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मगध की लड़ाई - 1:गया-जहानाबाद में कहीं भितरघात तो कहीं एंटी इंकम्बेंसी बनेगा फैक्टर, मांझी के लिए है प्रतिष्ठा का सवाल

पटनाएक महीने पहलेलेखक: शालिनी सिंह
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गया और जहानाबाद की कई विधानसभा सीटों पर चुनाव जीतन राम मांझी की प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गया है।
  • दिग्गजों की भिड़ंत में कहीं लड़ाई आमने-सामने की तो कहीं त्रिकोणीय संघर्ष
  • इमामगंज से खुद मांझी तो बाराचट्‌टी से उनकी समधन लड़ रहीं चुनाव

मगध प्रमंडल के विधानसभा क्षेत्रों में इस बार मुकाबला काफी रोचक है। बदले समीकरण के बीच उम्मीदवार चुनावी मैदान में एक-दूसरे को टक्कर दे रहे हैं। कहीं साथ तो कहीं भितरघात, कहीं एंटी इंकम्बेंसी फैक्टर तो कहीं जातीय गुणा-गणित से प्रत्याशियों की चिंता बढ़ गई है। इमामगंज में तो दो दिग्गजों के बीच मुकाबला और भी रोचक हो गया है। इस बार राजद के टिकट पर उदय नारायण चौधरी ने 2015 में जीतन राम मांझी से मिली हार का बदला लेने के लिए अपनी ताकत झोंक दी है। जीतन राम मांझी अपनी सीट के लिए तो लड़ ही रहे हैं, बाराचट्टी की सीट भी उनके लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन गई है। यहां पूर्व सीएम जीतनराम मांझी की समधन ज्योति मांझी एनडीए की प्रत्याशी हैं।

मगध प्रमंडल में गया, जहानाबाद, अरवल, नवादा, औरंगाबाद जिले हैं। इनमें कुल 26 सीटें हैं। रिपोर्ट के पहले पार्ट में पढ़िए गया और जहानाबाद जिले की 13 विधानसभा सीटों का हाल।

1. गया टाउन: भाजपा के डॉक्टर प्रेम कुमार और कांग्रेस के अखौरी ओंकार नाथ के बीच सीधी टक्कर

गया टाउन में एनडीए और महागठबंधन की सीधी लड़ाई है। पिछले 30 साल से भाजपा के डॉक्टर प्रेम कुमार यहां से जीत रहे हैं। कुमार इस वक्त बिहार सरकार में मंत्री हैं। उनका मुकाबला कांग्रेस के अखौरी ओंकार नाथ उर्फ मोहन श्रीवास्तव से है। गया में मूलभूत सुविधाओं की कमी प्रेम कुमार के लिए परेशानी बन सकती है। ये कांग्रेस के नये चेहरे के पक्ष में जा सकती है। हालांकि, पिछली बार कांग्रेस और भाजपा को मिले वोटों में करीब 16 फीसदी का अंतर था।

बोध गया (सु): राजद के कुमार सरवजीत और भाजपा के हरि मांझी के बीच मुकाबला

बोधगया में कुल 17 प्रत्याशी मैदान में हैं, लेकिन सीधी टक्कर राजद और भाजपा में दिखाई पड़ती है। पिछली बार हारी भाजपा ने इस बार उम्मीदवार बदला है। पूर्व सांसद हरि मांझी भाजपा प्रत्याशी हैं। राजद ने मौजूदा विधायक कुमार सरवजीत को फिर से अपना उम्मीदवार बनाया है। सरवजीत को 2015 चुनाव में करीब 50 फीसदी वोट मिले थे, जबकि भाजपा प्रत्याशी को 32 फीसदी। साफ है लड़ाई यहां भी सीधी है।

