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बिहार:4 जिलों में बिजली गिरने से 10 लोगों की मौत, इस साल 300 से अधिक जान गई; 14 जिलों में अलर्ट

पटना2 महीने पहले
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उत्तर बिहार के कई जिलों में तेज बारिश और वज्रपात की भी संभावना है। (प्रतीकात्मक तस्वीर)
  • औरंगाबाद में 5, गया और भोजपुर में 2-2 लोगों की जान गई
  • मंगलवार को बिजली गिरने से 18 लोगों की जान चली गई थी

प्रदेश के अलग-अलग जिलाें में ठनका से 10 लोगों की मौत हाे गई। औरंगाबाद में 5, आरा और गया में 2-2 तथा अरवल में एक व्यक्ति की माैत हाे गई। औरंगाबाद में अलग-अलग जगहाें पर ठनका गिरने से दो किशोर समेत पांच लोगों की मौत हो गई। जबकि चार जख्मी हो गए।

मृतकों में गोह थाना क्षेत्र के देवहरा गांव निवासी अजय मालाकार का बेटा 14 वर्षीय आशीष, 12 वर्षीय गोलू, शेखपुरा गांव निवासी राम प्रवेश चौधरी का बेटा 18 वर्षीय मुनेश, पौथू थाना क्षेत्र के पाठक बिगहा गांव निवासी राकेश कुमार की बेटी विभा व ओबरा थाना क्षेत्र के गोड़तारा निवासी 50 वर्षीय मजदूर त्रिभुवन राम शामिल हैं।

भाेजपुर में भी दाे की माैत हाे गई। बिहिया-कल्याणपुर गांव में एक 50 वर्षीया महिला की ताे दुल्हिनगंज में एक युवक की मौत हाे गई। अारा में मुआवजे के लिए हाईवे जाम किया गया। इसके अलावा गया में ठनका से 2 लाेगाें की मृत्यु हाे गई। वहीं अरवल के कलेर थाना क्षेत्र के अगानुर गांव में ठनका गिरने से एक व्यक्ति की मौत हाे गई, दो लोग जख्मी हाे गए।

औसतन 300 मौतें हर साल, जानकारी के अभाव में मौत का औसत पार
बिहार में औसतन हर साल 300 मौतों बिजली गिरने के कारण होती रही है, लेकिन इस साल यह आंकड़ा इस औसत को पार कर चुका है। बिहार सरकार के आपदा प्रबंधन विभाग की बैठकों में सलाह के लिए बुलाए जाने वाले वज्रपात सुरक्षित भारत अभियान के संयोजक कर्नल संजय श्रीवास्तव के अनुसार आकाशीय बिजली से बचने के उपायों की जानकारी लोगों तक नहीं पहुंच रही है, जिसके कारण शहरों की अपेक्षा बिहार की ग्रामीण आबादी इसकी शिकार ज्यादा हो रही है।

शहरों में ज्यादातर भवनों पर तड़ित रोधक (लाइटनिंग अरेस्टर) और तड़ित चालक (लाइटनिंग कंडक्टर) लगे रहते हैं, इसलिए वह बिजली को खींचकर अर्थिंग के जरिए जमीन तक भेज देते हैं, जबकि गांवों में खुले खेतों में पड़े लोहे-तांबे के सामान, जलस्रोत, ऊंचे पेड़ आकाशीय बिजली को आकर्षित कर लेते हैं। इसके आसपास रहे लोगों की आकाशीय बिजली के करंट या तेज आवाज से धड़कन रुक जाती है या जलकर मौत हो जाती है।

बचना है तो क्या करें, न करें...यह जान लीजिए

  • खुले में हैं तो किसी पक्के मकान तक पहुंच सकते हैं तो पहुंचें
  • खुले में ही हैं तो दोनों पैर सटा चुक्कू-मुक्कू बैठ कान बंद कर लें
  • लोहे के खंभों, ऊंचे पेड़ों, तालाब-जलाशय आदि से खुद को दूर करें
  • सूखी लकड़ी, प्लास्टिक, बोरा या सूखे पत्ते पर खड़े हो सकते हैं
  • जिन चीजों में करंट आ सकता है, उन्हें तुरंत अपने से दूर कर दें
  • समूह में सटकर खड़े न हों, दूरी बनाकर रहें और जमीन पर न सोएं
  • घर में हों तो नल, फ्रिज या ऐसे करंट वाले उपकरणों को नहीं छुएं

स्थायी उपाय भी कर सकते हैं
आकाशीय बिजली से बचाने के लिए बिहार में कुछ संस्थाएं नो प्रॉफिट, नो लॉस पर लाइटनिंग अरेस्टर और लाइटनिंग कंडक्टर भी उपलब्ध करा रही हैं। लाइटनिंग कंडक्टर 54 हजार रुपए में मिल रहा है। यह जिस ऊंचाई पर लगाया जाता है, उससे 45 डिग्री की छाया में वज्रपात को रोकता है। यानी, खेत में 40 फीट ऊंचाई पर इसे लगा दें तो उस जगह से 45 डिग्री का कोण बनाने पर जितनी परिधि होगी, उतनी दूर तक बिजली नहीं गिरेगी। लाइटनिंग अरेस्टर इससे करीब तीन गुणा कीमत पर 1.42 लाख रुपए में उपलब्ध है। यह जहां लगाया जाता है, उसके 1.4 वर्ग किमी के दायरे के आकाश में बिजली बननी शुरू होते ही उसे खींचकर जमीन में डाल देता है। मतलब, यह 1.4 वर्ग किमी के दायरे में बिजली से बचाने वाला छाता है। बिजली न गिरेगी और न आवाज होगी।

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