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बिहार चुनाव 2020:नेताजी चुनावी मैदान में, नेताजी के रिश्तेदार चुनावी चौकीदारी में, ऐसा होगा बिहार का चुनाव

पटनाएक वर्ष पहलेलेखक: शालिनी सिंह
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आज पहले फेज की वोटिंग है और सोमवार को मुंगेर में हुए बवाल के बाद यह सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या उन अधिकारियों को चुनाव से जुड़े काम में लगाया जाना चाहिए, जिनके परिजनों की बिहार में राजनीतिक दखल है। मुंगेर एसपी लिपि सिंह को हटाने के लिए वामपंथी संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है। ऐसे में भास्कर डिजिटल ये सामने ला रहा है कि बिहार में किन अफसरों के राजनीतिक कनेक्शन हैं और कैसे?

बिहार के चुनावी मैदान में राजनीतिक बिसात बिछ चुकी है। सभी पार्टियों ने अपने-अपने मोहरे मैदान में उतार दिए हैं। इस मैदान में कुछ ऐसे चुनावी सिपाही भी मौजूद हैं, जो खुद तो चुनाव नहीं लड़ रहे लेकिन उनके अपनों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। ये चुनावी सिपाही पुलिस और प्रशासन से जुड़े वो आला अधिकारी हैं, जिनपर एक तरफ फ्री एंड फेयर चुनाव कराने का जिम्मा है तो दूसरी तरफ उनके अपने चुनावी मैदान में किस्मत आजमा रहे हैं। इनमें कई ऐसे भी हैं जिनपर समय-समय पर दलों या प्रत्याशियों के पक्ष में काम करने के आरोप लगते रहे हैं, तो कई ऐसे भी हैं जिनपर इन मामलों में चुनाव आयोग पहले कार्रवाई करता रहा है।

वो नाम जिनपर आरोप लगते रहे हैं
सबसे पहले वो नाम जिनपर समय-समय पर राजनीति के तहत काम करने के आरोप लगते रहे हैं लेकिन जिनपर किसी की नजर नहीं गई। यहां तक कि चुनाव आयोग की भी। इन चुनावी सिपाहियों पर चुनाव आयोग ने अब तक नजर तक नहीं फेरा। अगर नजर फेरा होता, तो वह इन चुनावी सिपाहियों को कैसे बक्श देता। चलिए हम आपको मिलवाते हैं उन प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों से जो फ्री एंड फेयर चुनाव को लेकर सवालों के घेरे में हैं।

लिपि सिंहः जदयू के राज्यसभा सांसद आरसीपी सिंह की बेटी
लेडी सिंघम के नाम से चर्चित लिपि सिंह, जदयू के राज्यसभा सांसद आरसीपी सिंह की बेटी हैं। लिपि सिंह जितना ज्यादा अपने कामों के लिए चर्चा में रहती हैं उतना ही ज्यादा अपने ऊपर लगे आरोपों को लेकर। बीते लोकसभा चुनाव में मोकामा विधायक अनंत सिंह की पत्नी जब जदयू सांसद ललन सिंह के खिलाफ मुंगेर से चुनाव लड़ रही थीं तो उस दौरान लिपि सिंह द्वारा की जा रही कार्रवाई को लेकर अनंत सिंह ने उनपर पिता की पार्टी को फायदा पहुंचाने की कोशिश करने का आरोप लगाया था। लिपि सिंह को लेकर लगातार उठ रहे सवालों के बाद तब चुनाव आयोग ने भी उन्हें इलेक्शन ड्यूटी से हटा दिया था। अनंत सिंह के पक्ष की तरफ से इसको लेकर चुनाव आयोग में लिखित शिकायत भी की गई थी। हालांकि चुनाव के बाद एक बार फिर उन्हें बाढ़ की एएसपी बना दिया गया था।