गुरुआ: भाजपा के राजीव नंदन और राजद के विनय कुमार के बीच सीधी टक्कर

गुरुआ में 23 प्रत्याशी किस्मत आजमा रहे हैं। यहां से भाजपा के मौजूदा विधायक राजीव नंदन हैं। पार्टी ने इस बार भी उन्हीं पर भरोसा किया है। राजद ने यहां से विनय कुमार यादव को पहली बार टिकट दिया है। इस सीट पर अनुसूचित जाति के 32.4 फीसदी वोट हैं। 2015 चुनाव में भाजपा ने 7 हजार से अधिक वोटों से जदयू को यहां हराया था। इस सीट पर इस बार भी भाजपा बहुत मुश्किल में नहीं दिखती, लेकिन नोटा जो यहां 6 हजार 32 वोट लेकर चौथे स्थान पर रहा था, वह अगर राजद के पक्ष में जाता है तो भाजपा परेशान हो सकती है।

शेरघाटी: जदयू के विनोद कुमार यादव और राजद की मंजू अग्रवाल की राह मुश्किल कर सकते हैं लोजपा के मुकेश यादव

शेरघाटी चुनावी मैदान में खिलाड़ी तो नये हैं, लेकिन उनके दल बदल चुके हैं। 2015 में विनोद प्रसाद यादव ने यहां मुकेश कुमार यादव को लगभग 5 हजार वोटों से हराया था। मुकेश कुमार यादव ने 2015 में एनडीए से हम के टिकट पर चुनाव लड़ा था। वहीं तीसरे स्थान पर मंजू अग्रवाल थीं, जो निर्दलीय थीं और जिन पर इस बार राजद ने भरोसा किया है। जदयू की टिकट पर विनोद कुमार यादव यहां से 2010 में भी जीते थे। इस विधानसभा क्षेत्र में अनुसूचित जाति की आबादी 34 फीसदी है। इस सीट पर जीत या हार को 34 फीसदी अनुसूचित जाति ही तय करेगी।

बेलागंज: जदयू के अभय कुमार सिन्हा और राजद के सुरेंद्र प्रसाद यादव के बीच मुकाबला, लोजपा के रामाश्रय शर्मा खेल बिगाड़ सकते हैं

2015 चुनाव में राजद के सुरेन्द्र यादव ने बेलागंज से एनडीए से हम के टिकट पर चुनाव लड़े मो. शरीम अली को लगभग 5 हजार वोटों से हराया था। सुरेन्द्र यादव इस सीट से 6 बार जीत चुके हैं। 2010 में जब राजद को विधानसभा चुनाव में बड़ी हार का सामना करना पड़ा था, तब भी सुरेन्द्र यादव यहां से जीते थे। यही वजह है कि राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद के भी वे करीबी हो चले हैं, लेकिन इस बार क्षेत्र में स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़ीं सुविधाओं का अभाव उन्हें मुश्किल में डाल सकता है और नए चेहरे को इसका फायदा मिल सकता है।

अतरी: जदयू की मनोरमा देवी, राजद के अजय यादव और लोजपा के अरविंद कुमार सिंह के बीच त्रिकोणीय मुकाबला

अतरी की लड़ाई इस बार रोचक मानी जा रही है। यहां से जदयू ने विधान पार्षद मनोरमा देवी को मैदान में उतारा है। वहीं, राजद ने नए चेहरे अजय यादव को टिकट दिया है। अजय विधायक कुंती देवी के बेटे हैं। कुंती देवी को 2015 में यहां लगभग 31 फीसदी वोट मिले थे, जबकि अरविंद कुमार सिंह, जो 2015 में एनडीए के प्रत्याशी के तौर पर लोजपा के टिकट पर मैदान में थे, उन्हें करीब 30 फीसदी वोट मिले थे। अरविंद कुमार सिंह को लोजपा ने एक बार फिर उतारा है। हालांकि, इस बार वे एनडीए के प्रत्याशी नहीं, बल्कि केवल लोजपा प्रत्याशी हैं। पुराने चेहरे अरविंद कुमार सिंह की मौजूदगी ने यहां होने वाली लड़ाई को त्रिकोणीय बना दिया है।

