बोगस वोटर पर राज्य निर्वाचन आयोग सख्त:बिहार पंचायत चुनाव में अब होगी गिरफ्तारी, आयोग ने कार्रवाई पर जिलों से मांगी रिपोर्ट

पटना13 दिन पहले
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राज्य निर्वाचन आयोग। - Dainik Bhaskar
राज्य निर्वाचन आयोग।

बिहार पंचायत चुनाव में बायोमैट्रिक मशीन से मतदाताओं की पहचान करने का प्रयोग सफल होने के बाद अब राज्य निर्वाचन आयोग आयोग फर्जी वोटरों को लेकर सख्त हो गया है। पहले चार चरणों में रिजेक्टेड वोटर को फर्जी वोटर कहने से कतरा रही आयोग ने अब इसे लेकर जिलों से रिपोर्ट तलब की है। फर्जी वोटरों की गिरफ्तारी भी हो सकती है।

राज्य निर्वाचन आयोग ने कार्रवाई पर जिलों से मांगी रिपोर्ट

बिहार पंचायत चुनाव अपने सातवें चरण में पहुंच चुका है। आठवें से लेकर दसवें चरण तक की चुनावी प्रक्रिया भी जारी है। इस बीच राज्य निर्वाचन आयोग ने सभी जिला निर्वाचन पदाधिकारियों को पत्र भेजकर बोगस वोटर्स को लेकर खास निर्देश जारी किया है। आयोग ने सभी जिलों से बोगस वोटरों की संख्या और उन पर हुई कार्रवाई को लेकर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। इससे पहले चार चरणों में आयोग ने बायोमैट्रिक मशीन से सही पहचान नहीं होने के कारण वोट नहीं डाल पाने वाले वोटरों को केवल रिजेक्टेड वोटर माना था।

सभी जिलों से मांगी गई रिपोर्ट

अब आयोग ने सातवें चरण के मतदान के पहले निर्देश जारी कर पीठासीन पदाधिकारी को रिजेक्टेड वोटर की जांच का जिम्मा दिया है। पदाधिकारी साक्ष्यों के आधार पर जांच कर यह तय करेंगे कि मतदाता किसी अन्य मतदाता के स्थान पर मतदान करने या दोबारा मतदान करने पहुंचा है तो उसे पुलिस के हवाले कर दिया जाएगा। आयोग ने ऐसी कार्रवाई को लेकर सभी जिलों से चरणवार रिपोर्ट मांगी है ।

बोगस वोट करने पर एक साल की सजा

राज्य निर्वाचन आयोग ने जिलों को भेजे गए अपने पत्र में बोगस वोटर पर भारतीय दंड संहिता धारा-171D और 171F के तहत कार्रवाई का निर्देश दिया है। इसके तहत बोगस वोटर को एक वर्ष तक की सजा या जुर्माना या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

4 चरणों में 77 हजार से अधिक वोटर हो चुके हैं रिजेक्टेड

पंचायत चुनाव के पहले 4 चरणों में 77 हजार से अधिक लोग रिजेक्टेड वोटर बन चुके हैं। मतलब ये है कि ये वोटर ना सिर्फ बूथ तक आयें बल्कि लाइन में भी लगे लेकिन फिर भी वोट नहीं डाल सके, क्योंकि इनकी पहचान बायोमैट्रिक मशीन से नहीं हो सकी। राज्य निर्वाचन आयोग ने बायोमैट्रिक के नए प्रयोग के कारण शुरुआती चरणों में रिजेक्टेड वोटर पर कार्रवाई करने से परहेज किया, लेकिन अब ऐसा नही है। अब इन पर कार्रवाई की रिपोर्ट जिलों से रिपोर्ट मांगी जा रही है। आयोग के इस निर्देश के बाद बोगस वोटरों से जुड़ी अधिकृत जानकारी सामने आ सकेगी।

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