औरंगाबाद में आठ लाख से ज्यादा पशुओं पर मात्र 22 डॉक्टर, पशुपालक परेशान

Aurangabad News - सिटी रिपोर्टर | औरंगाबाद सदर किसानों की अर्थव्यवस्था पशुपालन पर टिकी होती है। परंतु इन दिनों जिले के पशुपालक...

Dec 05, 2019, 06:16 AM IST
Aurangabad(Bihar) News - in aurangabad only 22 doctors cattle ranchers upset over eight lakh animals
सिटी रिपोर्टर | औरंगाबाद सदर

किसानों की अर्थव्यवस्था पशुपालन पर टिकी होती है। परंतु इन दिनों जिले के पशुपालक जिले में पशु चिकित्सकों के अभाव के कारण अपने मवेशियों का इलाज झोलाछाप डॉक्टरों से करवाने को विवश हैं। जिला पशुपालन कार्यालय चिकित्सकों की कमी के कारण अपनी बदहाली पर आंसू बहाने को विवश है। 35 पशु अस्पताल का संचालन मात्र 22 चिकित्सकों के भरोसे हो रहा है। सरकार ग्रामीण क्षेत्रों के पशुपालकों को दूध व्यवसाय से जुड़ने के लिए तरह-तरह का कार्यक्रम चला रही है। किसानों को जागरूक करने के लिए दुधारू पशु खरीदने पर अनुदान भी दे रही है, ताकि लोग ज्यादा से ज्यादा पशुओं को रख सकें। पशु चिकित्सकों की घोर कमी की मार झेल रहे जिले के पशुपालक निजी पशु चिकित्सकों के हाथों लूटने को मजबूर हैं। वहीं विभाग मौन बना हुआ हैं।

एक चिकित्सक तीन प्रखंड के प्रभार में

पशु चिकित्सकों के कमी के कारण ना तो समय पर टीकाकरण का कार्य हो पाता है, ना ही सरकार की किसी योजना का संचालन भी समय से हो पाता है। एक-एक चिकित्सक तीन पशु अस्पतालों के प्रभार में हैं। वहीं जिला पशु अस्पताल में दूसरे प्रखंड के डॉक्टर बैठते हैं। प्रखंड पशुपालन पदाधिकारी तीन-तीन प्रखंड के प्रभार में है। जिससे जिले के कुल 2012 के जनगणना के मुताबिक 8 लाख 8 हजार 383 पशुओं के एवज में 22 चिकित्सक हैं। एक चिकित्सक के ऊपर 35 हजार से भी अधिक पशुओं के स्वास्थ की जिम्मेवारी हैं।

जिले में कुल 35 पशु अस्पताल, एक-एक डॉक्टर को तीन-तीन प्रखंड का प्रभार

झोलाछाप डॉक्टरों की कट रही चांदी

जिले में पशु अस्पतालों की तुलना में डॉक्टर कम होने के कारण झाेलाछाप डॉक्टरों की चांदी है। मवेशी बीमार होते हैं तो पशुपालकों को झोलाछाप डॉक्टरों के अलावा और कोई चारा नहीं होता है। वे लोग झोलाछाप डॉक्टरों से पशुओं को इलाज कराने को लेकर विवश होते हैं। जिसका फायदा झोलाछाप डॉक्टरों को मिलती है। झोलाछाप डॉक्टर पशुपालकों से मनमाने रुपए वसूलते हैं। जिससे पशुपालक को आर्थिक रूप से भी नुकसान होता है।

जानिए किस प्रखंड में हैं कितने पशु

प्रखंड गाय भैस भेड़ बकरी सुअर घोड़ा

औरंगाबाद 40639 16909 3233 18569 503 350

बारूण 9838 19308 4710 14891 467 0

दाउदनगर 21078 23649 1374 34435 284 0

देव 32559 9011 2075 13526 2390 0

गोह 31312 21480 211 19822 575 0

हसपुरा 13411 13361 566 10226 81 327

कुटुम्बा 30032 16558 2275 15321 1347 0

मदनपुर 33988 10939 3553 16927 2666 67

नवीनगर 55274 24095 5491 21846 905 81

ओबरा 27721 23147 569 18138 769 189

रफीगंज 47805 20856 899 24826 855 0

रिक्ति के हिसाब से डॉक्टरों की कमी जिले में है। विभाग को इसके लिए लिखा जाएगा और जल्द ही डॉक्टरों की कमी दूर की जाएगी। -ब्रजेश कुमार सिन्हा, जिला पशुपालन पदाधिकारी

सबसे ज्यादा गोह व नवीनगर में 5 तो सबसे कम देव में है एक पशु अस्पताल

जिले के गोह व नवीनगर में सबसे ज्यादा 5 पशु अस्पताल हैं। जबकि देव में सबसे कम एक अस्पताल है। वहीं सदर प्रखंड में चार पशु अस्पताल हैं। जबकि मदनपुर, रफीगंज, बारूण, कुटुम्बा दाउदनगर, ओबरा में 3-3 अस्पताल हैं। इसके साथ-साथ हसपुरा में एक अस्पताल है। जहां प्रखंड के पशुओं का इलाज किया जाता है। लेकिन डॉक्टरों की कमी से इन अस्पताल सिर्फ कागजों पर ही संचालित हो रही है। महीने में अधिकांश दिन सभी अस्पतालों में ताला लटका ही नजर आता है। जिससे पशु पालकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

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