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न उद्योग, न रोजगार, चौपट खेती, युवाओं का पलायन फिर भी भोजपुरिया लोग लिख रहे विकास की दास्तां

Ara News - अपना भोजपुर जिला 10 नवंबर 2019 को 47 साल का हो गया। इसके पहले सन् 1529 में बाबर ने अफगानों पर विजय के बाद इसका नामकरण शाहाबाद...

Bhaskar News Network

Nov 11, 2019, 06:15 AM IST
Ara News - neither industry nor employment flat farming migration of youth yet bhojpuriya people are writing the story of development
अपना भोजपुर जिला 10 नवंबर 2019 को 47 साल का हो गया। इसके पहले सन् 1529 में बाबर ने अफगानों पर विजय के बाद इसका नामकरण शाहाबाद किया था। अंग्रेजों के शासन काल में भी इसका नाम शाहाबाद रहा। शाहाबाद गजेटियर में इसका उल्लेख है। देश की आजादी के बाद भी 1972 के पहले यह मूल शाहाबाद जिला था। 1972 में शाहाबाद का बंटवारा हुआ। भोजपुर और रोहतास दो जिला बने। इसके साथ भोजपुर जिला का उदय हुआ। हालांकि, 1992 में फिर इसका विभाजन कर बक्सर जिला बनाया गया। फिलहाल, भोजपुर जिला में तीन अनुमंडल आरा सदर, जगदीशपुर व पीरो है। पांच नगर पंचायत में कोईलवर, शाहपुर, बिहिया, जगदीशपुर व पीरो है। कुल 14 प्रखंडों में आरा सदर, तरारी, चरपोखरी, सहार, अगिआंव, गड़हनी, उदवंतनगर, बड़हरा, गड़हनी, संदेश, बिहिया, कोईलवर, जगदीशपुर, पीरो है। इस जिले की प्रमुख नदियों में गंगा, सोन, गांगी, बनास, कुम्हरी है। समय के बदलते कालखंड में यहां के प्रखंड नक्सल हिंसा, निजी सेना की खूनी करतूतें, बाढ़-सुखाड़ का दंश झेलते रहे हैं। सरकारी सिस्टम में खामियों के कारण अधिकांश प्रखंडों धरातल पर कम कागज पर विकास दौड़ रहा है। रोजगार व उद्योगहीन के कारण गांजा व शराब तस्करी के दलदल में युवा वर्ग फंस जाता है। गंवई इलाकों में अधिकारियों, बिचौलियों व दबंगों का सिंडिकेट समय-समय पर उजागर होता रहा है। हालांकि, तमाम विपरीत परिस्थितियों के बाद भी भोजपुरियों ने अपनी प्रतिभा, जीवटता और परिश्रम से राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाया है।

तरारी| जिला बनने से पहले तरारी था प्रखंड, उग्रवाद-मुक्त हुआ, पर अपराध बढ़े

भोजपुर जिले का स्थापना होने से पहले तरारी ब्लॉक कार्यालय का स्थापना हो चुका था। जो किराये के मकान में चलता था। जिला स्थापना के बाद प्रखंड सह अंचल कार्यालय का सरकारी भवन बना। प्रखंड अंतर्गत उग्रवादी गतिविधियों में तेजी आयी। पहले केवल तरारी थाना था। बाद में ईमादपुर तथा सिकरहटा में थाना बना। गांवों में बिजली पहुंची है, गांवों को सड़कों से जोड़ा गया। नक्सल प्रभावित क्षेत्र होने के बाद 2018 में नक्सल मुक्त क्षेत्र भी घोषित हुआ। हालांकि, अपराध बढ़ा है। जो इस क्षेत्र की सबसे बड़ी कमजोरी बनकर सामने आई है। जिस पर अब काबू करने के लिए नई योजनाएं बनाई जा रही है।

वीरकुंवर सिंह की गौरवमयी नगरी

जिस प्रखंड में 12 देशभक्त देश की आजादी के लिए अंग्रेजों की गोलियों से शहीद हुए, अब वहां विकास की रफ्तार मंद है। कभी उग्रवाद प्रभावित रहा यह क्षेत्र कई दशकों से विकास से कोसों दूर है। जिले का सबसे बड़ा पुलिस का अगिआंव सर्किल ऑफिस पुराने एवं जर्जर भवन में है। लसाढ़ी में हर वर्ष 15 सितम्बर को शहीदों के राजकीय सम्मान समारोह मनाया जाता है। वहां सड़क जर्जर है। सिंचाई, शिक्षा, सड़कें, स्वास्थ्य, आंगनबाड़ी व्यवस्था बेहाल है। भवन के अभाव में बरामदे में प्रसूतियों का इलाज किया जाता है, वह भी बिना महिला डॉक्टर के। प्रखण्ड में पशु अस्पताल किराए के भवन में चलता है। तीन प्रखंडों का चबन्दी कार्यालय भाड़े के मकान में है।

खाे-खो प्रतियोगिता

खो-खो बालिका के विजेता

खो-खो बालिका के विजेता

नेमिचंद कन्या उच्च‍ विद्यालय की छात्राएं मणि, शालिनी, स्वास्तिक, स्मृति, रुपाली, जुली, निक्की, मुस्कान, शालिया, ऐमन व प्रगति। उपविजेता भोजपुर खो-खो संघ की खिलाड़ी।

नेमिचंद कन्या उच्च‍ विद्यालय की छात्राएं मणि, शालिनी, स्वास्तिक, स्मृति, रुपाली, जुली, निक्की, मुस्कान, शालिया, ऐमन व प्रगति। उपविजेता भोजपुर खो-खो संघ की खिलाड़ी।

कभी उग्रवाद प्रभावित रहा यह क्षेत्र कई दशकों से विकास से कोसों दूर, रोजगार व उद्योगविहीन के कारण गांजा व शराब तस्करी में युवा वर्ग फंसे

खो-खो बालक के विजेता

विनय, दीपक, सुमित, रोहित, किशन, रविन्द्र, गौरव, सुजीत, राहुल, सुजीत, शशिकांत व मुकेश।

खो-खो बालक के विजेता

विनय, दीपक, सुमित, रोहित, किशन, रविन्द्र, गौरव, सुजीत, राहुल, सुजीत, शशिकांत व मुकेश।

कोईलवर: फोरलेन, स्टेट हाइवे व नया पुल बनने से तरक्की

जिला बनने के बाद सोन नद को ध्यान में रखते हुए पटना व भोजपुर जिला को बॉर्डर लाइन बना। स्थापना के बाद कोईलवर प्रखण्ड का गठन हुआ था। जिसमे 17 पंचायत बनाये गए। वहीं, 2004 में नगर पंचायत कोईलवर का गठन किया गया। शुरू के वर्षों में प्रखण्ड परिसर में पदाधिकारियों व कर्मियों का क्वार्टर था। अब सब जर्जर हो टूट गए है। वर्ष 2010 में कोईलवर में बिहार के इकलौते मानसिक आरोग्यशाला का खोला गया। यहां सीआरपी 47 वीं वाहिनी का मुख्यालय भी है। पुराने कोईलवर पुल के समांतर सोन नद पर सिक्सलेन बन रहा, यह 1528 मीटर लम्बा होगा। कोईलवर से बिलौटी तक 43.85 किलोमीटर लम्बा फोरलेन सड़क 825 करोड़ रुपये से बन रहा। बिहार का पहला स्टेट हाइवे सकड्डी-नासरीगंज बना। आरा-छपरा फोरलेन हाइवे से उत्तर बिहार का क्षेत्र जुड़ा।

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