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20 मार्च तक सभी कॉलेजों काे एआईएसएचई डाटा अपलोड करने का फरमान जारी, नहीं तो कार्रवाई

एक वर्ष पहले
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वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय अंतर्गत दो अंगीभूत कॉलेज, 35 संबद्ध कॉलेज एवं छह बीएड कॉलेज ऑल इंडिया सर्वे ऑफ हायर एजुकेशन (एआईएसएचई) सत्र 2019-20 के लिए डाटा अपलोड करने में रूचि नहीं दिखा रहे है। फरवरी माह तक सभी कॉलेज एवं विभाग को डाटा अपलोड करने का आदेश जारी किया गया था। इसके बावजूद कॉलेजों ने इस पर संज्ञान नहीं लिया। विश्वविद्यालय प्रबंधन ने स्मार पत्र जारी करते हुए 20 मार्च तक कॉलेजों का डाटा अपलोड करने का फरमान जारी किया है। कुलसचिव श्यामानंद झा ने बताया कि यदि कॉलेजों के द्वारा निर्धारित तिथि के भीतर डाटा अपलोड नहीं किया जाएगा तो विश्वविद्यालय अनुशासनिक कार्रवाई करने को बाध्य होगा। जिन कॉलेजों ने यूजर आई-डी नहीं बनाया है। वे अपना यूजर आईडी बनाकर एआईएसएचई पर डाटा अपलोड करें। उन्होंने बताया कि विगत माह पहले यूजर आईडी बनाने के लिए प्रशासनिक भवन में सभी कॉलेजोें के प्राचार्यों की बैठक आहूत हुई थी। जिसमें यूजर आईडी कैसे बनाया जाए इसके बारे में बताया गया था।

डॉक्ट्रेट की मानद उपाधि पाने वाले शिक्षाकों काे किया गया सम्मानित

आरा | “डॉक्टरेट “ की मानद उपाधि से सम्मानित श्री शम्भू नाथ मिश्र,प्राचार्य,जा- पॉल्स हाई स्कूल एवं श्री वेद प्रकाश सागर,निदेशक, म्यूजिक एंड आर्ट पॉइन्ट के लिए हेल्थ हेवेन हॉस्पिटल चंदवा में सम्मान समारोह का आयोजन किया गया । इस सम्मान समारोह का आयोजन प्रसिद्ध हड्डी रोग विशेषज्ञ कुमार जीतेन्द्र एवं डॉ. वीणा सिंह ने किया । मौके पर डॉ. कुमार जीतेन्द्र ने अपने पिताजी की दी गई सीख को याद दिलाते हुए कहा “यदि जीवन मे सफल होना है तो शिक्षको का सम्मान जरूर करें “। इसी क्रम में समारोह के मुख्य वक्ता प्रो डॉ रणविजय कुमार ने कहा कि शिक्षा और चिकित्सा की व्यवस्था जहा दुरुस्त होती है वहां के विकास की गति को कोई नहीं रोक सकता। मौक ेपर जाॅन पॉल्स हाई स्कूल की निदेशिका डॉ मधु सिन्हा भी मौजूद थी।

मानव संसाधन विकास मंत्रालय की देखरेख में काम करता है एआईएसएचई, कॉलेजों को देने होते हैं ब्योरे

मानव संसाधन विकास मंत्रालय, नई दिल्ली की देखरेख में एआईएसएचई कार्य करता है। इसमें कॉलेजों के इंफ्रास्कट्रचर, लैब, पुस्तकालय, स्थाई शिक्षक व शिक्षकेत्तर कर्मचारी की संख्या, अस्थाई कर्मियों की संख्या, विद्यार्थियों की संख्या, कैम्पस का क्षेत्रफल, क्लास रूम, शौचालय, बच्चों के लिए खेलने का मैदान का क्षेत्रफल, कॉलेजों मेें किन-किन विषयों की पढ़ाई हो रही है एवं कॉलेज का संबंधन है कि नहीं इन सभी जानकारियों को पोर्टल पर अपलोड करना होता है। ऐसा करने वाले कॉलेजों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है। इस बार पोर्टल डाटा अपलोड करनेवालों के खिलाफ भी सख्ती की तैयारी की जा रही है।


नैक की मान्यता पाने की दृष्टि से है बहुत महत्वपूर्ण

एआईएसएचई के आधार पर ही कॉलेजों को नैक से मान्यता मिलती है। नैक की दृष्टिकोण से यह काफी महत्वपूर्ण है। एआईएसएचई से मान्यता नहीं रहने पर रूसा एवं यूजीसी सहित अन्य संस्थाओं से मिलने वाला अनुदान पर प्रभाव पड़ता है। गौरतलब हो कि विश्वविद्यालय अंतर्गत नौ कॉलेज ही अब तक नैक से मूल्यांकन करा पाएं है। मूल्यांकन कराने के लिए राजभवन ने आदेश जारी किया है।

वीकेएसयू भवन।

पोर्टल में डाटा देने के लिए सख्त निर्देश जारी | पोर्टल पर डाटा अपलोड करने के लिए सख्त हिदायत भी दिया गया था। सीसीडीसी डॉ हीरा प्रसाद सिंह ने बताया कि एआईएसएचई के आधार पर ही कॉलेजों को नैक से मान्यता मिलती है। नैक के मूल्यांकन में एआईएसएचई का रौल काफी अहम होता है। एआईएसएचई से मान्यता नहीं रहने पर रूसा एवं यूजीसी (यूनिवर्सिटी ग्रांड कमीशन) सहित अन्य संस्थाओं से मिलने वाला अनुदान पर प्रभाव पड़ता है।


इन कॉलेजों ने डाटा अपलोड करने में नहीं दिखायी रुचि

वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय अंतर्गत दो अंगीभूत कॉलेज ने डाटा अपलोड नहीं किया है। इनमें एचडी जैन कॉलेज आरा एवं एसपी जैन कॉलेज सासाराम शामिल है। बीएड कॉलेज में मांता मंझारो अजय दयाल सिंह, टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज, अपसम कॉलेज ऑफ एजुकेशन, धरीक्षण सिंह टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज, बीएड कॉलेज ऑफ परसथुआ, मातृप्रेम कॉलेज ऑफ एजुकेशन चिलहरी बक्सर एवं जीडी मिश्रा इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन कॉलेज शामिल है। इधर, 35 संबद्ध कॉलेज ने डाटा अपलोड करने में रूचि नहीें दिखाया है। इनमें टीएसआई महिला कॉलेज, अल-हफीज कॉलेज, केके मंडल कॉलेज जगदीशपुर, सांता बराहना महिला कॉलेज जगदीशपुर, बीएसएस कॉलेज बचरी पीरो, एमजी कॉलेज लहाराबाद एवं जन सहकारी कॉलेज गड़हनी बराप सहित अन्य संबद्ध कॉलेजों ने डाटा अपलोड नहीं किया गया है।

कुलसचिव बोले- समय पर डाटा अपलोड नहीं किया गया तो कॉलेजों पर होगी अनुशासनात्मक कार्रवाई
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