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शिक्षक भर्ती परीक्षा में टेट पास ही बैठ सकेंगे

10 वर्ष पहले
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शिक्षा मंत्री ब्रज किशोर शर्मा ने विधानसभा में किया स्पष्ट, टेट की अगली परीक्षा जुलाई में


जयपुर। प्रदेश में होने वाली शिक्षक भर्ती में वे ही अभ्यर्थी शामिल हो सकेंगे, जिन्होंने टेट की परीक्षा पास कर ली हो। सिर्फ बीएड या एसटीसी पास करने वाले अभ्यर्थियों में से किसी ने आवेदन कर दिया है तो वे परीक्षा में नहीं बैठ सकेंगे। शिक्षा मंत्री ब्रज किशोर शर्मा ने राज्य विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान यह खुलासा किया। वे भाजपा के हेम सिंह भडाना के मूल सवाल पर हुई चर्चा में सदस्यों के प्रश्नों का जवाब दे रहे थे।


प्रतिपक्ष के सदस्यों ने शिक्षक भर्ती को लेकर सवालों की बौछार कर दी। भाजपा के घनश्याम तिवाड़ी ने कहा कि सरकार की ऐसी क्या मजबूरी थी कि टेट को मंजूर किया गया। उन्होंने कहा कि क्या टेट से बचे बच्चों के लिए राज्य सरकार राज्य स्तर का कोई कैडर बनाकर भर्ती करने का विचार रखती है। उन्होंने टेट पास करने की न्यूनतम अंक अलग अलग क्यों रखे गए हैं। भाजपा के गुलाबचंद कटारिया ने जानना चाहा कि जिस समय टेट की परीक्षा करवाई गई थी, उस समय 60 प्रतिशत की अनिवार्यता क्यों नहीं बताई गई माकपा ने अमरा राम और जसवंत सिंह ने भी अगली टेट की परीक्षा करवाने और बिना टेट परीक्षा में बैठने देने के बारे में जानना चाहा था। उन्होंने योग्यता से खिलवाड़ करने का आरोप भी लगाया।


शिक्षा मंत्री ब्रज किशोर शर्मा ने स्पष्ट किया कि एनसीटीई 23 अक्टूबर, 2010 को जारी अधिसूचना में शिक्षक भर्ती के लिए टेट जरूरी किया गया है। ऐसे में सिर्फ बीएड- एसटीसी वालों के आवेदन मान्य नहीं होंगे। अगर किसी ने आवेदन किया है तो वह निरस्त होगा। शर्मा ने कहा कि टेट में भी 60 प्रतिशत अंक लाने की अनिवार्यता होगी।
उन्होंने कहा कि एससी, एसटी, ओबीसी, एसबीसी और सामान्य वर्ग की महिलाओं को इसमें 10 प्रतिशत की छूट दी जाएगी। वहीं एससी, एसटी, ओबीसी, एसबीसी की महिलाओं, विधवा- परित्यक्ताओं को 15 प्रतिशत और निशक्तजनों को 20 प्रतिशत की छूट दी जाएगी।


शर्मा ने कहा कि एनसीटीई ने जो कार्यक्रम बनाया है, उसके मुताबिक टेट की परीक्षा साल में एक बार कराई जा सकेगी। इसके चलते अब जुलाई में टेट की परीक्षा करवाई जाएगी। उन्होंने कहा कि मंत्रिमंडलीय सचिवालय की अधिसूचना दिनांक 10 जून, 2011 के अनुसार कार्यविधि में संशोधन किया जाकर प्राथमिक और उच्च प्राथमिक शिक्षकों का चयन का काम ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग को दिया जा चुका है।


61,374 पद रिक्त :


शिक्षा मंत्री ने सवाल पर बताया कि राज्य में तृतीय श्रेणी शिक्षकों के 61,374 पद रिक्त है। इसमें से 41,000 पदों को अभी भरे जा रहे हैं। वहीं, 20,000 शिक्षकों की और भर्ती करने की घोषणा मुख्यमंत्री के बजट भाषण में की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि विशेष शिक्षकों के लिए भी टेट पास होना जरूरी है।


सामान्य वर्ग वालों का क्या होगा :


सवालों की झड़ी के बीच भाजपा विधायक दल के उपनेता घनश्याम तिवाड़ी ने कहा कि 60 प्रतिशत अंकों की अनिवार्यता में से आरक्षित वर्ग को तो छूट दे दी लेकिन ब्राह्मण, वैश्य, राजपूत और सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों का क्या होगा। उन्होंने कहा कि टेट की परीक्षा के समय न्यूनतम अंक का प्रावधान शामिल नहीं किया गया था।