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डीयू : चार वर्षीय ग्रेजुएशन पर उठ रहे सवाल

8 वर्ष पहले
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नई दिल्ली. डीयू में चार वर्षीय स्नातक कोर्स के पाठयक्रम की तैयारी को लेकर तरह-तरह के सवाल उठने लगे हैं। प्राचार्यो और शिक्षकों कहना है कि डीयू में चार वर्षीय स्नातक कोर्स का सिलेबस जल्दबाजी में तैयार किया जा रहा है।
सिलेबस अगर चार साल का नहीं बन सकेगा तो विश्वविद्यालय प्रशासन प्रथम वर्ष के सिलेबस को तैयार कराकर आगे के समय में बाकी के तीन वर्षो का सिलेबस तैयार करा लेगा, जो छात्र हितों में बिल्कुल भी सही नहीं है। क्योंकि छात्र को दाखिले के समय यह स्पष्ट होना चाहिए कि वह चारों वर्षो में क्या-क्या पढ़ेगा।
इसके अलावा जब देश भर के विश्वविद्यालयों में तीन साल में ऑनर्स की डिग्री मिल रही है तो डीयू चार साल में ऑनर्स की डिग्री क्यों दे? हालांकि इन सवालों के जवाब पर डीयू के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि शिक्षक नेता नए रिफॉर्म पर भटकाव पैदा करने में लगे हैं। ऐसा ही सेमेस्टर लागू करने में भी हुआ था।
साउथ कैंपस कॉलेज के एक प्राचार्य ने तो बाकायदा यह कहा कि पांच मार्च को जब डीयू के डीन ऑफ कॉलेजेज की ओर से सभी विभागाध्यक्षों को यह निर्देश जारी किया गया कि 20 मार्च तक चार वर्षीय स्नातक कोर्स का सिलेबस तैयार करें और उसके बाद भी वह तैयार नहीं हुआ तो अब हड़बड़ी में बन रहे सिलेबस में छात्र क्या पढ़ेंगे?
छात्रों के साथ छलावा
डूटा (दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ) में ईसी सदस्य आभा देव हबीब कहती हैं कि चार वर्षीय स्नातक कोर्स छात्रों के साथ पूरी तरह से छलावा है। दिल्ली में ही आंबेडकर विश्वविद्यालय के अंदर चार वर्षीय स्नातक कोर्स हैं। लेकिन वहां तीन साल में ऑनर्स की डिग्री दी जाती है और अगर कोई छात्र चौथे वर्ष किसी अतिरिक्त विषय जैसे की इकॉनॉमिक्स की पढ़ाई करता है तो उसे चौथे वर्ष की पढ़ाई के एवज में ऑनर्स की डिग्री मिलती है। जबकि डीयू में चार वर्षीय स्नातक पूरा करने वाले छात्र को केवल एक ही ऑनर्स डिग्री मिलेगी। यहां फाउंडेशन कोर्स के नाम पर छात्र का एक साल खराब किया जा रहा है।
मई-जून में मिल सकती है मंजूरी
डीयू के एक विभागाध्यक्ष ने बताया कि अब सिलेबस अप्रैल माह के अंत में सौंपना है। जिसे ध्यान में रखकर विभिन्न कॉलेजों में विषय विभागाध्यक्षों से चर्चा करके सिलेबस की रूपरेखा तैयार की जा रही है। सेमेस्टर लागू करने के लिए भी जुलाई माह में विश्वविद्यालय ने एप्रूवल के लिए एकेडमिक काउंसिल (एसी) की बैठक बुलाई थी, तो इस बार अगर अप्रैल में सिलेबस तैयार हो जाता है तो मई-जून में एसी की बैठक बुलाकर उसे हरी झंडी दे दी जाएगी। दाखिले के समय छात्रों को सिलेबस की कॉपी तो दी नहीं जाती और वैसे भी नया सत्र जुलाई में शुरू होता है, इसलिए चिंता की बात नहीं है।

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