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टूर ऑफ नॉर्थ ईस्ट / हिमालय की वादियां और 32 एनफील्ड हिमालयन राइडर, 12 दिन में तय किया 1,970 km का सफर



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Dainik Bhaskar

Dec 14, 2018, 04:23 PM IST

ऑटो डेस्क. यादों की बात बताता हूं जो मेरे अंतर्मन में बसी हुई है कि हमने क्या किया जब रॉयल एनफील्ड ने हमें नॉर्थ ईस्ट के टूर के लिए आमंत्रित किया। साफ कहूं तो हिमालय की वादियां मेरे लिए नई नहीं थी लेकिन नॉर्थ ईस्ट में घूमने का मौका मुझे पहली बार मिला। मैं हमेशा से ही स्कूटर में सफर करते आया हूं लेकिन इस टूर पर मुझे चलानी थी रॉयल एनफील्ड हिमालयन। मैं थोड़ा आश्वस्त था शहर में उड़ते डीजल की धुंए के बादलों से हिमालय की वादियों में जाने के लिए।

 

evo india tour of north east

 

हम भारत के तीन राज्यों से गुजरने वाले थे जहां की सड़कें मोटरसाइकिल के बेस्ट थी वहीं एक और बात जो मेरे मन में थी वो है रॉयल एनफील्ड का डेडिकेशन जो उन्हेंने 32 राइडर्स को इस टूर के लिए इनवाइट किया जो तारीफ के काबिल था हम निकल पड़े अपने अगर पड़ाव की और रॉयल एनफील्ड मोटरसाइकिल से बिना रास्तों की चिंता किए...

 

evo india tour of north east


पहला दिन

 

हमें अपना सफर शुरू करने को थे लेकिन पहले हमें फर्स्ट-एड की ट्रेनिंग दी गई क्योंकि हम लगातार राइड करना था वो भी तय समय के अंदर। मेरे हाथ में हिमालयन स्लीट की चाबी दी गई जो मुझे अगले 12 दिनों तक चलाना है। इस बाइक ने मुझे पहले दिन से ही इंप्रेस किया खास कर इसके एग्जॉस्ट ने। यह 24BHP का ताकत करने वाले बाइक थी जो किसी भी तरह के रास्तों पर आराम से चलने में सक्षम थी। इसके बाद हमने गुवाहाटी से शिलांग का 200 किलोमीटर का रास्ता पूरा किया जिसका रास्ता पड़ाडों के बीच से  गुजरता है।

 

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गुवाहाटी, शिलांग और काजीरंगा


शिलांग की यात्रा काफी सुखद थी जब हम गुवाहाटी से शिलांग के लिए निकले थे तो में सरप्राइज था कि यह 190 किलो वजनी एडवेंचर मोटरसाइकिल पड़ाडों में बेहतरीन पावर प्रोवाइड कर रही थी। हम जोराभट पहुंच चुके थे जो मेघालय में है। उसके  बाद हम शिलांग से चेरापूंजी की और निकल पड़े। वहीं हमारे सुप्रीम लीडर ने यह अनाउंस किया की अब हम अपने दूसरें पड़ाव से महज 260 किलोमीटर दूर है। इस सफर के दौरान हमें एक सींग वाले राइनो देखने को मिले जो बड़ी तादात में काजीरंगा नेशनल पार्क में पाए जाते हैं। 260 किलोमीटर का सफर रिलेक्सिंग था जहां जंगल से गुजरते हुए हम एनिमल कॉरिडोर के कई साइन बोर्ड दिखें। रॉयल एनफील्ड ने हमारे लिए जंगल सफारी शेड्यूल की थी जैसा की हमें अनुमान था। हम अपनी 1500 घंटे की यात्रा पूरी कर चुके थे।

 

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माजोली, जीरो, दिरांग और तवांग

 

अगले दिन, हम अपने दूसरे पड़ाव के लिए निकल पड़े। काजीरंगा रोड क्रॉस करते हुए हम नेमाती घाट तक पहुंच चुके थे। यब पुरे 32 राइडर्स ने दुनिया का सबसे लंबा रिवर आईलैंड पार किया जो मजोली में है। यह बहुद ही अद्भूत समय था मजोली एक अदूभूत आईलैंड है जहां शांतिपुर्ण माहौल रहता है। अब हम दुनिया का सबसे बड़े रिवर आईलैंड को क्रॉस करके हिमालय वैली में जा रहे थे जो जीरो, अरुणाचल प्रदेश में है। यह का दृश्य बहुत ही अद्भूत था। यहां टेंपरेचर 13 डिग्री था। लेकिन जीरो की यात्रा सुखद थी क्योंकि यहां का मौसम अच्छा था।

 

अगले कुछ दिनों हमने दिरांग और तवांग की यात्रा की जहां हमें ऐसी सड़कें मिली जिसके लिए हिमालयन बनी है। जीरो से तवांग में हमें एक रात के लिए विश्वनाथ चिराली में रुकना था जिसके बाद दिन में हमें बोमडिला के पहाड़ी रास्तों पर चलना था।


तवांग के लिए जाते वक्त हम सिला पास पहुंचे जो 13 हजार फुट की ऊंचाई पर है। जहां मैने अपने ऊपर बादलों को चलते देखा वहीं मेरे सर पर बर्फ के छोटे टुकड़े भी गिरने लगे इस रास्ते पर हमे लौटते समय दोबारा आना था।

 

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बैक टू रियालिटी, जो यह थी..

 

यह वो समय था जब हम सभी राइडर्स ने एक दूसरे को जाना, हम अपने मंजिल तक पहुंचने ही वाले थे। पहाड़ खत्म हो चुके थे और बड़ी बड़ी बिल्डिंग दिखने लगी थी जहां धुआ उड़ रहा था। बहुत ही उदास मन से गुवाहाटी लौट रहे थे। हमने 12 दिन के इस सफर में लगभग 1,970 किलोमीटर का सफर तय किया जिसमें हमने तीन राज्यों का सफर तय किया और कई सारी यादें को आपने साथ लेकर आए।

 

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