सिरिसिया, इंग्लिशपुर और विशेनटोला में हाथ में जूते लेकर पढ़ने जाते हैं बच्चे

Ara News - एकवना पंचायत के सिरिसिया, इग्लिशपुर और विशेन टोला आजादी के बाद भी कई मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। इन गांवों में...

Bhaskar News Network

Sep 14, 2019, 06:27 AM IST
Badhara News - children go to school with shoes in sirisia englishpur and visentola
एकवना पंचायत के सिरिसिया, इग्लिशपुर और विशेन टोला आजादी के बाद भी कई मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। इन गांवों में जाने के लिए एक भी सड़क नहीं है। खेतों के बीच होकर ग्रामीणों का आना-जाना होता है। बच्चों को स्कूल जाने के लिए हाथों में अपने जूते-चप्पल लेकर बबुरा-पड़रिया बांध सड़क तक जाना पड़ता है। इसके बाद सिरसिया में बांध पर बने मंदिर के चापाकल पर पैर धोकर बच्चे फिर जूता-चप्पल पहनते हैं। इस गांव में करीब 1150 मतदाता हैं। सरकारी स्तर पर विकास के दावों के बावजूद ग्रामीणों को एक सड़क तक नसीब नहीं है। जबकि, इंग्लिशपुर व सिरिसिया अलग-अलग गांव है। विशेनटोला सिरिसिया गांव का अंग है। सबसे बुरा हाल बरसात में होता है। लोग बरसात में नाव से तटबंध पर पहुचते हैं। जहां से वे लोग आरा, बबुरा, बड़हरा प्रखंड कार्यालय, सेमरिया व अन्य बाजारों के लिए आना-जाना करते हैं। इस गांव से लोकसभा, विधानसभा व पंचायत चुनाव में प्रत्यासी मतदाताओं को कई वादे कर वोट ले लेते हैं। प्रत्याशी जब जीत जाते हैं तो फिर इस गांव की ओर देखने तक नहीं आते हैं।

2006 में बना था पहुंच पथ

पहुंच पथ और पुलिया के लिए चुनावी वर्ष 2001-06 के बीच में तत्कालीन बड़हरा के तत्कालीन विधायक राघवेंद्र प्रताप सिंह ने एक लाख की राशि मुहैया कराई थी। संवेदक ने निर्माण भी कराया। तटबंध के भराई के वक्त बने गड्‌ढे में ऊंची सड़क का निर्माण नहीं होने से थोड़ी बर्षा में भी लोगों को कीचड़ और पानी से सामना करना पड़ता है। तीनों गांव बाढ़ के समय टापू की तरह दिखता है। तटबंध सड़क पर पहुंचने का एक मात्र साधन नाव है। तीनों गांंव से तटबंध की दूरी महज 100 मीटर के आसपास होगा। इसके बाद भी न कोई अधिकारी, न कोई दल, न कोई भी पंचायत प्रतिनिधि रुची नहीं लेते। ग्रामीणो ने यह भी बताया कि इस गांव को सड़क मार्ग से जोड़ने में लोगों की निजी जमीन बाधक है। कुछ जमीन दूसरे गांव के लोगों की है। सड़क के लिए कई बार प्रयास किया गया, सफलता नही मिला। इस समस्या के समाधान के लिए तत्कालीन विधायक आशा देवी ने भी प्रयास कीं, पर पूरा नही हो सका

अधिकारी और जनप्रतिनिधि नहीं दे रहे हैं ध्यान, लोगों में पनप रहा आक्राेश

ग्रामीण बोले- विकास क्या होता है, हमें नहीं मालूम


हाथ में जूता-चप्पनल लेकर पढ़ने जाते छात्र-छात्राएं।

बड़हरा इंग्लिशपुर गांव जाने का कीचड़ वाला रास्ता






मरीजों को खाट पर लादकर ले जाते हैं अस्पताल

इस तीनों गांव व टोलों में बच्चोंे के पढ़ने के लिए इंग्लिशपुर में उत्क्रमित मध्य विद्यालय और सिरिसिया में प्राथमिक विद्यालय है। सम्पर्क पथ के अभाव में बरसात के समय इस गांव में कीचड़ के कारण दुपहिया वाहन तक ले जाना संभव नहीं होता है। बीमार व गर्भवती महिलाओं को चारपाई पर लाद कर तटबंध तक लगभग एक से डेढ़ किलोमीटर तक लाया जाता है। इंग्ललिशपुर गांंव के श्याम नारायण सिंंह नेे बताया कि वर्ष 1971 मेें चैनछपरा, इग्लिशपुर और विषेन टोला गंंगा नदी के कटाव में विस्थापित होकर बसा है। जिसमें चैनछपरा व इंग्ललिशपुर गांंव की आबादी मेंं करीब 700 मतदाता थे। यहां साधनहीनता के कारण लोग यत्र-तत्र पलायन कर गये। कुछ लोग घुसरिया, कुईया, पटना, उतरप्रदेश, मध्यप्रदेश, असम में नौकरी पेशा वाले बस गये। इस गांव की पहुंच पथ की समस्या को ले सामाजिक कार्यकर्ता डाॅ.अनिल सिंह के नेतृत्व में बड़हरा बीडीओ सुशील कुमार से एक प्रतिनिधि मंडल मिला। जिसमें ओम प्रकाश सिंह, कुन्दन सिंह, प्रिंस सिंह भारद्वाज, रामनेह सिंह, राजेश कुमार राय, छोटू सिंह, बिपिन कुमार व अन्य थे। बीडीओ ने विभाग को अनुसंसा कर भेजने का आश्वासन दिया।

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