वजीरगंज: भाजपा के वीरेंद्र सिंह और कांग्रेस के शशि शेखर सिंह के बीच कड़ी टक्कर

वजीरगंज में कांग्रेस ने वर्तमान विधायक अवधेश कुमार सिंह के बेटे डॉ शशि शेखर को उम्मीदवार बनाया है, जबकि भाजपा ने अपने पुराने उम्मीदवार वीरेन्द्र सिंह पर भरोसा जताया है। वीरेंद्र सिंह 2010 में भाजपा से विधायक रहे थे। इस बार उनका मुकाबला अवधेश कुमार सिंह के बेटे शशि शेखर से होगा। कांग्रेस को यहां पिछली बार करीब 48 फीसदी और भाजपा को करीब 40 फीसदी मत मिले थे, लिहाजा इस बार यहां टक्कर जबरदस्त है।

टिकारी: हम के अनिल कुमार और कांग्रेस के सुमंत कुमार के बीच सीधा मुकाबला

टिकारी विधानसभा चुनाव में कुल 25 प्रत्याशी मैदान में हैं, लेकिन लड़ाई यहां तीन पार्टियों के बीच है। एनडीए से हम के टिकट पर लड़ रहे अनिल कुमार,कांग्रेस के सुमंत कुमार और लोजपा के कमलेश शर्मा के बीच। यह जदयू की परंपरागत सीट रही है, लेकिन इसबार यहां मैदान में हम है। हम के प्रत्याशी अनिल कुमार यहां से तीन बार जीत चुके हैं, लेकिन पिछली बार उन्हें 31 हजार से भी अधिक वोटों से हम के टिकट पर यहां हार का सामना करना पड़ा था। बाकी दोनों पार्टियों के प्रत्याशी नये हैं और इसका फायदा अनिल कुमार को मिल सकता है।

बाराचट्‌टी (सु): हम की ज्योति मांझी और राजद की समता देवी में कड़ा मुकाबला

बाराचट्टी का मुकाबला बेहद दिलचस्प है। यहां पूर्व सीएम जीतनराम मांझी की समधन ज्योति मांझी एनडीए की प्रत्याशी है। यही वजह है कि जीतन राम मांझी के लिए यह सीट प्रतिष्ठा का सवाल है। वे इसपर प्रचार भी खूब कर रहे हैं, लेकिन ज्योति की लड़ाई मुश्किल है, क्योंकि राजद की तरफ से यहां समता देवी को टिकट मिला है, जो यहां की मौजूदा विधायक हैं और 45 फीसदी से अधिक वोट लेकर 2015 में यहां से जीती थीं। समता देवी जदयू सांसद विजय कुमार मांझी की बहन है।

इमामगंज (सु): पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष उदय नारायण चौधरी के बीच सीधी टक्कर

हम और राजद के बीच इस सीट पर कांटे की टक्कर है। नक्सलवाद प्रभावित इमामगंज से उदय नारायण चौधरी 5 बार विधायक रह चुके हैं। 2005 के बाद वे लगातार तीन बार विधायक रहे। 2015 के चुनाव में उदय नारायण चौधरी के विजय रथ को जीतन राम मांझी ने रोक दिया। इस बार राजद की टिकट पर उदय नारायण चौधरी 2015 में जीतन राम मांझी से मिली हार का बदला लेने उतरेंगे। 2015 में भाजपा के साथ होने के बावजूद मांझी इस क्षेत्र के अल्पसंख्यक मतदाताओं का वोट भी अपने खाते में लाने में कामयाब रहे थे। उदय नारायण चौधरी के लिए यहां तब एंटी इनकंबेंसी फैक्टर हार का कारण माना जाता है, लेकिन इस बार ऐसा नहीं है, क्योंकि और इस बार मांझी को भी अपने 5 साल का हिसाब देना होगा। मांझी ने यहां चौधरी को करीब 29 हजार मतों से हराया था।

