70 साल पुरानी पनवारी रजवाहा लाइन नहर क्षतिग्रस्त
सिंचाई के लिए महत्वपूर्ण ईमादपुर-आरा लाइन नहर से निकल कर बागर गांव पास बनास नदी में जाकर गिरने वाली पनवारी रजवाहा लाईन नहर क्षतिग्रस्त हो गई है। ईमादपुर से लेकर बागर तक दर्जनों जगहों पर नहर व इसका किनारा क्षतिग्रस्त हो चुका है। इस कारण तरारी प्रखंड के किसानों को काफी परेशानी होती है। हाल यह कि कभी नहर में निचले छोर पर पानी नही पहुंचने से सुखाड़ की स्थिति हो जाती है। कभी नहर क्षतिग्रस्त होने से रबी फसल से लेकर खलिहान में रखे धान में पानी से भरने से खराब हो जाता है। ईमादपुर, बिशनपुरा, सहियारा, बहादुरपुर, बेरई, सहियारा, सांवना, बाजार टोला, मोपती सहित कई गांवों का फसल को काफी नुकसान पहुंचता है। ईमादपुर-आरा बड़ी लाइन नहर से बागर तक जाने वाली पनवारी रजवाहा छोटी नहर करीब 70 वर्ष पुरानी है। नहर की लंबाई करीब 11 किलोमीटर तक है। नहर से ईमादपुर, बिशनपुरा, बहादुर पुर, मोआपकला, मिल्की, बेरई आिद गांवाें में सिचाई होती है।
नहर टूटने से 600 बीघा जमीन रह जाता है परती
नहर का बैंक क्षतिग्रस्त होने से हर साल फसल बर्बाद होने से खेत परती रह जाती है। इससे फसलों की सही उपज नहीं हो पाती है। लगभग 600 बीघा खेत प्रभावित होता है। पूर्व सांसद मीना सिंह से लेकर वर्तमान सांसद सह केंद्रीय मंत्री आर के सिंह से नहर की मरम्मती से लेकर ईमादपुर बिचली पूल से निकल कर सहियारा नहर पुल तक करीब डेढ़ किमी परलै चैन निकालने की मांग की गई है। लेकिन अभी तक समस्या का समाधान नही हो सका है।
पनवारी रजवाहा के मरम्मत के लिए भेजेंगे प्रस्ताव: अभियंता
नहर विभाग के कनीय अभियंता संजय कुमार राम ने बताया कि मेठ द्वारा हर साल क्षतिग्रस्त नहर के किनारा की मरम्मती कराई जाती है। पनवारी रजवाहा को पूरी तरह से मरम्मती के लिए डिमांड भेजा जाएगा।
खुद नहर की मरम्मत करना किसानों की विवशता
पूर्व प्रखंड उपप्रमुख सह किसान राजेन्द्र राय ने बताया कि नहर के मरम्मती के नाम पर विभाग द्वारा केवल कोरम पूरा होता है।
पनवारी रजवाहा लाइन नहर।