यज्ञ के हवन में नष्ट हो जाते हैं रोग कारक विषाणु
कुटुंबा प्रखंड के कझपा गांव में आयोजित श्रीराम महायज्ञ सह भगवान शिव मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा यज्ञ का समापन रविवार को हवन, पूर्णाहुति व विशाल महाभंडारा के साथ संपन्न हुआ। जिसमें उक्त गांव के अलावा निरंजनपुर, सिंहपुर, जीवा बिगहा, खैरा, भरत, गौरा समेत अन्य गांवों के सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। आचार्य बलराम शरण बापू ने पूरे विधि-विधान और वैदिक मंत्रोचारण के बीच पूजा अर्चना, हवन, पूर्णाहुति संपन्न कराया। हवन में सैकड़ों महिला पुरुष श्रद्धालु भक्त शामिल हुए। इसके पूर्व सुबह यज्ञ मंडप की परिक्रमा के लिए श्रद्धालु की अपार भीड़ उमड़ी। इसके बाद भव्य भंडारा का आयोजन किया गया। जिसमें उक्त गांव के अलावा निरंजनपुर, सिंहपुर, जीवा बिगहा, खैरा, भरत, गौरा समेत अन्य गांवों के सैकड़ों महिला-पुरुष और बच्चों ने प्रसाद ग्रहण किया। यज्ञाचार्य ने बताया कि यज्ञ के दौरान परिक्रमा से कई लाभ होते हैं। शास्त्रों में कहा गया है कि यज्ञ के परिक्रमा में शामिल होना यज्ञ कराने जितना लाभदायक है। वहीं यज्ञ के हवन से वातावरण शुद्ध होता है तथा कई बीमारियों के कारक विषाणुओं का नाश होता है। यज्ञ के दौरान संतों के प्रवचन से लोगों में धर्म-कर्म के प्रति रुचि बढ़ती है।
वकों ने निभाई महत्वपूर्ण भूमिका
आयोजन समिति के अध्यक्ष राजेंद्र सिंह ने बताया कि ग्रामीण नागदेव सिंह द्वारा निर्मित शिव मंदिर में मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा को लेकर यज्ञ का आयोजन किया गया था। जो ग्रामीणों के सहयोग से सफल हुआ। उन्होंने बताया कि आयोजन को सफल बनाने में युवाओं का विशेष सहयोग रहा है। इस कार्य के लिए उन्होंने उपाध्यक्ष रौशन कुमार सिंह, सचिव राणा रणधीर सिंह, उप सचिव दिलीप सिंह, कोषाध्यक्ष बसंत कुमार सिंह, उप कोषाध्यक्ष धर्मवीर सिंह , दूधेश्वर पासवान, संतन सिंह, हरिवंश कुमार सिंह, रविंद्र शर्मा, पवन कुमार, प्रिंस कुमार, प्रमिल सिंह, रंजन ठाकुर, मुकेश सिंह, वीरेंद्र कुमार सिंह, राजू पासवान, मंजेश पासवान समेत अन्य ग्रामीणों को धन्यवाद दिया है।
संतो के विदाई में छलके के आंसू
यज्ञ के उपरांत संतों के विदाई के दौरान ग्रामीण मायूस हो गए। भारी मन से संतों का विदाई किया। आयोजन समिति के अनिल सिंह ने बताया कि बड़े भाग्य वाले लोगों को सत्संग का लाभ मिलता है। उन्होंने कहा कि लोगों को संतो से बहुत कुछ सीखने को मिलता है। अगर उनका अनुकरण किया जाए तो मनुष्य अपने जीवन के बुरे आदतों को त्याग कर एक आदर्शवादी इंसान बन सकता है। उन्होंने लोगों को संतो के बताए गए मार्गों पर चलने का आह्वान किया। कहा कि प्राण प्रतिष्ठा के बाद मंदिर ग्रामीणों को पूजा पाठ के लिए सौंप दिया गया है।