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भास्कर इन्वेस्टिगेशन:33 जिलों की 165 सीटों के 72,733 बूथों का ‘कोरोना कचरा’ कागज पर हुआ गायब

पटना10 महीने पहलेलेखक: मनीष मिश्रा
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  • 24 घंटे में कचरा इंसीनेटर तक पहुंचाने का दावा किया जा रहा, जबकि बूथ और अस्पतालों में ही पड़ा है
  • कोरोना के एसिम्प्टोमैटिक मरीजों के खतरे को देखते हुए ग्लव्स-मास्क जहां बांटे, वहां कचरा निपटाने में खेल

जिस तरह बिहार चुनाव में नेता कोरोना पॉजिटिव निकलने के बाद दो दिनों के भीतर निगेटिव रिपोर्ट लेकर लाते हैं, ठीक उसी तरह का चमत्कार मतदान के दौरान निकले कोरोना कचरा को समेटने में हुआ। यकीन मानिए, पहले फेज में 16 जिलों की 71 विधानसभा सीटों के 31,371 बूथों पर वोटरों के उपयोग के बाद बिना डस्टबिन के फेंके गए ग्लव्स-मास्क ही नहीं, मतदान कर्मियों को कोरोना संक्रमितों-संदिग्धों की वोटिंग कराने के लिए दिए गए ग्लव्स, मास्क, फेस शील्ड, पीपीई किट आदि भी महज 24 घंटे में समेट लिए गए। महज 24 घंटे में। यह काम स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी एक एजेंसी ने किया।

कचरे को लेकर अस्पताल परेशान
दूसरे फेज में भी 17 जिलों की 94 विधानसभा के 41,362 बूथों का कचरा भी चमत्कार की तरह नष्ट हो गया। दावा तो कुछ ऐसा ही किया गया, लेकिन भास्कर ने जब पड़ताल की तो पता चला कि अभी पहले फेज के मतदान का ही कचरा अस्पतालों से नहीं उठाया गया है। एजेंसी ने जहां से कचरा उठा लिया है, वहां आज भी कचरे को लेकर अस्पताल परेशान है। प्रदेश के 38 जिलों में संगम मेडिसर, मेडिकेयर, सेनर्जी जैसी एजेंसियां कोरोना कचरा निस्तारण का काम देख रही हैं।

कागजों में समेट लिया गया चुनाव का कोरोना कचरा
भोजपुर के बड़हरा पीएचसी के प्रभारी डॉ. अरविंद 29 अक्टूबर से 150 पैकेट चुनाव के कोरोना कचरा के निस्तारण कराने को लेकर लड़ाई लड़ रहे हैं। यह कचरा पहले फेज के चुनाव के बाद बूथों से पीएचसी पर लाकर रखा गया है। कोरोना का यह संदिग्ध खतरा खतरनाक है, डॉक्टर कई बार इसके लिए फोन कर चुके हैं। लेकिन अब तक कचरा नहीं उठा है। एजेंसी ने भोजपुर से कचरा उठा लेने का दावा किया है, जबकि डॉक्टर हर दिन लड़ाई लड़ रहे हैं। यह उस दावे की हकीकत है, जिसमें कहा गया कि 24 घंटे में ही बूथों से कोरोना कचरा उठाकर इंसीनेटर में जला दिया गया। भोजपुर का बड़हरा तो महज बानगी भर है, पड़ताल में एक दर्जन से अधिक ऐसी पीएचसी से बात हुई, जहां से कचरा उठाया ही नहीं गया है। बूथ पर बिखरा कोरोना कचरा कागजों में ही समेटा गया और जला भी दिया गया है।

चुनाव के दूसरे दिन पड़ताल में सच आया सामने
भास्कर ने दूसरे फेज के चुनाव के दूसरे दिन बुधवार को जब पड़ताल की तो बूथों पर कोरोना कचरा बिखरा पड़ा था। बख्तियारपुर के कटौना प्राथमिक विद्यालय और जगमालबीघा में बनाए गए बूथ पर कचरे का ढेर पड़ा था। कोरोना का कचरा इकट्ठा करने के लिए रखा गया, कार्टून भी वहीं था। स्कूल के पूरे प्रांगण में कचरा फैला था। यहां मतदान के बाद कोई कचरा उठाने नहीं आया। नालंदा के पोखरपुर में बनाए गए मॉडल बूथ पर भी चुनाव के दूसरे दिन कचरा पड़ा था। बख्तियारपुर में पटना रोड पर बनाए गए बूथ संख्या 182 पर भी बुधवार को कचरा पड़ा रहा। यह महज बानगी भर है, ऐसे ही खेल अधिकतर बूथों पर हुआ है। दावा किया गया कि 24 घंटे में कचरा उठा और इंसीनेटर में जला दिया गया। दोनों चरण के चुनाव की बात करें तो अब तक 33 जिलों की 165 विधानसभा में 72,733 बूथों पर मतदान हुआ है। दोनों चरण के कोरोना का कचरा अधिकतर बूथों पर फैला है।

कोरोना कचरा को लेकर बनाई गई थी व्यवस्था
कोरोना काल के दौरान चुनाव में सबसे बड़ी चुनौती कोरोना कचरा को लेकर थी। मतदान कर्मियों को ग्लव्स, मास्क, फेस शील्ड, पीपीई किट दिया गया, जबकि हर मतदाता को एक हाथ का प्लास्टिक गल्व्स दिया गया था। इस्तेमाल के बाद इसके निस्तारण को लेकर बड़ी तैयारी की गई थी। पटना में 5 इंसीनेटर के लिए काम करने वाली तीन एजेंसियों को जिम्मा दिया गया था। बूथ पर डस्टबिन रखना था, जिसमें एक प्लास्टिक का थैला था। कोरोना का कचरा प्लास्टिक के बैग में पैक करने के बाद इसे संबंधित पीएचसी को देना था। बूथ से पीएचसी तक कचरा पहुंचाने का काम राज्य स्वास्थ्य समिति ने अनुमंडल पदाधिकारियों को दी थी, लेकिन काम जमीन पर नहीं किया गया है। पीएचसी से कचरा इंसीनेटर तक पहुंचाने और उसका निस्तारण करने का काम संबंधित एजेंसी का था, लेकिन इसमें भी बड़ी मनमानी की गई है।

50 फीसदी मतदान और महज दो किलो ही कचरा
मसौढ़ी में बूथों पर 50 प्रतिशत मतदान के बाद भी प्रथम चरण के मतदान के बाद एजेंसी को महज 2 किलो कचरा ही दिया गया। इसी तरह प्रथम चरण में अथमलगोला से 4.9 किलो कचरा ही दिया गया। घोसवारी से भी महज 3.6 किलो कचरा ही एजेंसी को दिया गया। दूसरे चरण के चुनाव में भी ऐसे ही किया गया।

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