जहानाबाद: जदयू के कृष्णनंदन प्रसाद वर्मा और राजद के सुदय यादव के बीच मुकाबला

जहानाबाद विधानसभा सीट अपने जिले की लोकसभा सीट भी है। यह यादव बहुल इलाका माना जाता है। यही वजह है कि राजनीतिक दल इस सीट पर हमेशा जातिगत समीकरणों पर ज्यादा भरोसा करते हैं। यादवों के बाद यहां भूमिहार जाति का भी बड़ा वोट है। 2015 चुनाव में यहां राजद को जीत मिली थी। 2018 उपचुनाव में भी राजद के सुदय यादव यहां से जीते थे। इस बार फिर वे मैदान में हैं। जदयू उम्मीदवार को उपचुनाव में उन्होंने 30 हजार वोटों से हराया था। यही वजह है कि इसबार जदयू ने यहां मंत्री कृष्णनंदन वर्मा को मैदान में उतारा है।

घोसी: जदयू के राहुल कुमार और सीपीआईएमएल के रामबली सिंह यादव के बीच सीधी टक्कर

जदयू ने इस बार राहुल कुमार को घोसी से मौका दिया है। इससे पहले मंत्री कृष्णनंदन वर्मा यहां से जदयू के टिकट पर लड़ते रहे हैं, कृष्णनंदन वर्मा इस बार जहानाबाद से चुनाव लड़ रहे हैं। राहुल कुमार यहां से 2010 में जीते थे, जिनको करीब 39 फीसदी वोट मिले थे, जबकि 2010 में दूसरे नंबर पर रही लोजपा को 25 फीसदी वोट मिले थे। लोजपा ने इस बार भी लड़ाई को त्रिकोणीय बनाने कोशिश की है, लेकिन ऐसा होता नहीं दिख रहा है।

मखदुमपुर (सु): हम के देवेंद्र मांझी और राजद के सतीश कुमार के बीच मुकाबला

2015 चुनाव में मखदुमपुर (सु) पर जीतन राम मांझी को राजद के सूबेदार सिंह से हार मिली थी, लेकिन इस बार वे खुद यहां मैदान में नहीं, बल्कि उनके दामाद देवेन्द्र मांझी मैदान में हैं। देवेन्द्र के साथ ही जीतन राम मांझी की प्रतिष्ठा भी यहां दांव पर लगी है। मांझी के लिए राहत की बात यह है कि राजद ने यहां मैदान में नए उम्मीदवार सतीश कुमार को उतारा है। लोजपा ने रानी कुमारी को उतारा है, लेकिन टक्कर तो इस सीट पर हम और राजद की ही दिखाई पड़ती है।ॉ

बदला समीकरण

  • 2010 में भाजपा और जदयू साथ थीं, राजद और लोजपा साथ थीं, कांग्रेस अकेले चुनाव लड़ी थी।
  • 2015 में जदयू, कांग्रेस और राजद साथ थीं, भाजपा के साथ लोजपा और हम थी
  • 2020 में भाजपा और जदयू हैं साथ, लोजपा अकेले और कांग्रेस, राजद है साथ

मगध प्रमंडल की कुल 26 सीटों पर पार्टियों का हाल

  • राजद 2015 में जीती कुल 10 सीटें
  • जदयू 2015 में जीती थी 6 सीटें
  • कांग्रेस 2015 में जीती थी 4 सीटें
  • भाजपा को 2015 में यहां 5 सीटें मिली थीं
  • हम को 2015 में यहां मिली थी 1 सीट

मगध प्रमंडल की 26 सीटों पर पार्टियों का हाल

  • राजद को 2010 में मिली-1 सीट- बेलागंज (गया) बाकी जिलों में 0 पर आउट
  • कांग्रेस को 2010 में 0 पर होना पड़ा था आउट
  • जदयू को 2010 में 16 सीटें मिली थीं
  • भाजपा को 08 सीटें मिली थीं
  • अन्य को 01 सीट मिली थी

रिजर्व सीटें- 6 सीटें

इस रिपोर्ट का दूसरा पार्ट दो घंटे बाद भास्कर एप पर प्रकाशित होगा।

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