शैश‌व यादवः राजद विधायक एज्या यादव के रिश्तेदार
ये मोतिहारी के एएसपी हैं और मोहिउद्दीनगर से राजद विधायक एज्या यादव के करीबी रिश्तेदार हैं। एएसपी शैशव यादव तब सबसे ज्यादा चर्चा में आए थे, जब भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और सांसद संजय जायसवाल ने उनपर गंभीर आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव लाया था। संजय जायसवाल ने तब कहा था कि 9 दिसंबर 2019 को लोकसभा में नागरिकता संशोधन बिल पेश होना था, इसमें बहस और वोटिंग में भाग लेने के लिए उन्हें ही पार्टी में सांसदों के लिए व्हिप जारी करना था। लेकिन इससे ठीक पहले मोतिहारी के एएसपी ने उनकी गिरफ्तारी का आदेश जारी कर दिया। संजय जायसवाल ने आरोप लगाया था कि ये सारा खेल इसलिए था कि पार्टी के सांसदों के लिए व्हिप जारी ना हो पाए। विशेषाधिकार हनन के मामले में शैशव यादव को जबाब तलब भी किया गया है।

उपेन्द्र कुमारः संजय जायसवाल का गिरफ्तारी वारंट आया, तब एसपी थे
पटना के एसएसपी उपेन्द्र कुमार पर भी विशेषाधिकार हनन का मामला चल रहा है। असल में जब संजय जायसवाल के खिलाफ गिरफ्तारी का वारंट जारी हुआ था, तब उपेन्द्र कुमार मोतिहारी एसपी के पद पर थे। इसलिए इस मामले में उनसे भी संसदीय समिति ने जबाब तलब किया है। संजय जायसवाल ने शैशव और उपेन्द्र दोनों पर साजिश के तहत कार्रवाई करने के आरोप लगाए थे।

वो पुलिस पदाधिकारी, जो नेताओं के करीबी रिश्तेदार हैं, हालांकि इनपर फिलहाल कोई सीधा आरोप नहीं

राघव दयालः जदयू से सांसद कौशलेन्द्र के रिश्तेदार
हाजीपुर सदर एसडीपीओ राघव दयाल, जदयू से सांसद कौशलेन्द्र के करीबी रिश्तेदार हैं। राघव दयाल को इस रिश्तेदारी के कारण सत्ता के करीब रहनेवाला पुलिस पदाधिकारी माना जाता है. हालांकि उनपर किसी पार्टी विशेष या प्रत्याशी विशेष को फायदा पहुंचाने की कोशिश करने का कोई आरोप अबतक नहीं लगा है।

सुहर्ष भगतः जदयू के राज्यसभा सांसद आरसीपी सिंह के दामाद हैं
जदयू के राज्यसभा सांसद आरसीपी सिंह के दामाद और बाढ़ एएसपी लिपि सिंह के पति सुहर्ष भगत फिलहाल बांका में डीएम हैं। हालांकि लिपि की तरह सुहर्ष भगत पर अबतक किसी ने राजनीतिक दबाव के तहत काम करने के आरोप नहीं लगाए हैं। लेकिन आरटीआई एक्टिविस्टों की संस्था नागरिक अधिकार मंच ने जदयू सांसद से करीबी संबंध होने और डीएम के तौर पर उनके प्रभाव के मद्देनजर चुनाव आयोग से उन्हें चुनावी कार्यों से हटाने की लिखित मांग जरूर की है।

जयंतकांतः जदयू की उम्मीदवार नूतन पासवान के दामाद हैं
मुजफ्फरपुर के एसएसपी जयंतकांत एक तेज-तर्रार पुलिस अधिकारी माने जाते हैं। लेकिन इस बार एक ओर जहां जयंतकांत चुनावी सिपाही की भूमिका में दिखाई देंगे, वहीं उनकी सास नूतन पासवान प्रत्याशी के तौर पर मैदान में हैं। नूतन पासवान जदयू के टिकट पर मसौढ़ी सुरक्षित सीट से चुनाव लड़ रही हैं। हालांकि जयंतकांत पर भी कभी किसी पार्टी या नेता ने दलगत राजनीति के तहत काम करने के आरोप नहीं लगाए हैं।

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