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अनीति, अन्याय व अधर्म के मार्ग पर चलने वाले लोगों को उनके कर्मों की सजा जरूर मिलती है
स्थानीय बाजार पर चल रहे साप्ताहिक ज्ञानयज्ञ महोत्सव के अंतिम दिन श्रीलक्ष्मी प्रपन्न जीयर स्वामी जी महाराज ने प्रवचन के दौरान कहा कि अनीति, अन्याय, अधर्म के मार्ग पर चलने वाले लोगों को उनके कर्मों का फल जरूर मिलता है। किसी के प्रति अहित करने की भावना मनुष्य के अंदर नहीं होना चाहिए। ऐसा करने वाले व्यक्ति का धन, संस्कृति, स्वरूप का नाश होता है या जीवन जीते हुए भी मृतक के समान है। साथ ही कहा कि मानवता समाज व राष्ट्र को और भी मजबूत करने का सरल उपाय है। इससे जरूरतमंदों की न सिर्फ जरूरत पुरा होने के साथ ही आपसी प्रेम को भी बढ़ावा मिलता है। उन्होंने कहा कि परिवार व समाज में शांति के लिए मनुष्यता जरूरी है। आज समाज में साधन संसाधन सब कुछ है, लेकिन मनुष्यता नहीं है। इसी वजह मनुष्य जीवन में शांति नहीं है। कृष्ण - उद्धव की बातों पर चर्चा करते हुए कहा कि जब परिवार व समाज व्यक्ति विशेष का उपयोगिता नहीं समझे तो उस परिवार को छोड़ देना ही उत्तम है। आचरण विहीन भगवान श्रीकृष्ण के वंशजों ने जब उनकी बात नहीं सुनी तो उन्होंने उसका त्याग कर दिया। नतीजतन उनके साथ स्वर्णमयी पूरी द्वारिकापुरी का ही विनाश हो गया। वासुदेव - नारद प्रसंग की विवेचन करते हुए कहा कि गृहस्थ आश्रम बंधन का कारण नहीं है और नाहीं नहीं विरक्त मोक्ष का कारक। प|ी बाल बच्चों के साथ रहते हुए भी मोक्ष को प्राप्त किया जा सकता है। बशर्ते उद्देश्य ठीक होना चाहिए। राजा जनक राज काज की व्यवस्थाओं में रहते हुए विदेह कहलाए।
एक धार्मिक कथा के माध्यम से धर्माचरण पर चर्चा करते हुए स्वामी जी ने कहा कि जो स्त्री मर्यादा, संस्कृति, आचरण से भटक गई हो वह नारी विश्वास के पात्र नहीं है। इस स्वार्थी संसार मे रिश्ता सिर्फ ‘’राम’’ से रखिए। उनकी कृपा होने पर ही दुनिया भी आपको समझेगी। संत - महात्मा व देवी - देवताओं की दर्शन पर चर्चा करते हुए कहा कि जिसको सुनने, जानने के बाद अपने अंदर की कुत्सित विचार, बुरे कर्मों का त्याग करने व सत्कर्म पर चलने को संकल्पित होना चाहिए। उन्होंने दत्तात्रेय ने अपना अंतिम गुरु नारायण को बना कर आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का संदेश दिया। जगद्गुरु बैकुंठ नाथ स्वामी महाराज व झारखंड से आए जगद्गुरु चतुर्भुज स्वामी जी ने समाज का भागवत कथा और श्रीराम के चरित्र को पारिवारिक पतन से बचाव व मोक्ष का सुलभ साधन बताया।
प्रवचन सुनते भक्त।