जहां भक्त व भक्ति है वहीं भगवान का निवास होता है
स्थानीय बाजार पर आयोजित साप्ताहिक ज्ञान यज्ञ महोत्सव में महान संत श्री जीयर स्वामी जी ने कहा कि जहां भक्त व भक्ति है वही भगवान का निवास होता है। प्रत्येक मनुष्य का लक्ष्य निर्धारित होना चाहिए। लक्ष्य विहीन मनुष्य पशु के समान होता है। आदर - स्नेह, सम्बन्ध व प्रेम पर ही समाज व राष्ट्र टीका होता है। परंतु किसी व्यक्ति या वस्तु से अधिक प्रेम या काफी हद तक का लगाव होना मौत का कारण बन सकता है। इसलिए प्रत्येक लोगों के बीच समान स्थिति बनाए रखना ही अच्छा होगा। उन्होंने दत्तात्रेय व राजा यदु की बातों पर चर्चा करते हुए कहा कि दत्तात्रेय ने आचरण के मुताबिक पृथ्वी , आकाश, हवा व अग्नि के एक अलावे कबूतर,साप सहित 24 गुरु बना कर मानवों को सफल जीवन जीने की सीख लेने का संदेश दिया है। एक धार्मिक कथा के माध्यम से लोगों को अतिशय प्रेम से बचने की सलाह दी। कहा कि सामान्य अवस्था मे किसी के प्रति अतिशय प्रेम कभी- कभी प्रेम करने वाले की मृत्यु का कारक बन जाता है । इस लिए भक्ति में भी संबंध , सौहार्द व समरसता होनी चाहिए । स्वामी जी ने अन्य प्रसंग की चर्चा करते हुए कहा कि माताएं अपनी संस्कृति, गरिमा, आचरण, शीलता से भटक जाएं तो उस परिवार का विनाश तय है । कहा कि मां- अपमान पूर्व के हमारे ही कर्मों का फल होता है । बुजुर्ग व महापुरुषों को चाहिए कि पारिवारिक मान- सम्मान का ख्याल त्याग कर बच्चों की भांति एक समान जीवन जीने का प्रयास करें।
जिनमें सभी गुण मौजूद हों वही धन्यवाद के पात्र होते हैं
गोटपा गांव में आधे घंटे की अपने प्रवचन में स्वामी जी ने कहा कि सर्व गुण संपन्न व्यक्ति अर्थात जिस व्यक्ति में सभी गुण मौजूद हो वही धन्यवाद केे पात्र होते हैं । कलियुग भी इस लिए धन्यवाद का पात्र है कि इस युग मे कोई भी पुण्य अथवा अच्छा कार्य करने की चाहत रखने मात्र से भी उसका फल प्राप्त हो जाता है । ऐसी व्यवस्था सतयुग, द्वापर व त्रेता में नहीं था । इस युग मे कुछेक पल भगवान में ध्यान लगा देने से उन युगों में 10 हजार से एक लाख वर्ष तक किए गए तपस्या का फल हासिल हो सकता है । उन्होंने कहा कि धर्म प|ी होने के नाते भारतीय नारी अपने पति द्वारा किए गए सिर्फ धर्म कार्यों में आधे फल की हिस्सेदार होगी । प्रवचन सुनने वालों में पूर्व सरपंच जगदीश सिंह, राजेश्वर सिंह, पूर्व सैनिक अशोक सिंह , जनार्दन पाण्डेय, पप्पू उपाध्याय, शशी शेखर सिंह, नरेंद्र सिंह, सत्येंद्र सिंह थे।
मनुष्य को मर्यादित होना चाहिए: जीयर स्वामी
संझौली| प्रखण्ड के सुसाड़ी गांव के ठाकुरबाड़ी में भारत के महान संत श्री लक्ष्मी प्रपन्न जीयर स्वामी जी महाराज ने अपने प्रवचन के दौरान कहा कि मनुष्य को मर्यादित होना चाहिए। मनुष्य को जो चीजें या व्यवहार खुद के लिए सहन नहीं होता। ऐसी व्यवहार दूसरों के साथ नहीं करनी चाहिए। शिक्षा के साथ साथ संस्कार की भी जरूरत होती है। ऐश्वर्य तभी संभव और टिकाऊ है जब संस्कार सहित शिक्षा की प्राप्ति की जाती है। मनुष्य को शाकाहारी भोजन करना चाहिए।