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हमारे पास सलमान और शाह रूख नहीं: नाहटा

9 वर्ष पहले
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जोधपुर। अस्सी के दशक में प्रदेश में सभी फिल्मों के रिकॉर्ड तोडऩे वाली ब्लॉक बस्टर राजस्थानी फिल्म बाई चाली सासरिए के निर्माता भरत नाहटा व उनके मशहूर फिल्म समीक्षक भतीजे कोमल नाहटा ने सोमवार को जोधपुर में पत्रकारों से रूबरू होते हुए राजस्थानी फिल्मों की बदहाली के लिए सरकार की बे रूखी जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि उनके पास सलमान और शाहरूख खान नहीं है, लेकिन यदि सरकार सहयोग करें तो वे भी साउथ के क्षेत्रीय सिनेमा की तरह पैदा कर सकते हैं सुपर स्टार।

नाहटा ने राजस्थानी फिल्मों की बदहाली बयां करते हुए कहा कि हिंदी फिल्मों की तरह राजस्थानी फिल्में भी एक ही पिता के उन दो पुत्रों के समान है जो एक तो स्वास्थ्य है और दूसरा असाध्य बीमारी से ग्रस्त है और मरणासन्न स्थिति में है ओर उसका सरकार रूपी पिता दूसरे पुत्र की बीमारी का ईलाज करने को तैयार ही नहीं है।


सरकारी सहायता हाथी के मुंह में जीरे के समान: नाहटा ने कहा कि सरकार राजस्थानी फिल्म निर्माण के बारे में समझना ही नहीं चाहती, उन्होंने बिना निर्माताओं से सलाह मशविरा लिए सबसिडी के नाम पर 5 लाख रूपए की सहायता का एलान कर दिया। यह सहायता ऊंट नहीं हाथी के मुंह में जीरे के समान है। महारष्ट्र में वहां की फिल्मों को 30-35 लाख से 50 लाख तक की सबसिडी मेरिट के अनुसार मिलती है, जबकि पंजाबी फिल्मों के लिए सरकार ने इतना कुछ कर रखा है कि वहां इतनी पंजाबी फिल्में बन रही है कि उनको थिएटर नहीं मिल रहे।

सिनेमा हॉल नहीं देते राजस्थानी फिल्मों को : नाहटा ने कहा कि सरकार ने सिनेमा मालिकों के लिए मनोरंजन कर बिल्कुल माफ कर दिया, यह अच्छी बात है, लेकिन इससे राजस्थानी फिल्मों के प्रदर्शन के लिए सिनेमाघरों में तारीखें मिलनी बंद हो गई। ए सर्टिफिकेट वाली फिल्म टैक्स फ्री चल रही है, कोई बात नहीं, लेकिन सरकार सिनेमा मालिकों को इस सुविधा के बादले राजस्थानी फिल्मों के प्रदर्शन के लिए तारीख देने की बाध्यता रखे तभी हमारी फिल्मों का प्रदर्शन संभव हो सकेगा।

राजस्थान की संस्कृति का प्रचार करती है : नाहटा ने कहा कि जोधपुर में सात समंदर पार से धन कुबेर शादियां रचाने आते हैं, इस बात को हम जरा फिल्म के माध्यम से समझाएं तो पर्यटन को पंख लग जाएंगे। राजस्थानी फिल्मों ने आज तक राजस्थानी संस्कृति व धरोहर का प्रचार किया है। लेकिन हिंदी सिनेमा के 100 वर्ष पूरे होने के साथ साथ पिछले दो दशक से राजस्थानी फिल्मों का निर्माण लुप्त प्राय: हो गया है, जब कि अन्य क्षेत्रीय फिल्मों में फिल्म निर्माण की बाढ़ आई हुई है। इसके लिए सरकार हम निर्माताओं व फिल्म विशेषज्ञों की समिति बनाए व सबसिडी सहित अन्य सुविधाओं शूटिंग, स्टूडियो निर्माण आदि के लिए प्रोत्साहन देने वाली नीतियों की घोषणा करें। अन्यथा राजस्थानी फिल्म उद्योग स्वर्गीय फिल्म उद्योग कहलाने लगेगा।

Photo: Bhagwan panwar