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‘काेरोना’का डर: लोगों ने शाकाहार अपनाया, पोल्ट्री व्यवसाय के ~20 करोड़ डूबे

एक वर्ष पहले
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कोरोना वायरस के डर से इन दिनों अधिकांश लोग मांसाहार करना बंद कर दिए हैं। होली में आमतौर पर मुर्गा-मांस की अधिक डिमांड रहती है। लेकिन कोरोना के डर से होली में भी मांसाहार पर आफत हो गया है। लोगों में कोरोना का खौफ ऐसा कि अधिकांश लोग मांस-मुर्गा खाना छोड़ चुके हैं। इससे भोजपुर जिले में पोल्ट्री व्यवसाय को महज एक महीने में ही 20 करोड़ रुपए से अधिक पूंजी डूब चुकी है। जिले में पॉल्ट्री फार्म की अनुमानित संख्या 450 से 500 तक है। लगातार जमा पूंजी डूबने से धड़ाधड़ पॉल्ट्री फॉर्म बंद होते जा रहे हैं। कई पॉल्ट्री-फार्म संचालकों के पास खुदरा दुकानदार नहीं आ रहे हैं। जिससे वे लागत से कम कीमत में खुदरा दुकानदारों को बेच रहे हैं। यहां तक कि चूजे खरीदने की कीमत तक। रेट गिरने के बाद भी पॉल्ट्री से खुदरा दुकानदार भी मुर्गा नहीं खरीद रहे, क्योंकि बाजार में उन्हें खरीदार नहीं मिल रहे हैं। हालत यह है कि सामान्य दिनों में मंडी के रोजाना के रेट के अनुसार 80 से102 किलो थोक मूल्य से पोल्ट्री फार्म में बिकने वाला मुर्गा कोरोना के बाद 13 से ₹40 प्रति किलो की दर से बिक रहा है।

वर्करों की मजदूरी व गाड़ी का किस्त चुकाने पर आफत: व्यवसायी संजय

पीरो प्रखंड के अगियांव बाजार में रौनक पोल्ट्री फॉर्म के संचालक हैं संजय कुमार सिंह। बताया कि सामान्य दिनों में 80 से 100 रुपया किलो तक खुदरा दुकानदारों को बेचता था। अन्य मंडी की तरह रोज मुर्गा का भी रेट खुलता है जब जैसा रेट-तब पैसा कीमत। कोरोना के बाद से थोक में ₹ 35-40 प्रति किलो बेचना पड़ रहा है। प्रतिदिन 20 क्विंटल बेचता था, अब सवा क्विंटल ही भेज पा रहा हूं। एक महीना से मेरे ऊपर छह वर्कर का ₹85 हजार और 3 गाड़ियों का किस्त कर्ज़ हो गया है।

कोरोना से संक्रमित कोई मुर्गा यहां
नहीं: पॉल्ट्री व्यवसायी राजेश


तरारी प्रखंड के राजेश कुमार राज पोल्ट्री व्यवसाई हैं। बताया कि कोरोना वायरस के डर से कई पोल्ट्री फॉर्म बंद गए। कुछ बंद होने के कगार पर हैं। समाज में गलत अफवाह फैलाया जा रहा है कि मुर्गा खाने से कोरोना वायरस हो रहा है। जबकि, समाचार पत्रों और न्यूज चैनलों पर हम देखते हैं कि 40 डिग्री तापमान पर कोरोना वायरस खत्म हो जाता है। अपने यहां100 डिग्री सेल्सियस तक पकाया जाता है। हमारे यहां कोरोना वायरस से संक्रमित कोई मुर्गा नहीं पाया गया है।

60 रुपए किलो बिक रहा चिकन

खुदरा में सामान्य दिनों में 140 से 150 किलो बिकने वाला मुर्गे का मांस 60 से 100 किलो तक बिक रहा है। हर वर्ष होली में मुर्गा की बड़ी खपत होती है, पर इस बार गिनती के खरीदार। अधिकांश दुकानों पर सन्नाटा पसरा है। पॉल्ट्री व्यवसाय में लगातार डूब रहे पूंजी का आंकड़ा काफी भयावह है। जिले के एक बड़े पॉल्ट्री व्यवसाय ने बाजार का हाल पूछने पर कहा; क्या बताएं सर, हर दिन तीन गाड़ी 20 क्विंटल मुर्गा सप्लाई करता था। अब सिर्फ 1 क्विंटल 30 किलो िबक रहा है।

स्टेशन रोड में मुर्गा की दुकानों पर पसरा सन्नाटा।
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