226 किमी लंबी अररिया-गलगलिया एनएच-327 ई सड़क का चौड़ीकरण शुरू

Araria News - एनएच-327 ई सहरसा के बरियाही से सुपौल-त्रिवेणीगंज-जदिया-अररिया-गलगलिया तक करीब 226 किलोमीटर लंबी सड़क की चौड़ाई बढ़ाई जा...

Bhaskar News Network

Sep 14, 2019, 08:10 AM IST
Jokihat News - 226 km long araria galgalia nh 327e road widening started
एनएच-327 ई सहरसा के बरियाही से सुपौल-त्रिवेणीगंज-जदिया-अररिया-गलगलिया तक करीब 226 किलोमीटर लंबी सड़क की चौड़ाई बढ़ाई जा रही है। एनएच के अधिकांश जगहों पर 10 मीटर चौड़ीकरण हुआ है।

रानीगंज से जदिया तक इसकी चौड़ाई बढ़ाई गई है। गलगलिया से करीब 140 किमी सुपौल भाग में सड़क की चौड़ाई अधिकांश जगहों पर 10 मीटर की गई है। जहां 7 मीटर चौड़ाई है, उसे भविष्य में बढ़ाया जाएगा। इस मार्ग में तीन जगहों पर आरओबी का निर्माण हो रहा है। अररिया के पास बनने वाले आरओबी का काम लगभग 80 प्रतिशत पूरा हो गया है। सुपौल शहर में बनने वाले आरओबी का निर्माण शीघ्र शुरू होने वाला है। बरियाही से सुपौल-पिपरा-त्रिवेणीगंज-रानीगंज-अररिया-जोकीहाट-बहादुरगंज-ठाकुरगंज-गलगलिया के बीच बन रहे तीन आरओबी के बनने में 2 वर्ष लग सकता है। राज्य सरकार ने सुपौल प्रभाग में इस मार्ग के लिए लगभग 49 करोड़ राशि की स्वीकृति दी है। सुपौल से सहरसा बरियाही तक साईं कन्स्ट्रक्शन को काम दिया गया है। रफ्तार धीमी है। इस मार्ग में दूसरी कई एजेंसी काम कर रही है। इनमें आरओबी निर्माण का कार्य गुवहाटी के एजेंसी भरतिया करा रहा है वहीं कटिहार के टॉप लाईन एजेंसी सड़क निर्माण में लगी है।

खुशखबरी : एनएच-57 और एनएच-31 के बीच से निकली एनएच -327 ई, भारत, नेपाल और बंगाल सीमा को जोड़ेगी, सुपौल-बरियाही के बीच धीमी गति से चल रहा काम

छह दशक बाद मिला एनएच का दर्जा

हालांकि 6 दशक बाद केन्द्र सरकार ने इस सड़क को नया एनएच 327 ई का नाम दिया और यह भारत-नेपाल सीमा से गुजरने वाली फोर लेन एनएच -57 सड़क के समानांतर विकसित करने की योजना को मंजूरी दी गई। इस सड़क को एनएच के रूप में विकसित करने की योजना की स्वीकृति दिलाने में सूबे के उर्जा मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव का महत्वपूर्ण योगदान माना जा रहा है। हालांकि पूरी परियोजना के लिए एक मुश्त राशि नहीं मिल पाई, लेकिन खंड-खंड में दी गई राशि से इसका निर्माण तेजी से किया जा रहा है।

सहरसा से गुजरने वाली एनएच 327ई सड़क

देश की सीमावर्ती पर बसा है गलगलिया सुरक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण

बिहार के अंतिम सीमा पर अवस्थित गलगलिया चाइना वार के समय एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय जगह के रूप में चर्चित हुआ था। गलगलिया से सटा एक एक सीमा नेपाल से लगा है तो दूसरा पश्चिम बंगाल से सटा है। पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग जाने का एक रास्ता सिलीगुड़ी से पहले गलगलिया होकर भी है। आने वाले समय में बिहार का यह छोटा सा भूभाग रेल और सड़क के मामले में और विकसित होगा। गलगलिया से सुपौल नई रेल लाइन की भी स्वीकृति रेल मंत्रालय से मिल गयी है। नयी रेल लाइन के लिए जमीन अधिग्रहण का काम भी तेजी से हो रहा है। इस नयी रेल परियोजना की स्वीकृति दिलाने में भी ऊर्जा मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

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