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सिन्हा गांव में किसानों को जैविक कृषि को लेकर किया जागरूक

3 वर्ष पहले
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जैविक खेती की आवश्यकता, महत्त्व, लाभ और हानि पर जागरूकता को लेकर सिन्हा गांव में जीवित माटी किसान समिति जमुई की अभियान टीम पहुंची। टीम ने किसानों को बताया रसायनिक खाद अौर कीटनाशक से खेती पर बुरा असर पड़ रहा है। किसानों की लागत बढ़ रही है, लेकिन पैदावार की कोई गारंटी नहीं। मिट्टी, पानी, हवा सब धीरे-धीरे खराब होतेे जा रहे हैं। फसल व उनको ग्रहण करने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ रहा है। इसी वजह से बिहार व भारत सरकार किसानों से जैविक खेती अपनाने को कह रही है। इसी संदेश के साथ यह जैविक बिहार यात्रा आपके द्वार पहुंची है। जो 20 नवंबर से 10 दिवसीय जैविक बिहार यात्रा पर है। जिसकी शुरुआत नालंदा जिले में आयोजित ‘रबी किसान चौपाल’ से की है।

किसानों ने पूछे कई सवाल- तो विशेषज्ञाें ने कहा रसायन आधारित खेती का भविष्य नहीं

टीम ने किसानों से पूूछा रासायनिक कीटनाशकों के प्रयोग के बावजूद हमारी फसल चौपट क्यों हो जाती है। प्रति एकड़ हज़ारों की लागत पर भी मन माफिक फसल नहीं होती। जब फसल ठीक भी होती है तो उसका सही दाम नहीं मिल पाता? इसपर किसानों की आम राय थी कि रसायन आधारित खेती का कोई भविष्य नहीं रह गया है और जल्द ही अगर कोई दूसरा उपाय नहीं किया गया तो किसान और खेती दोनों का नाश निश्चित है। किसान सलाहकार संतोष सिंह ने बताया, “रसायनों के प्रयोग से मिट्टी के जल धारण की क्षमता कम हो गई है। रामावतार सिंह ने किसानों से रसायनिक से जैविक कृषि की तरफ मुड़ने की बात कही। जैविक खेती को अपनाकर किसान अपनी आजीविका और मिट्टी को बचाने में भी कामयाब हो रहे हैं।

सिन्हा गांव में किसानों के साथ जैविक व रासायनिक खेती पर चर्चा करती अभियान टीम।

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