विश्व कल्याणार्थ के लिए दादर में श्रद्धालुओं ने परंपरा के साथ सत्ययुगीन सूर्य स्तंभ की पूजा की

Aurangabad News - गोह प्रखंड के धार्मिक व ऐतिहासिक गांव दादर में गुरुवार को सत्ययुगीन सूर्य स्तंभ की पूजा श्रद्धालुओं ने बड़े...

Bhaskar News Network

Jun 14, 2019, 07:25 AM IST
Goh News - for world welfare devotees in dadar worshiped satyayugin sun pillar with tradition
गोह प्रखंड के धार्मिक व ऐतिहासिक गांव दादर में गुरुवार को सत्ययुगीन सूर्य स्तंभ की पूजा श्रद्धालुओं ने बड़े हर्षोल्लास के साथ की। यह पूजा पंडित जयकांत पाठक के द्वारा दर्जनों ग्रामीणों की उपस्थिति में विधिवत वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ संपन्न कराया। पूजा में शामिल सामाजिक कार्यकर्ता वेंकेटेश शर्मा ने कहा कि आज सारा विश्व अपने भोगवादी सोच के कारण प्रकृति का शोषण कर रहा है। जिसके कारण ग्लोबल वार्मिंग जैसी समस्या उत्पन्न हो गई है और अनेक स्थानों पर पानी की किल्लत देखने को मिल रही है। ऐसे में हम ग्रामवासियों ने अपने पूर्वजों द्वारा दिए गए प्रकृति प्रेम को ध्यान में रखते हुए सूर्य स्तंभ पूजन एवं तालाब पूजन शुरू किया है। उन्होंने अभी के जो हालात हैं उससे यह लगता है कि आनेवाले 10-15 सालों में ऐसी स्थिति आ जाएगी कि लोगों को दुबारा अपने पूर्वजों द्वारा बताए गए मार्ग पर ही चलना होगा। तभी विश्व का कल्याण संभव हो सकता है। इस मौके पर मुख्य श्रोता संत रामप्रवेश दास, बुटन शर्मा, गौतम शर्मा, रजनीश शर्मा, छोटू शर्मा, संजय शर्मा, शंकर पासवान, रामविलास शर्मा, अरुण शर्मा, योगेंद्र शर्मा, रामाधार राम, अजय शर्मा, रामएकबाल शर्मा, श्री बाबू सहित अन्य मौजूद थे।

पूर्वजों द्वारा बताए गए मार्गों पर चलने से होगा विश्व का कल्याण

सूर्य स्तंभ की पूजा करते ब्राह्मण व ग्रामीण।

सात वर्षों से लगातार की जा रही सूर्य स्तंभ की पूजा : दादर गांव में पिछले सात वर्षों से लगातार सूर्य स्तंभ की पूजा ग्रामीणों द्वारा की जा रही है। ग्रामीणों ने बताया कि गांव में तालाब की खुदाई के दौरान सूर्य स्तंभ का एक बड़ा टुकड़ा प्राप्त हुआ था। इसकी लंबाई 240 सेंटीमीटर और परिधि 150 सेंटीमीटर थी। इसके मिलते ही गांव में उत्साह का माहौल बन गया। क्योंकि ग्रामीणों को इसके बारे में पहले से ही पता था इसलिए यह तय करना मुश्किल नहीं हुआ कि यह पत्थर का टुकड़ा गांव के ही तालाब में दिखने वाले सूर्य स्तंभ का एक भाग है। इसके बाद ग्रामीणों ने उसी समय से बड़े उत्साह के साथ सूर्य स्तंभ की पूजा बड़े धूमधाम से शुरु कर दी। इससे ग्रामीणों में एक उत्सुकता जगी और प्रत्येक वर्ष सूर्य स्तंभ की पूजा की जाने लगी।

गांव में समय-समय पर मिलते रहता है सामाग्री : गांव में समय-समय पर एनबीपीडब्ल्यू (उत्तरी काली पॉलिशदार मृदभांड) से संबंधित कई अवशेष मिलते रहता है, जिसे मौर्य काल से जोड़ा जाता है। यह अवशेष तालाब के अलावा गांव के इर्द-गिर्द भी मिलता है। इसकी जानकारी मिलने पर लगभग चार-पांच साल पहले दिल्ली से पुरातत्व विभाग की एक टीम भी आई थी। जो खुदाई में मिले अवशेषों की जांच कर चली गई। इसके बाद सरकार के द्वारा इसमें कोई पहल भी नहीं की गई। अगर सरकार इस गांव में मिले अवशेषों की अच्छी से जांच करे तो इसमें कीमती चीजें भी मिल सकती हैं।

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