सरकारी कॉम्प्लेक्स की 53 में से 15 दुकानों पर तीसरे का कब्जा, अब वसूली में जुटा प्रशासन

Araria News - कलेक्ट्रेट परिसर के ठीक पूर्व दिशा में बने सुभाष मार्केट 53 दुकानों में से 15 पर बहारी लोगों का कब्जा है। 1996 और 1997 के...

Nov 13, 2019, 06:26 AM IST
Araria News - fifty out of 53 shops of government complex occupied by third now administration in recovery
कलेक्ट्रेट परिसर के ठीक पूर्व दिशा में बने सुभाष मार्केट 53 दुकानों में से 15 पर बहारी लोगों का कब्जा है। 1996 और 1997 के दौरान फुटपाथी दुकानदारों को व्यापन करने के लिए ये दुकान आवंटित किए गए थे। इनमें से कुछ दुकानों का आवंटन 1998 में भी हुआ। उस वक्त डीएम के निर्देश पर जिन दुकानदारों के दुकान का एग्रीमेंट कराया गया, उसमें से कई एग्रीमेंट-धारी स्वर्ग सिधार चुके हैं। लेकिन इस 53 दुकान वाले कॉम्प्लेक्स में 15 से अधिक दुकानों में मूल दुकानदार अब नहीं हैं। एग्रीमेंट धारी के रिश्तेदार भी इन दुकानों में कारोबार नहीं कर रहे हैं। बताया जाता है कि वर्तमान में 15 से अधिक दुकानों में कोई तीसरा आदमी दुकान कर रहा है।

मूल दुकानदार अपने रहते ही या फिर उनके रिश्तेदार ने प्लॉट को निजी समझकर एफिडेविट कर बेच दिया है। जो कि नियम के विपरीत है। यही नहीं प्रशासन ने भी इस मार्केट की कभी जांच नहीं कराई और किराया मद की राशि वसूल करने में भी ध्यान नहीं दिया। मिली जानकारी के अनुसार लगभग 10-11 साल से किराया मद की राशि वसूल नहीं की गई। सूत्रों की मानें तो किराया मद में इन दुकानदारों पर 35 लाख से अधिक का बकाया है। ताज्जुब की बात तो यह है कि तत्कालीन डीएम चितरंजन सिंह के कार्यकाल में वह बैंक खाता को भी क्लोज करा दिया गया, जिसमें दुकानदार खुद भाड़ा की राशि जमा किया करते थे।

सुभाष मार्केट का दुकान।

आरटीआई आवेदन मिलने के बाद जागा जिला प्रशासन

सुभाष मार्केट को लेकर जिला नजारत कार्यालय में लगातार दो सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत आवेदन प्राप्त हुए। चातर निवासी आशीष भारद्वाज और अररिया शहर के अमित कुमार नामक व्यक्ति ने आरटीआई के तहत दुकान से संबंधित जानकारियां मांगी। आरटीआई के तहत जब आवेदन जमा हुआ तो जिला प्रशासन की नींद खुली और संचिका टेबल दर टेबल दौड़ना शुरू हो गया। आरटीआई के तहत जो जवाब जिला प्रशासन के द्वारा दिया गया। उसके अनुसार दुकान का मासिक किराया अभी के हिसाब से बहुत ही न्यूनतम है। जिला प्रशासन ने कभी भाड़ा बढ़ाने को लेकर सकारात्मक पहल भी नहीं किया।

चार साइज की दुकान अलग-अलग किराया

1996, 1997 और 1998 में 53 दुकानदारों को दुकान आवंटित किया गया। 53 दुकान वाले मार्केट में 4 साइज की दुकानें हैं। 4 साइज की दुकानों का भाड़ा भी अलग-अलग है। जानकारी के अनुसार 10 बाय 12 साइज वाले दुकान का 360 रु, 12 बाय 20 का 720 रु, आठ बाय 10 का 240 रुपया मासिक और 10 बाय 10 साइज वाले का 300 रुपया मासिक किराया एग्रीमेंट के समय तय किया गया। तब से लेकर अबतक भाड़ा में वृद्धि नहीं किया गया।

नोटिस जारी होते ही मचा हड़कंप कब्जाधारियों से मांगा बिजली बिल

आरटीआई आवेदन दिए जाने के बाद जिला प्रशासन की नींद टूटी। डीएम की सहमति के बाद जिला नजारत उप समाहर्ता मुकेश कुमार मुकुल ने सभी 53 एग्रीमेंट धारी दुकानदारों को नोटिस जारी किया। इस नोटिस के जारी होते ही दुकानदारों में हड़कंप मच गया। दरअसल, नोटिस के माध्यम से सर्वप्रथम बकाया राशि जमा करने के साथ-साथ बिजली बिल भी मांगा गया है। मुकेश कुमार मुकुल ने बताया बिजली बिल लेने के पीछे प्रशासन की मंशा यह है कि इससे साबित हो जाएगा कि वर्तमान में दुकान पर किसका कब्जा है। जिला नजारत कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार नोटिस में दिए गए प्रशासनिक चेतावनी को दुकानदारों ने भी गंभीरता से लिया और येन केन प्रकारेण बकाया भाड़ा मद की राशि जमा करने वाले दुकानदारों की भीड़ लग गई। मिली जानकारी के अनुसार अबतक लगभग 12 लाख रुपए जमा हो गए हैं।

नजारत प्रशाखा में राशि जमा करने वाले दुकानदारों की भीड़।

मूल एग्रीमेंट वाले,उनके वंशज रहेंगे, शेष को हटाया जाएगा

बताया जाता है कि डीएम बैद्यनाथ इस मामले को लेकर बहुत ही सख्त हैं। उन्होंने मामले के लिए जांच कमेटी का भी गठन कर दिया है। कमेटी का गठन अपर समाहर्ता की अध्यक्षता में हुआ। जांच टीम वीडियोग्राफर के साथ हर 53 दुकानों की जांच करेगी और वर्तमान में दुकान पर कब्जाधारियों से पूछताछ और वीडियोग्राफी कर जांच रिपोर्ट देगी। सूत्रों की मानें तो मूल एग्रीमेंट धारी दुकानदार जो वर्तमान में दुकान कर रहे हैं। उन्हें कोई दिक्कत नहीं होगी। वहीं जो एग्रीमेंट धारी की मृत्यु हो गई है और उनके पुत्र या पुत्री दुकान कर रहे हैं, तो प्रशासन उन्हें एग्रीमेंट करने पर विचार कर सकती है। लेकिन इसके अलावा अगर कोई एग्रीमेंट-धारी किसी को बेच दिए हैं और कोई दूसरा या तीसरा व्यक्ति दुकान पर कब्जा जमा कर काम कर रहा है तो उन्हें प्रशासन सख्ती से हटाएगा।

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