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सियासत का गजब गणित:सात सीटों पर 30 फीसदी से भी कम वोट पाकर बन गए माननीय, 18 को 35% से भी कम वोट

बिहार चुनावएक महीने पहले
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  • मांझी से कांग्रेस प्रत्याशी 20% वोट पाकर जीते, विरोध में पड़े 40 फीसदी वोट
  • 2015 में सबसे ज्यादा 35 प्रत्याशी कुम्हरार सीट पर थे, विजेता अरुण कुमार सिन्हा को 56.25 प्रतिशत वोट मिले थे

चुनावी राजनीति पर अल्लामा इक़बाल का बड़ा मशहूर शेर है जम्हूरियत इक तर्ज़-ए-हुकूमत है कि जिसमें/बंदों को गिना करते हैं, तोला नहीं करते... यह शेर बिहार की कई सीटों के चुनावी नतीजे में झलकते हैं। 2015 के विस चुनाव में मांझी से कांग्रेस के विधायक चुने गए विजय शंकर दूबे। इस विधानसभा सीट पर 50 प्रतिशत से अधिक मतदान हुआ था। लेकिन दूबे सिर्फ 20.57% वोट हासिल कर चुनाव जीत गए थे। उन्हें 29,558 मत मिले थे जबकि कुल 1,43,720 लोगों ने वोट किया था।
दूसरे नजरिए से देखें तो 120162 लोगों ने दूबे को वोट नहीं दिया। दूबे से हारने वाले चार के 40.23 % वोट मिले। मांझी में 16 उम्मीदवार थे। 2015 के चुनाव में दूबे ऐसे अकेले विधायक नहीं थे जो हारने वाले निकटतम तीन या चार प्रत्याशियों को मिले कुल वोटों से कम वोट पाकर भी जीत गए। 2015 (56.66 %) में 2010 (52.73 %) के मुकाबले बेहतर मतदान % के बावजूद ऐसे 18 विधायक थे जो 35 प्रतिशत से भी कम वोट पाकर चुनाव जीत गए। इनमें 7 तो ऐसे थे जिन्हें 30 प्रतिशत से भी कम वोट मिले जबकि दो प्रत्याशी 30 प्रतिशत वोट पाकर ही विधायक बन गए।
इन 7 सीटों पर 50% से अधिक पड़े थे वोट पर विजेता को 30% से भी कम
बेलसंड, हरलाखी, तरारी, शिवहर, अमनौर, जीरादेई ऐसी सीटें हैं जहां जीते विधायक को 30% से भी कम वोट मिले। इन सीटों में प्रत्याशियों की संख्या मांझी-16, बेलसंड-19, हरलाखी-18, तरारी-15, शिवहर-12, अमनौर-15, जीरादेई-17 थी जिसका औसत 14 आता है। इन सीटों पर वोट % 50.73, 52.04, 56.03, 68.52, 53.28, 54.08 व 53.62 रहा।
मांझी, हरलाखी व जीरादेई से 2010 में जीतने वाले 2015 में हार गए
इनमें से तीन सीट पर 2010 में भी जीतने वाले प्रत्याशी को 30 प्रतिशत से कम वोट मिले। ये तीन सीट थी मांझी, हरलाखी और जीरादेई। यहां जीतने वाले प्रत्याशी को क्रमश: 26.88, 26.97 और 27.25 प्रतिशत वोट मिले थे। इन सभी सीटों पर 2010 में जीतने वाले प्रत्याशी 2015 में या तो मैदान में ही नहीं थे या फिर चुनाव हार गए।

विधानसभा की सात सीटें जहां 2015 में 30 प्रतिशत से भी कम वोट पाकर प्रत्याशी बन गए विधायक

तीन सीटों पर 2010 में 30 फीसदी से कम वोट, 2015 में 50 फीसदी से पार
चेरिया बरियारपुर, दरभंगा ग्रामीण और बिक्रम ऐसी सीटें हैं जहां 2010 में तो प्रत्याशियों को 30 प्रतिशत से कम वोट मिले थे। लेकिन 2015 में कांग्रेस, राजद और जदयू के महागठबंधन के मैदान में होने के कारण विजेता प्रत्याशी के मत % में भारी वृद्धि हुई। इन सीटों पर 2015 के चुनाव में जीतने वाले प्रत्याशी को क्रमश: 50.37, 51.14 और 54.44 प्रतिशत वोट मिले।

  • शिवहर विधानसभा क्षेत्र के विधायक सरफुद्दीन (जदयू) को वोट मिले-44576, प्रतिशत-29.71, कुल-150049, वोट पड़े-105473, अंतर प्रतिशत-70.29
  • अमनौर विधानसभा क्षेत्र के विधायक शत्रुघ्न तिवारी (भाजपा) को वोट मिले-39134, प्रतिशत-29.85, कुल-131095, वोट पड़े- 91961, अंतर प्रतिशत-70.15
  • जीरादेई विधानसभा क्षेत्र के विधायक रमेश सिंह कुशवाहा (जदयू) को वोट मिले-40760, प्रतिशत-29.99, कुल-135904, वोट पड़े-95144, अंतर प्रतिशत-70.01

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