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हड़ताल को ले फूटा अभिभावकों का गुस्सा कहा-अब खोलिए स्कूल नहीं तो होगा बवाल

एक वर्ष पहले
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गोड़ियारे स्कूल पहुंच कर अभिभावकों ने बच्चों के भविष्य को ले जताई चिंता

22 दिन से चल रहे नियोजित शिक्षकों के हड़ताल से फारबिसगंज के 249 विद्यालयों के करीब 75 लाख छात्र-छात्राओं का भविष्य अधर में लटक गया है। जिससे छात्र परेशान हैं और अभिभावकों में नाराजगी देखी जा रही है। हड़ताल के कारण अपने बच्चों का भविष्य बर्बाद होते देख गुरुवार को एक दर्जन से अभिभावक गोड़ियारे स्कूल पहुंचे। जहां अभिभावकों ने अपने गुस्से का इजहार किया। इस दौरान अभिभावकों ने कहा कि अब हड़ताल नहीं चलेगा। स्कूल खोलिए नहीं तो बवाल होगा। हालांकि प्रधानाध्यापक दामोदर यादव ने हड़ताल की मजबूरी बता कर लोगों को शांत करा दिया। मौके पर गोड़ियारे स्कूल पहुंची अभिभावक ने कहा कि सरकार और नियोजित शिक्षक के मांग के बीच बच्चों के भविष्य पर ग्रहण लग रहा है। हमारी इतनी हैसियत नहीं है कि हम अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में पढ़ा सकें। नतीजतन हमारे बच्चे व्यवस्था की मार झेल रहे हैं। अभिभावक सरिता देवी ने कहा कि नियमित शिक्षकों की हाजिरी बनने का कोरम पूरा हो रहा है। नियोजित शिक्षक हड़ताल पर हैं। अब हम गरीब को हड़ताल से क्या मतलब। ऐसी परिस्थिति में कैसे बच्चों का भविष्य बनेगा। वहीं कमला देवी ने कहा कि सरकार व नियोजित शिक्षकों को हड़ताल से क्या नुकसान है। नुकसान तो हम गरीबों का है। सुनीता देवी ने कहा कि नियोजित शिक्षक अपनी मांग को लेकर हड़ताल पर हैं तो सरकार भी मूकदर्शक बनी है।

गिल्ली-डंडा खेलते तो कहीं झूला झूलते मिले बच्चे

इधर, भास्कर की पड़ताल में कई स्कूल खुले तो जरूर मिले। लेकिन शिक्षकों की अनुपस्थिति के कारण कोई गिल्ली-ठंडा खेलते तो कोई रेलिंग पर चढ़ कर झूला झूलते नजर आया। जहां अभिभावक नियोजित शिक्षकों एवं सरकार के रवैए को लेकर खासे आक्रोशित हैं। दरअसल नियोजित शिक्षकों के हड़ताल के कारण प्रखंड के अधिकांश विद्यालय 22 दिनों से बंद हैं। नियमित शिक्षकों द्वारा कुछ विद्यालय खोला जरूर जाता है, लेकिन यहां भी पढ़ाई नहीं होती है। इधर, नियोजित शिक्षकों के हड़ताल के बावजूद इक्के-दुक्के स्कूल खुले मिले। लेकिन शिक्षक नजर नहीं आए। वे केवल बीआरसी में अपना योगदान देकर अपनी ड्यूटी बजा रहे हैं।

विद्यालय में खेल-कूद करते बच्चे।
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