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एक हजार में दम नहीं- दस हजार से कम नहीं का नारा लगा रसोईयों ने समाहरणालय घेरा

एक वर्ष पहले
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राष्ट्रीय मध्याह्न भोजन रसोइया फ्रंट के तत्वावधान में संगठन के संस्थापक सह राष्ट्रीय महासचिव रामकृपाल के नेतृत्व में मध्याह्न भोजन योजना के अंतर्गत प्राथमिक व मध्य विद्यालयों में कार्य कर रहे रसोइयों ने कलेक्ट्रेट के समक्ष प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के पूर्व रमना मैदान से जुलूस निकाला गया जो शहर के सांस्कृ़तिक भवन, जजकोठी मोड़, केजी रोड होते हुए कलेक्ट्रेट तक पहुंचा। मौके पर सभी रसोइयों ने अपने-अपने हाथ में छोलनी, कलछुल व खाना बनाने वाले बर्तन ले रखी थी। वही एक-दो हजार में दम नहीं दस हजार से कम नहीं, मानदेय 12 महीने लागू करो सहित कई नारों को रसोईया लगा रही थी। कलेक्ट्रेट पर जैसे ही उनका हुजूम पहुंचा तो कर्मियों ने गेट बंद कर दिया। उसी दौरान काफी संख्या में रही महिला रसोईयों ने गेट को धक्का मारकर खोलने की कोशिश भी की। लेकिन मौके पर तैनात पुलिसकर्मियों ने उन्हें अंदर आने
नहीं दिया। प्रदर्शन के बाद सभा भी हुई। संबोधित करते संगठन के संस्थापक सह राष्ट्रीय महासचिव रामकृपाल ने कहा कि सरकार की गलत नीतियों के कारण एमडीएम योजना में कार्यरत रसोइयों की स्थिति वर्तमान समय में दयनीय हो गई है। बढ़ती हुई मंहगाई में जीवन चलाना मुश्किल हो गया है। विद्यालयों में रसोइयों के साथ बंधुआ मजदूरों जैसा व्यवहार किया जाता है। जिसके वजह से इनकी हालत बद से बदतर हो गई है। संबोधित करते प्रदेश सचिव ओमप्रकाश राय व जिला प्रभारी जीतू कुमार सिंह ने कहा कि भारत के प्रत्येक नागरिक को गरिमा पूर्वक जीने का अधिकार है। काम के बदले उचित मजदूरी का भुगतान करना सरकार की संवैधानिक बाध्यता होनी चाहिए लेकिन सरकार इन रसोइयों के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है। बार-बार मानदेय बढ़ोतरी का आश्वासन देकर धोखा देने का काम कर रही है।

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