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मिनी पाॅल्ट्री खोलने के लिए 1133 एससी लाभुकों काे मात्र 10 रुपए में मिलेगा चूजा

एक वर्ष पहले
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मेहनत मजदूरी कर बड़ी कठिनाई से अपना और अपने परिवार की आजीविका चलाने वाले एससी-एसटी वर्ग के लोगों का जीवन स्तर उंचा करने की दिशा में सरकार ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। ऐसे लोगों को बहुत ही कम लागत में मिनी फार्म बनाकर मुर्गीपालन के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। पॉल्ट्री डेवलपमेंट योजना के तहत मिनी मुर्गा फार्म के लिए 1100 एससी लाभुकों को चूजे दिए जाने हैं। पूरे जिलेभर में 51 हजार चूजों को एससी-एसटी वर्ग के लाभुकों को दिया जाएगा। ताकि एससी वर्ग के लोग रोजगार कर अपनी आजीविका को दुरुस्त कर सकें।

10 रुपए प्रति चूजा लाभुकों को कराया जाएगा उपलब्ध

पशुपालन विभाग जिले के अनुसूचित जाति के बीपीएल धारी लोगों कों आर्थिक रूप से सबल बनाने के लिए मुर्गीपालन के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। पॉल्ट्री डेवलपमेंट योजना के तहत मिनी मुर्गी फार्म के लिए 1100 लाभुकों को चूजे दिए जाएंगे। इसके लिए सभी प्रखंड पशुपालन पदाधिकारी को अपने-अपने प्रखंड से सूची तैयार कर जिला को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है। इस योजना के तहत प्रत्येक लाभुकों को 10 रुपए प्रति चूजा दिया जाएगा। योजना के तहत एक लाभुक को अधिकतम 45 चूजा दिया जाएगा। ताकि वह मुर्गी पालन कर धीरे-धीरे अपने व्यवसाय को बढ़ा सकें। सहायक कुकुट पदाधिकारी डॉ. कुमुद ने बतायी कि आम तौर पर एससी वर्ग के लोगों को सबसे ज्यादा जमीन और पैसे की समस्या होती है। चाहकर भी ये व्यवसाय नहीं कर पाते हैं। ऐसे लोगों को लाभान्वित करने के लिए विभाग द्वारा इस योजना का लाभ दिया जाएगा। बताया कि यदि किसान इसको व्यवसाय का रूप भी देना चाहें तो 10 हजार रुपए की लागत से छोटे से बांस का फार्म बनाकर अंडा का उत्पादन भी किया जा सकता है।

गरीबों के उत्थान के लिए कृत संकल्पित है विभाग

जिला पशुपालन पदाधिकारी ने कहा कि पशुपालन विभाग गरीबों के उत्थान के लिए कृत संकल्पित है। जिसके कारण विभाग द्वारा विभिन्न योजनाएं लाकर गरीबों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। इसी का एक उदाहरण एससी लाभुकों को 10 रुपए प्रति चूजा देना है। ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इस योजना का लाभ लें और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें। उन्होंने कहा कि योजना का प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। युवाओं व बेरोजगारों को कई तरह के कार्यक्रम के माध्यम से जागरूक किया जा रहा है।

रुपए प्रति चूजा दिया जाएगा। योजना के तहत एक लाभुक को अधिकतम 45 चूजा दिया जाएगा। ताकि वह मुर्गी पालन कर धीरे-धीरे अपने व्यवसाय को बढ़ा सकें। सहायक कुकुट पदाधिकारी डॉ. कुमुद ने बतायी कि आम तौर पर एससी वर्ग के लोगों को सबसे ज्यादा जमीन और पैसे की समस्या होती है। चाहकर भी ये व्यवसाय नहीं कर पाते हैं। ऐसे लोगों को लाभान्वित करने के लिए विभाग द्वारा इस योजना का लाभ दिया जाएगा। बताया कि यदि किसान इसको व्यवसाय का रूप भी देना चाहें तो 10 हजार रुपए की लागत से छोटे से बांस का फार्म बनाकर अंडा का उत्पादन भी किया जा सकता है।


अंडा का भी कर सकते हैं व्यवसाय, कम लागत में होगा ज्यादा मुनाफा : डॉ. ब्रजेश

जिला पशुपालन पदाधिकारी डॉ. ब्रजेश कुमार सिन्हा ने बताया कि इस योजना के तहत दी जाने वाले मुर्गी से मांस के साथ अंडा का भी व्यवसाय कर सकते हैं। देसी नस्लों की अपेक्षा उन्नत नस्लों में अंडा देने की क्षमता ज्यादा होती है। इसके लिए जगह की भी ज्यादा जरूरत नहीं होती है। एक मुर्गी के लिए एक वर्ग फीट जगह की आवश्यकता होती है। उल्लेखनीय है कि मुर्गी पालन एक ऐसा व्यवसाय है, जिसे बहुत कम लागत से शुरू करके मोटी कमाई की जा सकती है। मुर्गी पालन के लिए विभाग द्वारा सिर्फ चूजा दिया जा रहा है। लेकिन उसके रख-रखाव के लिए जरूरी सामग्री की खरीदारी लाभुक को स्वंय करनी होगी।

महिलाओं को दी जाएगी प्राथमिकता, चूजा का टीकाकरण कर लाभुकों को दिया जाएगा

इस योजना का लाभ सिर्फ अनुसूचित जाति के लोगों को दिया जाना है। लेकिन महिलाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। लाभुक का चयन बीडीओ, बीएएचओ, विकास मित्र एवं मुखिया के सहयोग से किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर जीविका से भी सहयोग लिया जा सकता है। लाभुक चयन की प्रक्रिया में पारदर्शिता बरतने के लिए पदाधिकारी के साथ स्थानीय जनप्रतिनिधि को भी जांच चयन कमेटी में शामिल किया गया है। इस योजना में लाभुकों को 28 दिन का चूजा दिया जाएगा। बीमारियों से बचाव के लिए चूजा को टीकाकरण कर लाभुकों को दी जाएगी। क्योंकि लोग जानकारी के अभाव में चूजा को टीकाकरण नहीं कराते हैं। जिसके कारण बीमारी से चूजा मरने लगती हैं।

जिला पशुपालन कार्यालय।

कहा-10 हजार रुपए की लागत से फार्म बनाकर शुरू किया जा सकता है व्यवसाय
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