कार्तिक पूर्णिमा कल, सर्वार्थ सिद्धि योग का बन रहा संयोग

Aurangabad News - सिटी रिपोर्टर | औरंगाबाद नगर कार्तिक पूर्णिमा पर सर्वार्थ सिद्धि योग में स्नान दान का संयोग बन रहा है। सनातन...

Bhaskar News Network

Nov 11, 2019, 06:16 AM IST
Aurangabad(Bihar) News - kartik poornima tomorrow
सिटी रिपोर्टर | औरंगाबाद नगर

कार्तिक पूर्णिमा पर सर्वार्थ सिद्धि योग में स्नान दान का संयोग बन रहा है। सनातन धर्म के लिए पुण्यकारी मास कहा जाने वाले कार्तिक मास में पूर्णिमा का महत्व ग्रह और नक्षत्र से बढ़ गया है। मंगलवार यानि कल भरणी नक्षत्र व सर्वार्थ सिद्धि योग के साथ ग्रह-गोचरों के शुभ संयोग में कार्तिक पूर्णिमा का पर्व मनाया जाएगा। भारतीय संस्कृति में कार्तिक पूर्णिमा का धार्मिक एवं आध्यात्मिक माहात्म्य है। कार्तिक पूर्णिमा को काशी में देवताओं की दीपावली के रूप में मनाया जाता है। इस दिन कई धार्मिक आयोजन, पवित्र नदी में स्नान, पूजन और दान का विधान है। ज्योतिष विद्वानों का कहना है कि इस बार शुभ योग में स्नान व दान का संयोग बन रहा है।

कार्तिक पूर्णिमा पर स्नान - दान का विशेष महत्व

कार्तिक पूर्णिमा सभी पूर्णिमाओं में श्रेष्‍ठ मानी जाती है। मान्‍यता है कि इस दिन भगवान शिव ने देवलोक पर हाहाकार मचाने वाले त्रिपुरासुर नाम के राक्षस का संहार किया था। उसके वध की खुशी में देवताओं ने इसी दिन दीपावली मनाई थी। हर साल लोग कार्तिक पूर्णिमा के दिन देव दीपावली मनाते हैं। हिन्‍दू मान्‍यताओं के अनुसार इसी दिन भगवान विष्‍णु ने मत्‍स्‍यावतार लिया था। इस दिन गंगा समेत अन्‍य पवित्र नदियों में स्‍नान करना पुण्‍यकारी माना जाता है। वहीं दीपदान करना भी विशेष फलदायी होता है। जानकारों के अनुसार हिन्‍दू कैलेंडर में आठवें महीने का नाम कार्तिक है। कार्तिक महीने की पूर्णिमा को कार्तिक पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। पूर्णिमा पर स्नान- दान का विशेष महत्व है।

जम्होर के रढ़ुआ धाम में हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं की जुटेगी भीड़

कार्तिक पूर्णिमा पर स्नान व दान करने को लेकर जिले के जम्होर स्थित रढ़ुआ घाम के पुनपुन व बटाने नदी संगम स्थल पर मेला का आयोजन किया जाएगा। जहां हजारों की भीड़ जुटेगी। नदी में स्नान करने के बाद लोग वहां विष्णु भगवान के मंदिर में पूजा अर्चना करेंगे। यहां प्रत्येक वर्ष मेला में जिले के विभिन्न प्रखंडों से लोग पूजा अर्चना करने पहंुचते है। स्थानीय समिति के द्वारा यहां पूरी व्यवस्था की जा रही है। पंडित राजेश्वर उपाध्याय के अनुसार 11 नवंबर को शाम 06 बजकर 02 मिनट से पूर्णिमा तिथि आरंभ होगी। जो 12 नवंबर को शाम 07 बजकर 04 मिनट तक रहेगी। हिन्‍दू कैलेंडर के सभी 12 महीनों में से कार्तिक मास को सबसे पवित्र और शुभ माना जाता है। कार्तिक मास के पवित्र स्‍नान की शुरुआत शरद पूर्णिमा से होती है और इसका समापन कार्तिक पूर्णिमा के दिन होता है। शुभ व मांगलिक कार्यों की शुरुआत के लिए भी कार्तिक पूर्णिमा का दिन बेहद अच्‍छा माना जाता है।

कार्तिक पूर्णिमा की पूजा विधि









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