ईद मिलादुन्नबी के मौके पर कौमी एकता की मिसाल

Aurangabad News - मुहम्मद साहब के जन्म दिवस के मौके पर मुस्लिम धर्मावलंबियों ने प्रखण्ड क्षेत्र में रविवार को जुलूस निकाल कर शांति...

Bhaskar News Network

Nov 11, 2019, 07:15 AM IST
Dev News - example of communist unity on the occasion of eid miladunnabi
मुहम्मद साहब के जन्म दिवस के मौके पर मुस्लिम धर्मावलंबियों ने प्रखण्ड क्षेत्र में रविवार को जुलूस निकाल कर शांति व एकता का पैगाम दिया। तिलौथू जामा मस्जिद से जुलूस निकल संघत बैंक जगदेव चौक बाजार होते पुनः जामा मस्जिद के पास पहुंच पहलाम हुआ। वहीं सरैया में भी अराकिन ए सरैया के तत्वावधान में वृहत जुलूस निकाल गांव की सभी गलियों से होते कर्बला के पास जाकर पहलाम किया गया। जुलूस में मुस्लिम युवाओं ने खूब तिरंगा लहराया। जुलूस में बाहर से आये मौलानाओं ने देश मे हिन्दू मुस्लिम दोनों कौम को एक साथ अमन चैन से रहने की वकालत की। मौलाना सखावत हुसैन ने कहा कि सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे झूठ हम दोनों के बीच दूरियों को बढ़ा रहा है। कुरान शरीफ में साफ लिखा है कि जिस मिट्टी में तूने जन्म लिया है अगर उस मिट्टी से मोहब्बत नहीं रखा तो तू मुसलमान कहलाने का हकदार नहीं। हज़रत मुहम्मद साहब नहीं होते तो हमें जीने का तरीका कौन सिखाता। ज़िंदा गाड़ने वाली बच्ची को कौन बचाता।

जुलूस में शामिल लोग।

सिटी रिपोर्टर| तिलौथू

मुहम्मद साहब के जन्म दिवस के मौके पर मुस्लिम धर्मावलंबियों ने प्रखण्ड क्षेत्र में रविवार को जुलूस निकाल कर शांति व एकता का पैगाम दिया। तिलौथू जामा मस्जिद से जुलूस निकल संघत बैंक जगदेव चौक बाजार होते पुनः जामा मस्जिद के पास पहुंच पहलाम हुआ। वहीं सरैया में भी अराकिन ए सरैया के तत्वावधान में वृहत जुलूस निकाल गांव की सभी गलियों से होते कर्बला के पास जाकर पहलाम किया गया। जुलूस में मुस्लिम युवाओं ने खूब तिरंगा लहराया। जुलूस में बाहर से आये मौलानाओं ने देश मे हिन्दू मुस्लिम दोनों कौम को एक साथ अमन चैन से रहने की वकालत की। मौलाना सखावत हुसैन ने कहा कि सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे झूठ हम दोनों के बीच दूरियों को बढ़ा रहा है। कुरान शरीफ में साफ लिखा है कि जिस मिट्टी में तूने जन्म लिया है अगर उस मिट्टी से मोहब्बत नहीं रखा तो तू मुसलमान कहलाने का हकदार नहीं। हज़रत मुहम्मद साहब नहीं होते तो हमें जीने का तरीका कौन सिखाता। ज़िंदा गाड़ने वाली बच्ची को कौन बचाता।

कौमी एकता का पैगाम

यह पैगाम कौमी एकता का दर्स देती है कि धर्म कोई हो लेकिन इस्लाम में सब का आदर समान किया गया है। क्यों कि हमारे पैगम्बर मुहम्मद साहब सारे आलम के लिए रहमत बना कर भेजे गए। वह हर आलम की रहमत हैं कि वह किसी आलम मैं रह जाते । तकरीर के द्वारा मौलाना ने पैगंबर मोहम्मद साहब की जीवनी, गरीबों के प्रति सेवा भाव सहित उनके द्वारा किए गए महान कार्यों पर प्रकाश डाला। इस मौके पर स्थानीय मदरसों में शिक्षा प्राप्त कर रहे छात्रों द्वारा मोहम्मद साहब की शान में नादिया पेश किया गया। कार्यक्रम की व्यवस्था में कमिटी के सदर इसरार अंसारी, सेक्रेटरी फिरोज खलीफा, मुखिया जावेद आलम, समाजसेवी राजन, बबलू खान, दानिश आदि मौजूद थे।

सिटी रिपोर्टर| तिलौथू

मुहम्मद साहब के जन्म दिवस के मौके पर मुस्लिम धर्मावलंबियों ने प्रखण्ड क्षेत्र में रविवार को जुलूस निकाल कर शांति व एकता का पैगाम दिया। तिलौथू जामा मस्जिद से जुलूस निकल संघत बैंक जगदेव चौक बाजार होते पुनः जामा मस्जिद के पास पहुंच पहलाम हुआ। वहीं सरैया में भी अराकिन ए सरैया के तत्वावधान में वृहत जुलूस निकाल गांव की सभी गलियों से होते कर्बला के पास जाकर पहलाम किया गया। जुलूस में मुस्लिम युवाओं ने खूब तिरंगा लहराया। जुलूस में बाहर से आये मौलानाओं ने देश मे हिन्दू मुस्लिम दोनों कौम को एक साथ अमन चैन से रहने की वकालत की। मौलाना सखावत हुसैन ने कहा कि सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे झूठ हम दोनों के बीच दूरियों को बढ़ा रहा है। कुरान शरीफ में साफ लिखा है कि जिस मिट्टी में तूने जन्म लिया है अगर उस मिट्टी से मोहब्बत नहीं रखा तो तू मुसलमान कहलाने का हकदार नहीं। हज़रत मुहम्मद साहब नहीं होते तो हमें जीने का तरीका कौन सिखाता। ज़िंदा गाड़ने वाली बच्ची को कौन बचाता।

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