रितीया के रंगवा हो पिरितिया के पानी...पर भाव विभोर हो गए दर्शक

Aurangabad News - कवि सम्मेलन में आकाशवाणी भागलपुर के निदेशक कवि शंकर कैमुरी की कविता रितीया के रंगवा हो पिरितिया के पानी, रंग दा...

Bhaskar News Network

Nov 11, 2019, 06:25 AM IST
Aurangabad(Bihar) News - ritiya ki rangwa ho piritiya ki paani but the sentiment got different
कवि सम्मेलन में आकाशवाणी भागलपुर के निदेशक कवि शंकर कैमुरी की कविता रितीया के रंगवा हो पिरितिया के पानी, रंग दा रंग रेजरवा चुनर मोरी धानी को सुनकर दर्शक भाव विभोर हो गए और वाह-वाह कर करने लगे। वे बिहार सरकार एवं जिला प्रशासन औरंगाबाद के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित गजना महोत्सव के समापन समारोह के दौरान अनुग्रह नरायण स्टेडियम में कवि सम्मेलन में अपनी प्रस्तुति दे रहे थे। देर रात्रि तक कवि सम्मेलन का लोग लुफ्त उठाते रहे। कवियों ने हास्य, व्यंग्य, श्रंगार रस एवं देशभक्ति पर आधारित काव्यपाठ कर लोगों का भरपूर मनोरंजन किया। वहीं बीच-बीच मे वर्तमान राजनीति पर व्यंग कसते लोगों को भी गुदगुदाया। कवि सम्मेलन का उद्घाटन एसडीओ डॉ प्रदीप कुमार, बीडीओ डॉ ओम राजपूत, नगर पंचायत कार्यपालक पदाधिकारी ऋषिकेश अवस्थी, थानाध्यक्ष श्याम किशोर सिंह व शंकर कैमूरी ने संयुक्त रूप से दीप जलाकर किया। इसके बाद एसडीओ व बीडीओ ने सभी कवियों को अंगवस्त्र एवं माला पहनाकर स्वागत किया। इस मौके पर मौके पर सिद्धेश्वर विद्यार्थी, मुखिया संजय सिंह, मुखिया आमोद चन्द्रवंशी, सुखदेव प्रसाद सिंह, प्रो सुनील बोस, पैक्स अध्यक्ष कुमार राजेन्द्र सिंह, रामानुज पाण्डेय, प्रदीप सिंह, रामजीत शर्मा, हाजी मुश्ताक, धनंजय कुमार सिंह, प्रमेंद्र कुमार सिंह, मनीष कुमार सिंह, राजेश कुमार सिहं, मो रमजान अली, शंकर प्रसाद, मनोज सिन्हा, संजीव कुमार आदि मौजूद थे।

कवि सम्मेलन में प्रस्तुति देती कवयित्री।

कबीरा हूं मैं एक पल के लिए...

उतर प्रदेश के प्रताप गढ़ की कवयित्री मीरा तिवारी के द्वारा कृष्ण और मीरा पर प्यार के ढाई आखर कबीरा हूं मैं एक पल के लिए श्याम बन जाइए, जो युगों से दीवानी मीरा हूं पर श्रोताओ ने खूब तालियां बजाई। मध्यप्रदेश के सतना से आए कवि सत्येंद्र पांडेय ने देशभक्ति कविता कश्मीर भारत का है भारत का ही रहेगा, अब हम लाहौर में तिरंगा लहराएंगे, भेड़ियों का झुंड सिर्फ घुसपैठ ही करेगा, शेर खूब वाहवाही बटोरी। वहीं कवयित्री साक्षी तिवारी ने बड़ी कुर्बानियों के बाद पाई है यह आजादी, अजमेर भी प्यारा है प्यारी है मथुरा काशी, हम मलय तमिल के हो या हो बंगला पर दर्शक दीर्घा में बैठे लोगों की तालियों बजाई।

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