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अनादि काल से त्याग व सहयोग सिखाता है मकर संक्रांति का पर्व: जीयर स्वामी

Ara News - प्रखंड के भदारा गांव में आयोजित 7 दिवसीय श्रीमद्भागवत महापुराण कथा ज्ञानयज्ञ के दूसरे दिन श्रद्धा आस्था व भक्ति...

Jan 16, 2020, 09:15 AM IST
Sandes News - renunciation and cooperation from time immemorial teaches the festival of makar sankranti jair swami
प्रखंड के भदारा गांव में आयोजित 7 दिवसीय श्रीमद्भागवत महापुराण कथा ज्ञानयज्ञ के दूसरे दिन श्रद्धा आस्था व भक्ति का उफान जोरों पर रहा। जीयर स्वामी जी महाराज के नेतृत्व में आयोजित ज्ञानयज्ञ प्रवचन सुनने को लेकर काफी संख्या में श्रद्धालु भक्त पहुंचे। भदारा गांव में ज्ञान यज्ञ के दौरान प्रवचन में श्री जीयर स्वामी जी महाराज ने मकर सक्रांति पर लोगों को संदेश देते हुए कहा कि यह मकर संक्रांति का पर्व अनादि काल से हम सबों को एक सूत्र में बांधने का कार्य करता है। इससे यह शिक्षा मिलती है कि हम सब एकत्र होकर एक दूसरे के साथ जीवन कल्याण के लिए समाज, राष्ट्र के कल्याण के लिए ईश्वर से प्रार्थना करते हैं।

गंगा स्नान करते हैं तिल का स्पर्श करते हैं व दान करते हैं। उसे ग्रहण करते हैं। जिससे मनुष्य सामूहिक रूप से बुरे कर्मों का त्याग कर एक सूत्र में बंधकर एक दूसरे का सहयोग करने का कल्याण करने का कार्य करता है। यह अनादि काल से परंपरा चली आ रही है कि हम सब सभी समाज के लोग एकत्र होकर गंगा का स्नान करते हैं। एक साथ प्रसाद लेकर पूरे जगत की कल्याण की कामना करते हैं। उन्होंने बताया कि जीवन में मर्यादा का विशेष महत्व होता है। किसी भी परिस्थिति में मर्यादा का उल्लंघन नहीं करना चाहिए। मर्यादा ही व्यक्ति, समाज व राष्ट्र की शोभा है।

बिन मर्यादा पुरुष की स्थिति वैसी जैसे बिन पानी नदी, चाहे परिस्थिति कुछ हो

बिना मर्यादा का मनुष्य जानवर से भी गया गुजरा है। जिस प्रकार जल विहीन नदी का कोई अस्तित्व नहीं रह जाता। उसी प्रकार मर्यादा के बिना मनुष्य का भी कोई अस्तित्व नहीं है। जो विषम परिस्थितियों में भी मर्यादा का पालन करते हैं। धर्म का पालन करते हैं माता-पिता का कद्र करते हैं स्त्री का सम्मान करते हैं बुजुर्गों का सम्मान करते हैं उन पर लक्ष्मी नारायण भगवान की कृपा बनी रहती है। और उनका परिवार विकास करता है। कहा कि सबको आपस में प्रेम और सद्भाव के साथ जीवन जीना चाहिए भरत के चरित्र को जीवन में उतारना चाहिए। भाई भरत के चरित्र का पूजा किया जाए और एक भाई से बेईमानी किया जाए यह उचित नहीं है।

त्रेता व द्वापर युग में भाइयों में एक दूसरे के प्रति त्याग था, उसे जीवन में उतारें

उन्होंने मर्यादा के विषय में विस्तृत चर्चा करते हुए कहा कि हर व्यक्ति को मर्यादा के अंतर्गत अपने जीवन को जीना चाहिए। किसी भी परिस्थिति में मर्यादा का उल्लंघन नहीं करना चाहिए। विषम परिस्थिति में भी मर्यादा का पालन करते रहना चाहिए। क्योंकि मर्यादा ही पुरुष की शोभा है। जिस प्रकार त्रेता व द्वापर में एक भाई दूसरे भाई के लिए त्याग की भावना रखते थे। उसको जीवन में उतारना चाहिए। और अपने परिवार के लिए अपने भाई के लिए अपने समाज के लिए मन में त्याग की भावना रखनी चाहिए। स्वामी जी महाराज ने कहा कि एक भाई से बेईमानी कर धन उपार्जन कर कबूतर को दाना खिलाने से कोई फायदा नहीं हो सकता। इसलिए भाई से बेईमानी न करें।

बच्चाें को संस्कारवान बनाकर उन्हें सत्संग जाने व कथा सुनने के लिए प्रेरित करें

सत्संग व कथा के माध्यम से मनुष्य भगवान की शरण में पहुंचता है। वरना वह इस संसार में आकर मोहमाया के चक्कर में पड़ जाता है। इसीलिए मनुष्य को समय निकालकर श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करना चाहिए। बच्चाें को संस्कारवान बनाकर सत्संग कथा के लिए प्रेरित करें। भगवान श्रीकृष्ण की रासलीला के दर्शन करने के लिए भगवान शिवजी को गोपी का रूप धारण करना पड़ा। मौके पर जगतगुरु बद्रीनाथ बनमाली जी महाराज काशी प्रमुख प्रतिनिधि मनीष कुमार सिंह उर्फ बंटू प्रमोद दुबे ताराकांत दुबे उपेंद्र सिंह, दीपक सिंह, गिरजा नन्दन सिंह, बसंत पाण्डेय, प्रदीप पाण्डेय, महेन्द्र पाण्डेय, प्रणव पाण्डेय, धीरेंद्र पाण्डेय, रामनारायण पाण्डेय, विद्यार्थी पाण्डेय, त्रिलोकी नाथ पाण्डेय, नितेष पाण्डेय अादि माैजूद थे।

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