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लोकपाल पर आम राय के लिए सर्वदलीय बैठक

9 वर्ष पहले
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सरकार के विरोधियों के साथ प्रधानमंत्री घटक दलों को भी मनाने की कोशिश कर रहे हैं.

लोकपाल बिल को राज्य सभा की मंजूरी दिलाने के लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह एक सर्वदलीय बैठक कर रहे हैं.

यह बिल लोकसभा में पास हो चुका है लेकिन पिछले साल 29 दिसंबर को लंबी-चौड़ी बहस के बावजूद राज्यसभा में इस पर मतदान नहीं हो पाया. विपक्ष और सरकार दोनों एक दूसरे को लोकपाल कानून ना बन पाने के लिए जिम्मेवार ठहराते हैं.

राज्य सभा के सत्र की अवधि समाप्त होने के कारण राज्य सभा में इसे पारित करने की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी थी.

प्रधानमंत्री को उम्मीद है कि 25 मार्च रविवार को अन्ना के प्रस्तावित धरना के पहले सर्वदलीय बैठक में लोकपाल के मुद्दे पर कोई सकारात्मक सहमति बन जाएगी.

उधर दूसरी तरफ लोकपाल बिल पर अपनी पसंद का कानून लाए जाने के लिए आंदोलन कर रहे अन्ना हजारे और उनके साथियों ने इस सर्वदलीय बैठक को मह ढोंग बताया है.

प्रधानमंत्री कार्यालय ने बैठक के पहले ट्विटर पर कहा, "हमें उम्मीद है कि बैठक में मौजूद तमाम नेताओं से हमें मार्गदर्शन मिलेगा ताकि हम अपने काम को पूरा कर सकें. सरकार एक कारगर लोकपाल कानून लाने के लिए कटिबद्ध है."

विपक्ष का विरोध

पिछली बार राज्य सभा में इस कानून पर बहस के दौरान विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने कहा था, “ये कानून बेहद कमजोर है. हमें राष्ट्र की भावनाओं के बारे में भी सोचना चाहिए. आप ऐसा कानून कैसे बना सकते हैं, जिसमें लोकपाल की नियुक्ति और बर्खास्तगी का अधिकार सरकार के ही हाथों में हो. इस क़ानून में जांच की प्रक्रिया इतनी टेढ़ी-मेढ़ी है कि कभी-कभी लगता है कि ये क़ानून है या जलेबी. सीबीआई को निष्पक्ष बनाए जाने की जरूरत है, न कि मौजूद कानूनों को लांघ कर एक नया कानून बनाने की.”

भाजपा लोकपाल में अल्पसंख्यकों को आरक्षण दिए जाने के भी खिलाफ थी.

बीजू जनता दल का मानना था कि इस कानून के दायरे में प्रधानमंत्री को भी लाया जाना चाहिए. तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जे जयललिता का दल लोकपाल का तो समर्थन करता है लेकिन वो राज्यों में लोकायुक्त का विरोध करता है.

सरकार के अपने घटक दल भी कानून को इसके वर्तमान स्वरुप में पास कराने के लिए तैयार नहीं हैं. तृणमूल कांग्रेस का कहना है कि इस प्रस्तावित कानून में से इस बात की बाध्यता हटाई जानी चाहिए कि राज्यों में भी लोकपाल की ही तर्ज पर लोकायुक्त बनाए जाएँ.

इस बैठक में सरकार के तरफ से प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के आलावा उनके प्रमुख मंत्री प्रणब मुख़र्जी और गृह मंत्री पी चिदंबरम शामिल हैं.

इनके अलावा इस बैठक में भाजपा नेता अरुण जेटली, सीपीएम के नेता सीताराम येचुरी, बहुजन समाज पार्टी नेता सतीश मिश्रा, राष्ट्रीय जनता दल के रामकृपाल यादव के अलावा अन्य नेता भी शामिल हैं.

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