी सहित अन्य जातियों ने भी आवेदन किया। भर्ती में वाल्मीकि समाज को प्राथमिकता दें, इस आशय के सरकारी आदेश भी हैं, लेकिन ये आदेश पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं। अब राज्य सरकार से इस बारे में मार्गदर्शन लिया जाएगा।' विनीता श्रीवास्तव, सीईओ, नगर निगम