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पीएचडी में पंजीयन से पहले शोधार्थियों को यह बताना होगा कि उनके शोध से समाज को क्या फायदा पहुंचेगा

एक वर्ष पहले
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नए रेगुलेशन से पीएचडी करना अब आसान नहीं होगा। शोध की गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए यूजीसी लगातार बदलाव कर रहा है। वर्ष 2020 से पीएचडी के लिए पंजीकृत होने वाले सभी शोधार्थी इस नियम के अंतर्गत आएंगे। हाल ही में एमएचआरडी और यूजीसी ने नया गाइडलाइन जारी किया है। इसमें शोधार्थियों को अब पंजीयन के दौरान ही बताना होगा कि उनके शोध से समाज को क्या फायदा होगा। समाज के लिए वह कितना उपयोगी है। वायवा के पहले शोधग्रंथ को यूजीसी को भेजना होगा। वहां उसका मूल्यांकन होगा। इसमें सफल होने पर डिग्री अवार्ड किया जाएगा। इसको लेकर विश्वविद्यालय को दिशा-निर्देश दिए जा रहे है। प्रो किस्मत कुमार सिंह ने बताया कि शोध सिर्फ शोध ग्रंथ तक ही सीमित होकर रह जाता है। इसलिए समय-समय पर नियमों में बदलाव किया जा रहा है। शिक्षा, समाज एवं राष्ट्रहित के लिए हमारे शोध का क्या योगदान होगा इस पर मंथन की आवश्यकता जरूर होनी चाहिए। रिसर्च स्कॉलर का पूरा ध्यान किसी भी तरह शोधग्रंथ को पूरा करना होता एवं उसे अवार्ड के लिए जमा कर देना होता है। जैसे ही उसकी पीएचडी पूरी होती है, वह आगे काम करना बंद कर देता है। जूनियर्स से भी अपने शोध के आउटपुट को शेयर नहीं करता है। शोध की गुणवत्ता में हो रहे लगातार गिरावट को देखते हुए इस तरह का गाइडलाइन जारी किया जा रहा है। गौरतलब हो कि वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय से पीएचडी की प्रवेश परीक्षा में 271 विद्यार्थी उत्तीर्ण हुए है। 24 विषयों के लिए 1130 विद्यार्थियों ने परीक्षा दिया था। परीक्षा दो पालियों में हुई थी। परीक्षा के लिए पांच केंद्र बनाया गया था। प्रथम चरण में परीक्षार्थियों से वैकल्पिक प्रश्न पूछे गये थे। दूसरे चरण में अतिलघु उत्तरीय, लघु उत्तरीय व दीर्घ उत्तरीय पूछा गया था। शहर के जैन कॉलेज, महाराजा कॉलेज, एसबी कॉलेज, जगजीवन कॉलेज व महंत महादेवानंद महिला कॉलेज को परीक्षा केंद्र बनाया गया था।

पीजीआरसी की बैठक में होता है सिनॉप्सिस पर मंथन

पहले पीजीआरसी की बैठक में सिनोप्सिस को लेकर मंथन होता था। पीजीआरसी की बैठक में सिनोप्सिस क्लियर होने पर शोधार्थी पीएचडी के लिए पंजीयन कराते थे। बैठक के चेयरमैन कुलपति होते है। प्रोफेसर रैंक के शिक्षक, विषय के विभागाध्यक्ष एवं उस विषय के बाहर से एक्सपर्ट को बुलाया जाता है। कमेटी शोध की संभावित: रूप रेखा एवं रिसर्च मेथोडोलॉजी के बारें में देखते है।

वीकेएसयू का फाइल फोटो।
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