रिपोर्ट / पर्यावरण पर नए कानून लागू होने से ई-वाहनों की ओर शिफ्ट हो रहा ऑटो सेक्टर, कंपनियों की वैल्यू 108% तक बढ़ने की संभावना

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  • ज्यादा कार्बन उत्सर्जन करने वाली कंपनियों की वैल्यू में 33% तक गिरावट का अनुमान
  • रिन्यूएबल एनर्जी की ओर शिफ्ट होने में मददगार खनिजों के खनन में लगी कंपनियों की वैल्यू में 54% का इजाफा होने का अनुमान है

Dainik Bhaskar

Dec 10, 2019, 10:50 AM IST
ऑटो डेस्क. अगर पर्यावरण परिवर्तन को थामने के लिए बनाई जा रही पॉलिसी दुनियाभर में लागू हो गई तो ज्यादा कार्बन उत्सर्जन करने वाली कंपनियों को बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है। उनकी वैल्यू 43 प्रतिशत तक कम हो सकती है। वहीं, कार्बन उत्सर्जन घटाने के प्रयास करने वाली कंपनियों की वैल्यू 33 प्रतिशत तक बढ़ सकती है। यह जानकारी संयुक्त राष्ट्र समर्थित प्रिंसिपल्स फॉर रिस्पांसिबल इन्वेस्टमेंट की रिपोर्ट से सामने आई है।

नॉन ग्रीन मिनरल्स के खनन में लगी कंपनियों की वैल्यू 50% तक घट सकती है

  1. रिपोर्ट के मुताबिक जो कार कंपनियां तेजी से इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर शिफ्ट हो रही हैं उनकी वैल्यू 108 प्रतिशत तक बढ़ सकती है। वहीं, इस दिशा में टालमटोल कर रही या धीमी गति से आगे बढ़ने वाली कंपनियों की वैल्यू तेजी से कम होगी। ऐसे नियम लागू होने के बाद ज्यादातर देशों की सरकारें पेट्रोल और डीजल से चलने वाली गाड़ियों को फेज आउट करने पर ध्यान देंगी, ताकि लक्ष्य हासिल किया जा सके।

  2. नए नियमों से जिन कंपनियों को सबसे ज्यादा नुकसान होगा उनमें कोयले से जुड़ी कंपनियां सबसे आगे हैं। इनकी वैल्यू में 44% की बड़ी कमी आएगी। वहीं, ऑयल एंड गैस क्षेत्र की कंपनियों की वैल्युएशन में औसतन 31% की कमी आएगी। रिन्यूएबल एनर्जी की दिशा में मजबूत रणनीति से काम कर रही इलेक्ट्रिक यूटिलिटीज कंपनियों की वैल्यू 104% बढ़ सकती है। जो कंपनियां इसमें कमजोर साबित हो रही हैं उनकी वैल्यू दो तिहाई तक कम हो सकती है। रिन्यूएबल एनर्जी की ओर शिफ्ट होने में मददगार खनिजों के खनन में लगी कंपनियों की वैल्यू में 54% का इजाफा होने का अनुमान है। नॉन ग्रीन मिनरल्स के खनन में लगी कंपनियों की वैल्यू 50% तक घट सकती है।

  3. इस बदलाव से कृषि से जुड़ी कंपनियां भी अछूती नहीं रहेंगी। सस्टेनेबल बायोफ्यूल और बिना गोमांस वाले प्रोटीन सोर्स के उत्पादन से जुड़ी कंपनियों की वैल्यू में 10 प्रतिशत का इजाफा होगा। वहीं, गोमांस और नॉन सस्टेनेबल एनर्जी से जुड़ी कृषि कंपनियों की वैल्यूएशन 15 फीसदी से 43 प्रतिशत तक कम हो सकती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सभी अनुमान अलग-अलग इंडस्ट्री के एक्सपर्ट से बात कर तय किए गए हैं।

  4. इंश्योरेंस मिलने में भी कठिनाई होगी

    कुछ दिन पहले बैंक ऑफ इंग्लैंड के गवर्नर मार्क कार्नी ने भी इसी तरह की चेतावनी थी थी। उन्होंने कहा था कि पर्यावरण परिवर्तन को गंभीरता से न लेने वाली कंपनियों को आने वाले समय में बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है। कई इंश्योरेंस कंपनियां अब कोयला आधारित पावर स्टेशन को कवर देने से इनकार कर रही है। पॉलिसी में बदलाव की आशंका के कारण वे ऐसा कदम उठा रही हैं। इंश्योरेंस सेक्टर की बड़ी कंपनी एक्सा ने भी घोषणा की है कि वह अब किसी कोयला आधारित प्रोजेक्ट को इंश्योरेंस नहीं देगी।

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